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Bahraich News: मां ने प्राण देकर बचा ली इकलौते बेटे की जान
Fri, 05 May 2023 10:52 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Fri, 05 May 2023 10:52 PM IST
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मृतक खुशबू का बेटा कार्तिक।
बहराइच। कैसरगंज कोतवाली क्षेत्र में हुए दर्दनाक हादसे में हुई पांच मौतों ने सभी को झकझोर कर रख दिया। हादसे के बाद पीड़ित परिवारों के साथ ही पूरे गांव क्षेत्र में व्याप्त विवाह कार्यक्रमों की खुशियां काफूर हो गईं। परिवारों में कोहराम मच गया। इस दौरान एक मां ने अपनी एकलौते पुत्र की जान बचाने के लिए अपनी प्राण तक की चिंता नहीं की। मां खुशबू ने अपनी जान दे दी लेकिन दो साल के मासूम को एक भी खरोंच नहीं आने दी। हुजूरपुर थाना क्षेत्र के पुरैनी निवासी मंशाराम की दो बेटियां है। बड़ी बेटी खुशबू की शादी हो चुकी है, वहीं दूसरी बेटी नंदिनी का तिलक बीते बृहस्पतिवार को था। तिलक के बाद घर वापसी के दौरान देर रात अचानक यह दर्दनाक हादसा हुआ। इसमे पांच लोगों की मौत हो हुई जबकि 10 लोग गंभीर घायल हैं। हादसे के वक्त टेंपो में मंशाराम की बड़ी बेटी खुशबू और अपने दो वर्षीय पुत्र कार्तिक के साथ टेंपो में सवार थी। टक्कर लगने के बाद खुशबू की तो मौत हो गई लेकिन उसकी गोद में मौजूद कार्तिक को खरोंच तक नहीं आई। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि हादसे के वक्त खुशबू अपने दो वर्ष के मासूम के लिए सुरक्षा कवच बनी थी। घायल अवस्था में जब उसे टेंपो से निकाला गया तो, मासूम कार्तिक उसकी गोद और बाहों के बीच पूरी तरह सुरक्षित था। मां की ममता की ढाल के कारण उसे एक खरोंच तक नहीं आई। हालांकि मां की मौत के बाद उसकी सूनी आंखें अपनी मां को बेचैनी से ढूंढ़ती जरूर दिखी। हादसे ने बलराज के एक बेटे अनिल (13) को उससे छीन लिया जबकि दूसरा बेटा राजितराम (11) जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है। हादसे में मृत जयकरन भी अपने पीछे दो बच्चों को अनाथ कर गए।
पांच बच्चों के सिर से छिना पिता का साया
कैसरगंज में हुए भीषण हादसे ने पांच बच्चों को अनाथ कर दिया। वाहन चालकों की एक चूक ने पांच बच्चों के सिर से पिता का साया छीन लिया। हादसे में मृत हरिश्चंद्र (40) के चार बेटियां और एक बेटा था। सबसे बड़ी चांदनी (13), नंदिनी (12), शीलू (08), गूंजना (5) और सबसे छोटा बेटा सूरज (2) वर्ष का है। बच्चों के भरण पोषण के लिए परिवार में हरिश्चंद्र इकलौता कमाने वाला सदस्य था।
सभी घायलों को बेहतर इलाज का निर्देश
हादसे में घायल हुए लोगों का हालचाल जानने के लिए डीएम डॉ. दिनेश चंद्र व एडीएम अनिरुद्ध प्रताप सिंह महाराजा सुहेलदेव स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के सर्जिकल वार्ड पहुंचे। घायलों से उनका हालचाल पूछने के बाद डीएम ने मेडिकल कालेज प्रशासन को निर्देश दिया कि सभी को इलाज की बेहतर सुविधाएं मुहैया कराई जाए। इसमें किसी भी तरह की कोई लापरवाही न बरती जाए।
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मातम में बदली शादी की खुशियां
बेटी के हाथ पीले करने की खुशी साथ लेकर निकले मंशाराम को नहीं पता था की उसकी खुशी पल भर में मातम में बदल जाएगी। पीड़ित मंशाराम ने बताया कि हादसे ने उसकी बड़ी बेटी खुशबू, नाती कार्तिक और कई परिजनों को छीन लिया। उसने बताया की उसकी छोटी बेटी नंदिनी का तिलक बृहस्पतिवार को और 15 मई को शादी थी। शादी की सारी तैयारियां पूरी हो गई थी। लेकिन अब शादी की खुशियां मातम में बदल गई हैं। सभी का रो-रो कर बुरा हाल है। ऐसे में अब शादी होगी कि नहीं, इस पर भी संशय है।
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पांच बच्चों के सिर से छिना पिता का साया
कैसरगंज में हुए भीषण हादसे ने पांच बच्चों को अनाथ कर दिया। वाहन चालकों की एक चूक ने पांच बच्चों के सिर से पिता का साया छीन लिया। हादसे में मृत हरिश्चंद्र (40) के चार बेटियां और एक बेटा था। सबसे बड़ी चांदनी (13), नंदिनी (12), शीलू (08), गूंजना (5) और सबसे छोटा बेटा सूरज (2) वर्ष का है। बच्चों के भरण पोषण के लिए परिवार में हरिश्चंद्र इकलौता कमाने वाला सदस्य था।
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सभी घायलों को बेहतर इलाज का निर्देश
हादसे में घायल हुए लोगों का हालचाल जानने के लिए डीएम डॉ. दिनेश चंद्र व एडीएम अनिरुद्ध प्रताप सिंह महाराजा सुहेलदेव स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के सर्जिकल वार्ड पहुंचे। घायलों से उनका हालचाल पूछने के बाद डीएम ने मेडिकल कालेज प्रशासन को निर्देश दिया कि सभी को इलाज की बेहतर सुविधाएं मुहैया कराई जाए। इसमें किसी भी तरह की कोई लापरवाही न बरती जाए।
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मातम में बदली शादी की खुशियां
बेटी के हाथ पीले करने की खुशी साथ लेकर निकले मंशाराम को नहीं पता था की उसकी खुशी पल भर में मातम में बदल जाएगी। पीड़ित मंशाराम ने बताया कि हादसे ने उसकी बड़ी बेटी खुशबू, नाती कार्तिक और कई परिजनों को छीन लिया। उसने बताया की उसकी छोटी बेटी नंदिनी का तिलक बृहस्पतिवार को और 15 मई को शादी थी। शादी की सारी तैयारियां पूरी हो गई थी। लेकिन अब शादी की खुशियां मातम में बदल गई हैं। सभी का रो-रो कर बुरा हाल है। ऐसे में अब शादी होगी कि नहीं, इस पर भी संशय है।