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Bahraich News: चेयरमैनी फतह के लिए दशको से हांफ रही है सपा

Fri, 28 Apr 2023 04:58 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 28 Apr 2023 04:58 PM IST
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SP has been gasping for the chairmanship for decades
जिले की दो नगर पालिका व दो नगर पंचायतों में सबसे ज्यादा निर्दलीयों का ही रहा कब्जा
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संवाद न्यूज एजेंसी
बहराइच। निकाय चुनाव में पिछले कई दशकों से सपा अपनी पैठ जमाने के लिए हांफती नजर आ रही है। हालांकि वर्ष 2017 के चुनाव में नानपारा की सीट पर पहली बार सपा ने कांग्रेस प्रत्याशी को कांटे की टक्कर दी थी। लेकिन कामयाबी हासिल नहीं कर पाई थी। चुनाव में मतदाता लगातार सपा को नजरअंदाज करते आ रहें हैं। इस बार जिले की दो नगर पालिका और छह नगर पंचायतों में चुनाव होना है। अब देखना है कि मौजूदा निकाय चुनाव मतदाताओं का सियासी दल पर भरोसा होगा या एक बार फिर नगर की कमान निर्दलीय प्रत्याशी के हाथ सौंपेंगे। यह आने वाले चुनाव के नतीजे बताएंगे।
नगर निकाय चुनाव में प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी सपा जिले में कभी भी मुख्य लड़ाई मेंं नहीं रही है। बात करते हैं सदर नगर पालिका की सीट की, तो यहां पहली बार वर्ष 2000 में सियासी दल के नाम पर भाजपा के कन्हैया लाल रूपानी ने जीत दर्ज की थी। उसके बाद पालिका प्रशासन की कमान प्रशासक के हाथों में चली गई थी। जब वर्ष 2006 में निकाय चुनाव का बिगुल बजा, तो यहां से निर्दल तेजे खां ने चुनाव में जीत दर्ज की थी। उसके बाद वर्ष 2012 के चुनाव मे भी निर्दल हाजी रेहान खान और वर्ष 2017 में यह सीट महिला के खाते में चली जाने के बाद रेहान ने अपनी पत्नी रूबीना रेहान को चुनाव मैदान में उतारकर धमाकेदार जीत दर्ज कराई थी। यहां कभी भी सपा लड़ाई में ही नहीं पहुंच सकी है। हालांकि नानपारा नगर पालिका की सीट पर वर्ष 2017 के चुनाव में सपा व कांग्रेस के बीच हुई कांटे की टक्कर में कांग्रेस के प्रत्याशी ने बहुत ही कम अंतर से चुनाव में जीत दर्ज की थी। सपा को हार का मुंह देखना पड़ा था। अब बात करते हैं नगर पंचायतों की तो रिसिया नगर पंचायत में वर्ष 1995 में भाजपा ने पहली बार मिथलेश साहू के रूप में जीत दर्ज की थी। उसके बाद निर्दलीय प्रत्याशियों को लगातार कब्जा रहा था। लेकिन वर्ष 2007 में भाजपा की नीरू श्रीवास्तव ने दूसरी बार जीत दर्ज की थी। जबकि 2012 में सीट सामान्य हो जाने के बाद भाजपा के राजेश निगम ने तीसरी बार जीत दर्ज की थी। यहां भी सपा नजर नहीं आई। जरवल नगर पंचायत हमेशा निर्दल प्रत्याशियों का ही कब्जा रहा है। हालांकि वर्ष 2017 में कांग्रेस से तस्लीमबानों ने जीत दर्ज की थी। यहां भी सपा दूर-दूर तक कहीं नजर नहीं आई। अब मौजूदा समय एक बार फिर निकाय चुनाव का बिगुल बज चुका है। इस बार जिले की दो नगर पालिका व छह नगर पंचायतों में चुनाव होने हैं। सभी सियासी दलों ने अपने-अपने प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारा है। अब देखना यह है कि इस बार जिले के मतदाता किसी सियासी दल पर भरोसा करेंगे या फिर निर्दल प्रत्याशियों को जीताकर शहर सरकार चलाने का मौका देंगे।
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किस सियासी दल ने कहां-कहां उतारे प्रत्याशी
जिले की दो नगर पालिका व चार नगर पंचायतों में कांग्रेस चुनाव लड़ रही है। बसपा एक नगर पालिका व चार नगर पंचायतों में और सपा ने एक नगर पालिका व छह नगर पंचायतों की सीट पर अपने-अपने प्रत्याशियों को उतारा है। बसपा ने सदर नगर पालिका व रूपईडीहा नगर पंचायत में प्रत्याशी नहीं उतारे हैं। सपा ने नानपारा नगर पालिका और कांग्रेस ने रूपईडीहा व रिसिया में कोई भी प्रत्याशी को चुनाव मैदान में नहीं उतारा है। जबकि भाजपा निकाय की सभी सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं।
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