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Bahraich News: मैदान बचे, पर टूट गई खिलाड़ी गढ़ने की व्यवस्था
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बदहाल खेल मैदान।
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बहराइच। जिले के माध्यमिक विद्यालयों की हकीकत खेलो इंडिया और फिट इंडिया जैसे अभियानों को पलीता लगा रही है। जिले के 310 माध्यमिक विद्यालयों में खेल मैदान दर्ज हैं, लेकिन शहर के कई प्रमुख विद्यालयों में या तो मैदान बदहाल हैं या फिर खेल शिक्षक नहीं हैं। कहीं झाड़ियां और गंदगी मैदान पर कब्जा किए हैं तो कहीं खेल शिक्षक के सेवानिवृत्त होने के महीनों बाद भी नई नियुक्ति नहीं हुई। ऐसे में खेल पीरियड केवल औपचारिकता बनकर रह गया है और विद्यार्थियों की प्रतिभा स्कूल स्तर पर ही दम तोड़ रही है।
शहर के विद्यालयों की पड़ताल में सामने आया कि संसाधनों की कमी का सीधा असर बच्चों के नियमित अभ्यास पर पड़ रहा है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विद्यालय स्तर पर ही खेल सुविधाएं मजबूत नहीं होंगी तो जिले से राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार करना मुश्किल होगा।
मैदान में झाड़ियां, खेल अभ्यास पर असर
पंडित भगवानदीन मिश्र गांधी इंटर कॉलेज में खेल मैदान वर्षों से उपेक्षा का शिकार है। मैदान में बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं और मुख्य द्वार के पास गंदगी का अंबार लगा है। मैदान पूरी तरह उपयोगी न होने के कारण विद्यार्थियों को सीमित स्थान में अभ्यास करना पड़ता है। विद्यालय के प्रधानाचार्य जसवंत सिंह ने बताया कि विद्यालय में 613 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। खेल शिक्षक तैनात हैं और समय-समय पर मैदान की सफाई कराकर बच्चों को बास्केटबॉल, वॉलीबॉल, कबड्डी और एथलेटिक्स का अभ्यास कराया जाता है, लेकिन मैदान का समुचित विकास जरूरी है।
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खेल शिक्षक की कुर्सी खाली
शहर के अति प्राचीन महाराज सिंह इंटर कॉलेज में मैदान तो है, लेकिन पुराने परिसर का मैदान झाड़ियों से भर गया है। इसलिए छात्र नए परिसर में कबड्डी, क्रिकेट, खो-खो और वॉलीबॉल का अभ्यास करते हैं। प्रधानाचार्य श्रीप्रकाश गुप्ता ने बताया कि खेल शिक्षक रामपाल यादव 31 मार्च को सेवानिवृत्त हो गए। तब से नए खेल शिक्षक की नियुक्ति नहीं हुई है। विद्यालय प्रबंधन समिति सेना से सेवानिवृत्त एक शिक्षक को खेल गतिविधियों की जिम्मेदारी देने पर विचार कर रही है। नियमित प्रशिक्षक नहीं होने से प्रतियोगिताओं की तैयारी भी प्रभावित हुई है।
विशेषज्ञों की राय
राजकीय इंटर कॉलेज के सेवानिवृत्त प्रवक्ता वीएस श्रीवास्तव का कहना है कि खेल प्रतिभा केवल मैदान से नहीं, बल्कि प्रशिक्षित खेल शिक्षक और नियमित अभ्यास से विकसित होती है। यदि मैदान बदहाल हों और प्रशिक्षक ही न हों तो छात्रों की प्रतिभा आगे नहीं बढ़ पाती।
ग्राउंड रिपोर्ट की प्रमुख बातें
जिले के 310 माध्यमिक विद्यालयों में खेल मैदान दर्ज हैं।
शहर के पुराने विद्यालयों के खेल मैदान बदहाल।
गांधी इंटर कॉलेज में 613 छात्र होने के बावजूद मैदान पूरी तरह उपयोगी नहीं।
महाराज सिंह इंटर कॉलेज में खेल शिक्षक के अभाव में नियमित प्रशिक्षण प्रभावित।
मैदानों के रखरखाव और खेल संसाधनों की कमी से खेल गतिविधियां सीमित।
पहले सुनहरी थी तस्वीर
-करीब 30 वर्ष पहले गांधी इंटर कॉलेज का मैदान काफी बड़ा और खुला था। सुबह-शाम फुटबॉल, हॉकी, कबड्डी और एथलेटिक्स का नियमित अभ्यास होता था। इंटर कॉलेज प्रतियोगिताओं में हमारे स्कूल के खिलाड़ी जिले में पहचान बनाते थे। आज मैदान की हालत देखकर दुख होता है। खेल के लिए पर्याप्त जगह ही नहीं बची है।- सैदुद्दीन, पूर्व छात्र, गांधी इंटर कॉलेज
-हमारे समय में महाराज सिंह इंटर कॉलेज का मैदान खेल गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था। वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिताओं के साथ रोज अभ्यास होता था। अब मैदान सिकुड़ गया है और खेल शिक्षक भी नहीं हैं। ऐसे माहौल में नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का अवसर नहीं मिल पा रहा है। -शुएब अहमद, पूर्व छात्र, महाराज सिंह इंटर कॉलेज
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शहर के विद्यालयों की पड़ताल में सामने आया कि संसाधनों की कमी का सीधा असर बच्चों के नियमित अभ्यास पर पड़ रहा है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विद्यालय स्तर पर ही खेल सुविधाएं मजबूत नहीं होंगी तो जिले से राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार करना मुश्किल होगा।
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मैदान में झाड़ियां, खेल अभ्यास पर असर
पंडित भगवानदीन मिश्र गांधी इंटर कॉलेज में खेल मैदान वर्षों से उपेक्षा का शिकार है। मैदान में बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं और मुख्य द्वार के पास गंदगी का अंबार लगा है। मैदान पूरी तरह उपयोगी न होने के कारण विद्यार्थियों को सीमित स्थान में अभ्यास करना पड़ता है। विद्यालय के प्रधानाचार्य जसवंत सिंह ने बताया कि विद्यालय में 613 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। खेल शिक्षक तैनात हैं और समय-समय पर मैदान की सफाई कराकर बच्चों को बास्केटबॉल, वॉलीबॉल, कबड्डी और एथलेटिक्स का अभ्यास कराया जाता है, लेकिन मैदान का समुचित विकास जरूरी है।
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खेल शिक्षक की कुर्सी खाली
शहर के अति प्राचीन महाराज सिंह इंटर कॉलेज में मैदान तो है, लेकिन पुराने परिसर का मैदान झाड़ियों से भर गया है। इसलिए छात्र नए परिसर में कबड्डी, क्रिकेट, खो-खो और वॉलीबॉल का अभ्यास करते हैं। प्रधानाचार्य श्रीप्रकाश गुप्ता ने बताया कि खेल शिक्षक रामपाल यादव 31 मार्च को सेवानिवृत्त हो गए। तब से नए खेल शिक्षक की नियुक्ति नहीं हुई है। विद्यालय प्रबंधन समिति सेना से सेवानिवृत्त एक शिक्षक को खेल गतिविधियों की जिम्मेदारी देने पर विचार कर रही है। नियमित प्रशिक्षक नहीं होने से प्रतियोगिताओं की तैयारी भी प्रभावित हुई है।
विशेषज्ञों की राय
राजकीय इंटर कॉलेज के सेवानिवृत्त प्रवक्ता वीएस श्रीवास्तव का कहना है कि खेल प्रतिभा केवल मैदान से नहीं, बल्कि प्रशिक्षित खेल शिक्षक और नियमित अभ्यास से विकसित होती है। यदि मैदान बदहाल हों और प्रशिक्षक ही न हों तो छात्रों की प्रतिभा आगे नहीं बढ़ पाती।
ग्राउंड रिपोर्ट की प्रमुख बातें
जिले के 310 माध्यमिक विद्यालयों में खेल मैदान दर्ज हैं।
शहर के पुराने विद्यालयों के खेल मैदान बदहाल।
गांधी इंटर कॉलेज में 613 छात्र होने के बावजूद मैदान पूरी तरह उपयोगी नहीं।
महाराज सिंह इंटर कॉलेज में खेल शिक्षक के अभाव में नियमित प्रशिक्षण प्रभावित।
मैदानों के रखरखाव और खेल संसाधनों की कमी से खेल गतिविधियां सीमित।
पहले सुनहरी थी तस्वीर
-करीब 30 वर्ष पहले गांधी इंटर कॉलेज का मैदान काफी बड़ा और खुला था। सुबह-शाम फुटबॉल, हॉकी, कबड्डी और एथलेटिक्स का नियमित अभ्यास होता था। इंटर कॉलेज प्रतियोगिताओं में हमारे स्कूल के खिलाड़ी जिले में पहचान बनाते थे। आज मैदान की हालत देखकर दुख होता है। खेल के लिए पर्याप्त जगह ही नहीं बची है।- सैदुद्दीन, पूर्व छात्र, गांधी इंटर कॉलेज
-हमारे समय में महाराज सिंह इंटर कॉलेज का मैदान खेल गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था। वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिताओं के साथ रोज अभ्यास होता था। अब मैदान सिकुड़ गया है और खेल शिक्षक भी नहीं हैं। ऐसे माहौल में नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का अवसर नहीं मिल पा रहा है। -शुएब अहमद, पूर्व छात्र, महाराज सिंह इंटर कॉलेज

बदहाल खेल मैदान।

बदहाल खेल मैदान।