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नदी मेें समाए छह मकान व 200 बीघा खेत
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महसी के ठकुराईनपुरवा में कटान कर रही घाघरा नदी के मुहाने पर मकान।
- फोटो : BAHRAICH
महसी (बहराइच)। महसी में घाघरा (सरयू) नदी का जलस्तर बढ़ने लगा है। जलस्तर बढ़ने के साथ ही टिकुरी ग्राम पंचायत के मजरा ठकुराईनपुरवा में नदी ने कटान तेज कर दिया है। रविवार को ठकुराईनपुरवा में छह ग्रामीणों के मकान कटकर नदी मेें समा गए। उधर, 20 ग्रामीणों की लगभग 200 बीघा खेती योग्य जमीन भी नदी में समाहित हो गई, लेकिन तहसील प्रशासन की ओर से कटान से बचाव के उपाय शून्य हैं।
महसी में घाघरा नदी का जलस्तर फिर बढ़ने लगा है। बढ़ रहे जलस्तर के साथ नदी ने कटान तेज कर दिया है। तहसील क्षेत्र की टिकुरी ग्राम पंचायत के मजरा ठकुराईनपुरवा में नदी तेजी से कटान कर रही है। गांव निवासी कमलाशंकर, शिवनरायन, तेज, सुंदर समेत छह ग्रामीणों के मकान कटकर नदी में समा गए। ग्रामीणों ने भागकर जान बचाई। वहीं, इसी गांव के 20 किसानों की 200 बीघा खेती योग्य जमीन नदी में कट गई। ग्रामीणों के मुताबिक तेज बहाव मेें खेत कट जा रहे हैं।
ग्रामीण अपनी आंखों के सामने आशियाना गिरता देख रो रहे हैं। नदी की कटान तेज होने से ग्रामीण सामान समेट कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। कटान की सूचना ग्रामीण तहसील मुख्यालय पर प्रतिदिन दे रहे हैं, लेकिन तहसील प्रशासन व सिंचाई विभाग की ओर से बचाव का कोई भी उपाय नहीं किया जा रहा है। इस मामले में उपजिलाधिकारी एसएन त्रिपाठी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि बाढ़ क्षेत्र में राजस्व कर्मियों को निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। जिन ग्रामीणों के मकान नदी में समाहित हो रहे हैं। उन्हें पुन: विस्थापित किया जाएगा। पीड़ित सभी ग्रामीणों को मुआवजा दिया जाएगा।
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महसी में घाघरा नदी का जलस्तर फिर बढ़ने लगा है। बढ़ रहे जलस्तर के साथ नदी ने कटान तेज कर दिया है। तहसील क्षेत्र की टिकुरी ग्राम पंचायत के मजरा ठकुराईनपुरवा में नदी तेजी से कटान कर रही है। गांव निवासी कमलाशंकर, शिवनरायन, तेज, सुंदर समेत छह ग्रामीणों के मकान कटकर नदी में समा गए। ग्रामीणों ने भागकर जान बचाई। वहीं, इसी गांव के 20 किसानों की 200 बीघा खेती योग्य जमीन नदी में कट गई। ग्रामीणों के मुताबिक तेज बहाव मेें खेत कट जा रहे हैं।
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ग्रामीण अपनी आंखों के सामने आशियाना गिरता देख रो रहे हैं। नदी की कटान तेज होने से ग्रामीण सामान समेट कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। कटान की सूचना ग्रामीण तहसील मुख्यालय पर प्रतिदिन दे रहे हैं, लेकिन तहसील प्रशासन व सिंचाई विभाग की ओर से बचाव का कोई भी उपाय नहीं किया जा रहा है। इस मामले में उपजिलाधिकारी एसएन त्रिपाठी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि बाढ़ क्षेत्र में राजस्व कर्मियों को निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। जिन ग्रामीणों के मकान नदी में समाहित हो रहे हैं। उन्हें पुन: विस्थापित किया जाएगा। पीड़ित सभी ग्रामीणों को मुआवजा दिया जाएगा।
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