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अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर ही मशाल जुलूस निकाल किया प्रदर्शन

Mon, 28 Sep 2020 10:48 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 28 Sep 2020 10:48 PM IST
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Performing torch procession at the Superintending Engineer Office itself
बहराइच के अस्पताल चौराहे पर सोमवार को निजीकरण के विरोध में विरोध रैली निकालते बिजली कर्मचारी। - फोटो : BAHRAICH
बहराइच। निजीकरण के विरोध में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की अगुवाई में सोमवार को निकलने वाले मशाल जुलूस पर प्रशासन ने अचानक रोक लगा दी। विद्युतकर्मियों के जुलूस को देखते हुये पुलिस प्रशासन ने अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर भारी फोर्स लगा दी। प्रशासन के रवैये पर विद्युतकर्मियों ने गुस्सा जताते हुये कार्यालय पर ही मशाल जुलूस निकालकर प्रदर्शन करते हुये सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान पदाधिकारियों ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुये आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।
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ऊर्जा क्षेत्र के निजीकरण के विरोध में प्रदेश के इंजीनियर व विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की अगुवाई में माह भर चरणबद्ध तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। सोमवार को कर्मचारियों द्वारा शाम पांच बजे से मशाल जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया जाना था। इसके लिए समिति की ओर से नगर मजिस्ट्रेट से अनुमति भी प्राप्त हो गई थी।
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सोमवार को समिति की अगुवाई में इंजीनियर व कर्मचारी अस्पताल चौराहा स्थित अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर जुटे। सभी मशाल जुलूस निकालने की तैयारी में ही थे कि अचानक प्रशासन ने पूरे परिसर को पुलिस फोर्स लगाकर बिजली कर्मियों को कोरोना प्रोटोकॉल का हवाला देते हुये जुलूस पर रोक लगा दी। प्रशासन के रवैये पर गुस्साए विद्युत कर्मियों ने कार्यालय परिसर में ही मशाल जुलूस निकालकर सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुये प्रदर्शन शुरू कर दिया।
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इस मौके पर समिति के संयोजक इंजीनियर हर्षराज रस्तोगी ने कहा कि सरकार द्वारा ऊर्जा क्षेत्र का निजीकरण करने का प्रस्ताव महज पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए है। इससे उपभोक्ता व कर्मचारियों को कोई लाभ होने वाला नहीं है। जूनियर इंजीनियर संघ के अध्यक्ष संजय कुमार ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र का निजीकरण होने से बिजली की दरों में अचानक वृद्धि कर दी जायेगी। इससेे मध्यम व गरीब लोगों की पहुंच से बिजली दूर हो जायेगी। छोटे उद्योग-धंधे भी महंगी बिजली से प्रभावित होंगे।
इंजीनियर नीरज पटेल ने कहा कि सरकार का निजीकरण का फैसला पूरी तरह जनविरोधी है। बिजली कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुशील गोस्वामी ने कहा कि सरकार प्रशासन की ताकत पर विद्युतकर्मियों की जायज आवाज को दबाना चाहती है लेकिन ऐसा कतई नहीं होने दिया जायेगा। सरकार जब तक निजीकरण का फैसला वापस नहीं लेगी, आंदोलन व संघर्ष जारी रहेगा।
प्रदर्शन के दौरान समिति के पदाधिकारियों ने आंदोलन को धार देने के लिए आपस में मंथन करते हुये प्रदेश के नेतृत्व के आह्वान पर 29 सितंबर को बिजली कार्यालयों पर दो बजे तक ही कार्य करने और दो से पांच बजे तक जिला मुख्यालय पर विरोध सभा करने का निर्णय लिया। पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि अगर इसके बावजूद निजीकरण का फैसला सरकार ने वापस नही लिया तो पांच अक्तूबर से पूर्ण कार्य बहिष्कार पर चले जायेंगे। इस दौरान एक्सईएन मुकेश बाबू, नंदलाल, इं. रमेश सिंह, इं. एलबी यादव, इं. अजय कुशवाहा, इं. अवधेश पटेल, इं. धर्मेंद्र कुमार, इंजीनियर अजय यादव, इं. मुकेश पटेल, शंभू सिंह, अमित श्रीवास्तव, नफीस अहमद व कृष्ण कुमार यादव आदि मौजूद रहे।

विधायकों के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन
विद्युत कर्मचारी संघर्ष समिति की अगुवाई में पदाधिकारियों ने सोमवार को मशाल जुलूस कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री को भेजने के लिए पयागपुर, बलहा, महसी व नानपारा के विधायकों को ज्ञापन सौंपकर निजीकरण के फैसले पर नाराजगी जताई। पदाधिकारियों ने ज्ञापन के माध्यम से सरकार से जनहित में निजीकरण के फैसले को वापस लेने की मांग की।
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