फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bahraich News ›   Katarniaghat became red zone to save tigers

Bahraich News: बाघों को बचाने के लिए कतर्नियाघाट बना रेड जोन

Fri, 28 Jul 2023 11:05 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच Updated Fri, 28 Jul 2023 11:05 PM IST
विज्ञापन
Katarniaghat became red zone to save tigers
कतर्नियाघाट संरक्षित वनक्षेत्र में विचरण करता व आराम करता बाघ।
अब्दुल्लागंज जंगल से सटे नेपाल में बीते दिनों मिल चुकी दो बाघों की खाल
विज्ञापन


तीन साल में बाघ के हमले में जा चुकी 8 लोगोें की जान, तीन घायल

- विश्व बाघ दिवस पर विशेष,

संवाद न्यूज एजेंसी

बहराइच। कतर्नियाघाट वन्यजीव विहार का अनुकूल वातावरण बाघों की तादाद बढ़ाने में कारगर साबित हो रहा है। 550 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले कतर्निया में 1975 से ही बाघों के संरक्षण पर काम चल रहा है। इसी का नतीजा है कि यहां बाघों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है।

09 अक्तूबर 2021 को एक बाघ का शव गिरजापुरी बैराज के डाउन स्ट्रीम में दो सौ मीटर की दूरी पर मिला। वन विभाग ने मौत का कारण डूबना बताया। इसके पश्चात 24 मई 2022 को कतर्नियाघाट रेंज कार्यालय के पीछे नर बाघ का शव मिला। पोस्टमार्टम से पता चला कि दूसरे बाघ से संघर्ष में इसकी मौत हुई है। इसी माह पिंजड़ा लगाकर पकड़ी गई मादा बाघिन को आदमखोर बता लखनऊ चिड़ियाघर भेज दिया गया और नर बाघ दुधवा नेशनल पार्क छोड़ा गया। इस प्रकार कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग ने अपने चार बाघों को खो दिया। वहीं बाघ व मानव का संघर्ष भी हुआ है। इसमें जहां तीन साल में आठ लोगों की जान गई है वहीं तीन लोग घायल हो चुके हैं।
विज्ञापन


शिकारियों से भी बाघों को खतरा

बहराइच वन प्रभाग व कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग नेपाल से सटे है। बहराइच रेंज में अब्दुल्लागंज से सटे नेपाली इलाकों में बीते दो माह में दो बाघों की खाल बरामद हो चुकी है। इससे साफ है कि नेपाली शिकारी यहां सक्रिय हैं। इसके साथ ही वन विभाग ने दो शिकारियों को भी पकड़ा है। इनमें एक नेपाल का निवासी है तो दूसरा गुजरात पा रहने वाला है।
विज्ञापन
विज्ञापन


बाघिन को मिला जीवनदान

वर्ष 2021 में यहां शिकारियों के फंदे में फंसी बाघिन की एक माह तक मचान पर कैमरे के माध्यम से निगरानी की गई। आखिरकार बाघिन को ट्रेंकुलाइज कर फंदा काटा गया और उपचार करने के बाद स्वतंत्र रूप से विचरण के लिए घने जंगल में छोड़ दिया गया।




कतर्नियाघाट में वर्ष 2018 की गणना के मुताबिक करीब 30 बाघ थे। लेकिन इस समय यहां पर बाघों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। इस समय लगभग 40 बाघ व उनके शावक भी मौजूद हैं। बाघों को शिकारियों से खतरा बना रहता है। इसके लिए वन विभाग की टीमें लगातार निगरानी में लगी रहती हैं।

-आकाशदीप बधावन, डीएफओ, कतर्नियाघाट, वन्यजीव विहार
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed