{"_id":"6823bc7d5bb04dd03c09f514","slug":"dargah-of-syed-salar-masood-ghazi-located-in-bahraich-bahraich-news-c-98-1-brp1009-130536-2025-05-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bahraich News: सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह पर लगने वाले मेले पर आज होगी सुनवाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bahraich News: सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह पर लगने वाले मेले पर आज होगी सुनवाई
Wed, 14 May 2025 03:11 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Wed, 14 May 2025 03:11 AM IST
विज्ञापन
बहराइच स्थित सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह।
विभाकर शुक्ल
बहराइच। सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह पर लगने वाले जेठ मेले पर रोक के बाद दरगाह प्रबंधन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसकी सुनवाई आज हाईकोर्ट में होनी है। प्रबंधन ने अपने दावे का आधार परंपरा व वक्फ कानून को बताया, जबकि प्रशासन मेले पर रोक का कारण कानून व्यवस्था बता रहा है। दोनों के दावे पर अंतिम फैसला कोर्ट को ही लेना है।
दरगाह शरीफ के प्रबंधक का दावा है कि दरगाह की स्थापना 1375 ई. में सैयद मसूद गाजी की स्मृति में फिरोज शाह तुगलक ने की थी। इसे उत्तर प्रदेश मेला अधिनियम, 1938 में छूट मिली है। संशोधित वक्फ अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत मेले पर रोक लगाने का आदेश डीएम पारित कर सकें। डीएम द्वारा जारी आदेश मेले के लिए है, जबकि वास्तव में जो आयोजन हो रहा है वह उर्स है। उर्स, मेला पिछले कई वर्षों से इसी स्थान पर आयोजित किया जा रहा है। उर्स के दौरान कभी भी कोई समस्या नहीं आई। इसलिए ऐसे उर्स, मेले के आयोजन को रोकने का कोई औचित्य नहीं है। साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि दरगाह के आसपास करीब 1.5 वर्ग किलोमीटर वक्फ भूमि है। हालांकि उर्स के दौरान देश व विदेश खासकर मुस्लिम देशों से आने वाले श्रद्धालु पांच वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में निवास करते हैं, लेकिन आयोजन में कभी कोई समस्या नहीं आई। डीएम को वक्फ भूमि पर या उससे परे उर्स के आयोजन में हस्तक्षेप करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
18 मई को मुख्य समारोह के आयोजन पर राहत देने की मांग
उनका यह भी तर्क है कि एक महीने तक चलने वाले उर्स, मेले के दौरान दरगाह में केवल मुसलमान ही नहीं, बल्कि सभी समुदायों के लोग आते हैं, जिसमें आस्था व विश्वास पर आधारित धार्मिक अनुष्ठान होने के साथ ही आर्थिक पहलू भी जुड़ा होता है। जब कुंभ व देवी पाटन मेला हाल ही में बिना किसी बाधा के आयोजित हो सकता है, ताे दरगाह शरीफ में उर्स के आयोजन को रोका दुर्भावना का संकेत है। उन्होंने 18 मई को मुख्य समारोह यानी सैयद सालार मसूद गाजी की प्रतीकात्मक शादी के आयोजन पर राहत देने की मांग की है।
विज्ञापन
दरगाह परिसर के अंदर धार्मिक गतिविधियों पर रोक नहीं
प्रशासन ने मौजूदा समय में निषेधाज्ञा लागू होने एएसपी नगर, सिटी मजिस्ट्रेट व नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी के रिपोर्ट के साथ ही स्थानीय खुफिया इकाई से प्राप्त इनपुट को आधार बताते हुए मेले पर प्रतिबंध लगाने की बात कही है। प्रशासन का दावा है कि स्थानीय खुफिया इकाई से प्राप्त कई इनपुट के अलावा अन्य कारण भी हैं। इसके कारण एक महीने की अवधि के दौरान आवश्यक सुविधाएं देने या सुरक्षित वातावरण देना संभव नहीं है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि दरगाह परिसर के अंदर धार्मिक गतिविधियों पर कोई रोक नहीं है। परिसर के बाहर आयोजित किया जाने वाला मेला एक धर्मनिरपेक्ष गतिविधि है। दरगाह में धार्मिक गतिविधियों में किसी भी तरह से हस्तक्षेप नहीं किया गया है। जिस पर प्रतिबंध लगाया गया है, उसमें दरगाह परिसर के बाहर मेला किया जाना है, जो मुख्य रूप से वाणिज्यिक गतिविधियों में आता है। इसमें किराए के लिए दुकानों का आवंटन आदि शामिल है। इस पर राज्य प्रतिबंध लगा सकता है।
दरगाह के आसपास 1.5 वर्ग किलोमीटर की भूमि वक्फ की नहीं
प्रशासन ने दरगाह के इस तर्क को भी खारिज किया है कि दरगाह के आसपास 1.5 वर्ग किलोमीटर की भूमि वक्फ की है। प्रशासन का तर्क है कि दरगाह ने ऐसी किसी भी भूमि का कोई भी अभिलेख प्रस्तुत नहीं किया है।
विज्ञापन
बहराइच। सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह पर लगने वाले जेठ मेले पर रोक के बाद दरगाह प्रबंधन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसकी सुनवाई आज हाईकोर्ट में होनी है। प्रबंधन ने अपने दावे का आधार परंपरा व वक्फ कानून को बताया, जबकि प्रशासन मेले पर रोक का कारण कानून व्यवस्था बता रहा है। दोनों के दावे पर अंतिम फैसला कोर्ट को ही लेना है।
दरगाह शरीफ के प्रबंधक का दावा है कि दरगाह की स्थापना 1375 ई. में सैयद मसूद गाजी की स्मृति में फिरोज शाह तुगलक ने की थी। इसे उत्तर प्रदेश मेला अधिनियम, 1938 में छूट मिली है। संशोधित वक्फ अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत मेले पर रोक लगाने का आदेश डीएम पारित कर सकें। डीएम द्वारा जारी आदेश मेले के लिए है, जबकि वास्तव में जो आयोजन हो रहा है वह उर्स है। उर्स, मेला पिछले कई वर्षों से इसी स्थान पर आयोजित किया जा रहा है। उर्स के दौरान कभी भी कोई समस्या नहीं आई। इसलिए ऐसे उर्स, मेले के आयोजन को रोकने का कोई औचित्य नहीं है। साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि दरगाह के आसपास करीब 1.5 वर्ग किलोमीटर वक्फ भूमि है। हालांकि उर्स के दौरान देश व विदेश खासकर मुस्लिम देशों से आने वाले श्रद्धालु पांच वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में निवास करते हैं, लेकिन आयोजन में कभी कोई समस्या नहीं आई। डीएम को वक्फ भूमि पर या उससे परे उर्स के आयोजन में हस्तक्षेप करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
विज्ञापन
18 मई को मुख्य समारोह के आयोजन पर राहत देने की मांग
उनका यह भी तर्क है कि एक महीने तक चलने वाले उर्स, मेले के दौरान दरगाह में केवल मुसलमान ही नहीं, बल्कि सभी समुदायों के लोग आते हैं, जिसमें आस्था व विश्वास पर आधारित धार्मिक अनुष्ठान होने के साथ ही आर्थिक पहलू भी जुड़ा होता है। जब कुंभ व देवी पाटन मेला हाल ही में बिना किसी बाधा के आयोजित हो सकता है, ताे दरगाह शरीफ में उर्स के आयोजन को रोका दुर्भावना का संकेत है। उन्होंने 18 मई को मुख्य समारोह यानी सैयद सालार मसूद गाजी की प्रतीकात्मक शादी के आयोजन पर राहत देने की मांग की है।
विज्ञापन
दरगाह परिसर के अंदर धार्मिक गतिविधियों पर रोक नहीं
प्रशासन ने मौजूदा समय में निषेधाज्ञा लागू होने एएसपी नगर, सिटी मजिस्ट्रेट व नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी के रिपोर्ट के साथ ही स्थानीय खुफिया इकाई से प्राप्त इनपुट को आधार बताते हुए मेले पर प्रतिबंध लगाने की बात कही है। प्रशासन का दावा है कि स्थानीय खुफिया इकाई से प्राप्त कई इनपुट के अलावा अन्य कारण भी हैं। इसके कारण एक महीने की अवधि के दौरान आवश्यक सुविधाएं देने या सुरक्षित वातावरण देना संभव नहीं है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि दरगाह परिसर के अंदर धार्मिक गतिविधियों पर कोई रोक नहीं है। परिसर के बाहर आयोजित किया जाने वाला मेला एक धर्मनिरपेक्ष गतिविधि है। दरगाह में धार्मिक गतिविधियों में किसी भी तरह से हस्तक्षेप नहीं किया गया है। जिस पर प्रतिबंध लगाया गया है, उसमें दरगाह परिसर के बाहर मेला किया जाना है, जो मुख्य रूप से वाणिज्यिक गतिविधियों में आता है। इसमें किराए के लिए दुकानों का आवंटन आदि शामिल है। इस पर राज्य प्रतिबंध लगा सकता है।
दरगाह के आसपास 1.5 वर्ग किलोमीटर की भूमि वक्फ की नहीं
प्रशासन ने दरगाह के इस तर्क को भी खारिज किया है कि दरगाह के आसपास 1.5 वर्ग किलोमीटर की भूमि वक्फ की है। प्रशासन का तर्क है कि दरगाह ने ऐसी किसी भी भूमि का कोई भी अभिलेख प्रस्तुत नहीं किया है।