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Bahraich News: हुजूरपुर व पयागपुर में लंपी रोग की दस्तक, अब तक पांच मवेशी चपेट में आए

Mon, 07 Sep 2026 12:04 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 07 Sep 2026 12:04 AM IST
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Lumpy disease reaches Huzurpur and Payagpur; five cattle affected so far.
बहराइच। बरसात के मौसम में गोवंशों में होने वाले संक्रामक लंपी रोग ने जिले में दस्तक दे दी है। पयागपुर में दो पशु बीमार हैं, वहीं हुजूरपुर क्षेत्र में सप्ताह भर पहले तीन गोवंशों में लंपी के लक्षण पाए गए थे। पशुपालकों की सूचना पर पशु चिकित्सा विभाग ने तत्काल उनका टीकाकरण कराया, जिसके बाद तीनों पशु स्वस्थ हो गए। हालांकि पयागपुर में पशुपालक खुद अपने मवेशी का इलाज करा रहे हैं। विभाग का कहना है कि जिले में अभी संक्रमण की स्थिति गंभीर नहीं है और इस वर्ष लंपी रोग से किसी पशु की मौत भी नहीं हुई है।
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जिले में बड़ी संख्या में पशुपालक गोवंश पालते हैं। 20वीं पशुगणना के अनुसार कुल पशुधन की संख्या लगभग 15.61 लाख है। इनमें 3,38,292 गोवंशीय और 4,24,265 महिषवंशीय पशु हैं। इसके अलावा भेड़, बकरी और अन्य मवेशी शामिल हैं। बरसात के दौरान मौसम में तेजी से हो रहे बदलाव से पशुओं में संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ गया है। पशुओं को विभिन्न संक्रामक रोगों से बचाने के लिए पशु चिकित्सा विभाग ने 22 जुलाई से टीकाकरण अभियान शुरू किया था। अभियान के तहत करीब छह लाख पशुओं का टीकाकरण किया जाना था।
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अभियान शुरू होने के बाद पैरावेट के हड़ताल पर चले जाने से टीकाकरण कार्य प्रभावित हुआ। हालांकि विभाग के 28 पशु चिकित्सक और चार उप मुख्य पशु चिकित्सक टीकाकरण का कार्य करते रहे है। इस बीच जिले में लंपी रोग पैर पसारने लगा है। इससे पशुपालक दहशत में हैं।
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पयागपुर में ग्रामीण खुद करा रहे इलाज
पयागपुर तहसील के ग्राम पंचायत खड़पुरवा निवासी प्रदीप तिवारी ने बताया कि उनकी गाय के शरीर पर छोटे-छोटे फोड़े निकल आए और उसने दूध देना बंद कर दिया। स्थानीय चिकित्सक को दिखाने पर लंपी रोग की जानकारी हुई। इसके बाद वह अपने स्तर से गाय का इलाज करा रहे हैं। उधर ग्राम कुशभौना निवासी अमित कुमार ने भी अपने खर्च पर गोवंश का उपचार कराने की बात कही। वहीं, पशुचिकित्सालय कलाम सतरही के चिकित्सक डॉ. सुखदेव सिंह ने कहा कि लंपी का टीका केंद्र तक नहीं आया है। ऐसे में पयागपुर की तीन न्याय पंचायतें टीकाकरण से वंचित हैं।
सप्ताह भर इलाज से स्वस्थ हुए मवेशी
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजेश कुमार उपाध्याय, ने बताया कि बीते सप्ताह हुजूरपुर में तीन गोवंशों में लंपी रोग के लक्षण दिखे थे लेकिन सप्ताह भर इलाज के बाद अब वह मवेशी पूरी तरह स्वस्थ हैं। उन्होंने पशुपालकों से अपील की है कि पशुओं में किसी भी तरह के बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल निकटतम पशु चिकित्सा केंद्र से संपर्क करें। सीवीओ ने बताया कि लंपी से बचाव के लिए जिले में 48 हजार वैक्सीन की खेप पहुंची थी, जिसमें करीब 19 हजार पशुओं का टीकाकरण कराया जा चुका है।



लंपी रोग के प्रमुख लक्षण

1. गोवंश की त्वचा के नीचे छोटी-छोटी गांठें पड़ जाना।
2. आंख, कान व नाक से पानी निकलते रहना।
3. संक्रमण बढ़ने पर पशु द्वारा दूध देना बंद करना।


फरवरी माह तक बरतें सावधानी

1. पशुओं के बाड़े में साफ-सफाई व्यवस्था दुरुस्त रखें।
2. पोटेशियम परमैंगनेट को पांच प्रतिशत की दर से पानी में मिलाकर बाड़े की धुलाई करें।
3. गोवंश को समय-समय पर नीम की पत्ती उबालकर उसके पानी से नहलाएं।

लंपी के संक्रमण से नहीं हुई मौत

जिले में टीकाकरण का कार्य कराया जा रहा है। लंपी रोग से बचाव के लिए भी विभाग की तैयारियां पूरी हैं। लंपी रोग से बचाव के लिए कुछ दिनों पूर्व 48,000 वैक्सीन जिले को भेजी गई थीं, जिसमें से लगभग 19 हजार पशुओं को लंपी रोग की वैक्सीन लगवाई गई है। जिले में अभी संक्रमण का प्रकोप गंभीर स्थिति में नहीं है। इस वर्ष अभी तक एक भी मौत लंपी के संक्रमण के कारण नहीं हुई है।
डॉ.राजेश कुमार उपाध्याय, सीवीओ, बहराइच।
जिले में मवेशियों की संख्या
कुल पशुधन की संख्या - 15.61 लाख
गोवंशीय पशु: 3,38,292
महिषवंशीय पशु: 4,24,265
बकरी: 5,81,585
भेड़: 15,488
सुअर: 5,136
घोड़ा, टट्टू, खच्चर: 20,158
कुक्कुट (पोल्ट्री/मुर्गी पालन): 1,76,152
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