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Bahraich News: भरथापुर मार्ग पर एक घंटे खड़ा रहा हाथी
Sun, 21 Dec 2025 12:45 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Sun, 21 Dec 2025 12:45 AM IST
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भरथापुर-कतर्निया मार्ग पर खड़ा हाथी। - स्रोत : ग्रामीण
बिछिया। भरथापुर-कतर्नियाघाट के बीच में मार्ग पर हाथियों का मूवमेंट अचानक बढ़ गया है। शनिवार सुबह भरथापुर मार्ग पर ग्रामीणों ने हाथी खड़ा देखा। इससे एक घंटे तक आवागमन बाधित रहा, वहीं ग्रामीण दहशत में रहे। मार्ग से हाथी के हटने के बाद आवागमन फिर शुरू हो सका। इसके बाद से गांव के लोग अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के कतर्नियाघाट रेंज अंतर्गत गेरुआ नदी पार जंगल मार्ग पर सुबह एक हाथी खड़ा दिखाई दिया। हाथी को मार्ग पर खड़ा देख कतर्नियाघाट से भरथापुर की ओर जा रहे ग्रामीण जान बचाकर भागे। इस दौरान करीब एक घंटे तक गांव की ओर आवागमन पूरी तरह बाधित रहा।
ग्रामीणों के अनुसार हाथी के जंगल की ओर चले जाने के बाद ही लोग गांव में प्रवेश कर सके। घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल बना रहा। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें रोजमर्रा की जरूरतों का सामान लाने के लिए भरथापुर से कतर्नियाघाट तक आना-जाना पड़ता है, लेकिन हाथियों की लगातार आवाजाही के कारण यह रास्ता बेहद जोखिम भरा हो गया है।
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ग्रामीणों ने बताया कि आए दिन जंगल मार्ग पर हाथियों से सामना हो जाता है। मजबूरी में जान जोखिम में डालकर आवागमन करना पड़ता है। हाथियों के डर से कई बार लोग घंटों रास्ते में ही रुके रह जाते हैं या फिर लौटने को मजबूर होते हैं। लगातार हो रहीं इन घटनाओं से ग्रामीणों में भय व्याप्त है। लोगों ने वन विभाग से हाथियों की आवाजाही पर निगरानी बढ़ाने और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था कराने की मांग की है, ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके।
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कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के कतर्नियाघाट रेंज अंतर्गत गेरुआ नदी पार जंगल मार्ग पर सुबह एक हाथी खड़ा दिखाई दिया। हाथी को मार्ग पर खड़ा देख कतर्नियाघाट से भरथापुर की ओर जा रहे ग्रामीण जान बचाकर भागे। इस दौरान करीब एक घंटे तक गांव की ओर आवागमन पूरी तरह बाधित रहा।
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ग्रामीणों के अनुसार हाथी के जंगल की ओर चले जाने के बाद ही लोग गांव में प्रवेश कर सके। घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल बना रहा। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें रोजमर्रा की जरूरतों का सामान लाने के लिए भरथापुर से कतर्नियाघाट तक आना-जाना पड़ता है, लेकिन हाथियों की लगातार आवाजाही के कारण यह रास्ता बेहद जोखिम भरा हो गया है।
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ग्रामीणों ने बताया कि आए दिन जंगल मार्ग पर हाथियों से सामना हो जाता है। मजबूरी में जान जोखिम में डालकर आवागमन करना पड़ता है। हाथियों के डर से कई बार लोग घंटों रास्ते में ही रुके रह जाते हैं या फिर लौटने को मजबूर होते हैं। लगातार हो रहीं इन घटनाओं से ग्रामीणों में भय व्याप्त है। लोगों ने वन विभाग से हाथियों की आवाजाही पर निगरानी बढ़ाने और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था कराने की मांग की है, ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके।