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शिक्षित व ईमानदार हो नुमाइंदा
अमर उजाला/श्रावस्ती
Updated Sun, 05 Feb 2017 11:43 PM IST
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अमर उजाला के कार्यक्रम में जुटीं छात्राएं
- फोटो : अमर उजाला
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युवा वोटर केवल साफ छवि के साथ शिक्षित व्यक्ति को ही अपना जनप्रतिनिधि चुनना चाहते हैं। इसके साथ ही युवा मतदाता चाहते हैं कि जो भी चुन कर जाए, वह युवाओं की आवाज सदन तक पहुंचाए। ऐसा न कर पाने वालों की समीक्षा करने की बात भी युवा करते हैं। यह विचार रविवार को इकौना के चौधरी श्यामता प्रसाद महिला महाविद्यालय खरगौरा बस्ती की छात्राओं ने अमर उजाला के कैंपस अड्डा में रखे।
मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में जनप्रतिनिधि कैसा हो, इसका उत्तर तलाशने के लिए नव मतदाताओं ने कई घंटे तक इकौना के चौधरी श्यामता प्रसाद महिला महाविद्यालय खरगौरा बस्ती में मंथन किया। जिसमें यह बात सामने आई कि हमारे लिए कानून बनाने वाला नेता शिक्षित होने के साथ ही संवेदनशील व विषय वस्तु का जानकार हो, जिससे लोकतंत्र की नींव को मजबूती मिल सके।
कार्यक्रम में मौजूद छात्राओं ने माना कि जातीय समीकरण के बजाय प्रत्याशी उतारने का आधार उनकी योग्यता होनी चाहिए। देश में ऐसा कानून बनना चाहिए, जो प्रत्याशी की न्यूनतम योग्यता का निर्धारण करे। शिक्षित व्यक्ति को ही चुनाव लड़ने का अधिकार हो। जिससे योग्य व्यक्ति ही सदन तक पहुंच सके। युवा वोटरों ने यह भी कहा कि वोट डालने से पूर्व गैर मजहबी, बेदाग व शिक्षित प्रत्याशी को ही वोट देना चाहिए।
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यदि वोटर लगातार ऐसा करते रहेंगे तो राजनीतिक दल भी स्वच्छ छवि के लोगों को टिकट देने के लिए मजबूर होंगे। बातचीत के दौरान यह भी तथ्य सामने आया कि मौजूदा समय में राजनीतिक गलियारे में व्याप्त भ्रष्टाचार, चरित्रहीनता के लिए प्रतिनिधियों के साथ वोटर भी जिम्मेदार हैं। चुनाव के समय वोटर उम्मीदवार की छवि व क्षमता न देख कर जाति व धर्म के आधार पर उसे मतदान करते हैं।
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मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में जनप्रतिनिधि कैसा हो, इसका उत्तर तलाशने के लिए नव मतदाताओं ने कई घंटे तक इकौना के चौधरी श्यामता प्रसाद महिला महाविद्यालय खरगौरा बस्ती में मंथन किया। जिसमें यह बात सामने आई कि हमारे लिए कानून बनाने वाला नेता शिक्षित होने के साथ ही संवेदनशील व विषय वस्तु का जानकार हो, जिससे लोकतंत्र की नींव को मजबूती मिल सके।
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कार्यक्रम में मौजूद छात्राओं ने माना कि जातीय समीकरण के बजाय प्रत्याशी उतारने का आधार उनकी योग्यता होनी चाहिए। देश में ऐसा कानून बनना चाहिए, जो प्रत्याशी की न्यूनतम योग्यता का निर्धारण करे। शिक्षित व्यक्ति को ही चुनाव लड़ने का अधिकार हो। जिससे योग्य व्यक्ति ही सदन तक पहुंच सके। युवा वोटरों ने यह भी कहा कि वोट डालने से पूर्व गैर मजहबी, बेदाग व शिक्षित प्रत्याशी को ही वोट देना चाहिए।
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यदि वोटर लगातार ऐसा करते रहेंगे तो राजनीतिक दल भी स्वच्छ छवि के लोगों को टिकट देने के लिए मजबूर होंगे। बातचीत के दौरान यह भी तथ्य सामने आया कि मौजूदा समय में राजनीतिक गलियारे में व्याप्त भ्रष्टाचार, चरित्रहीनता के लिए प्रतिनिधियों के साथ वोटर भी जिम्मेदार हैं। चुनाव के समय वोटर उम्मीदवार की छवि व क्षमता न देख कर जाति व धर्म के आधार पर उसे मतदान करते हैं।