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अब प्रसूताओं के मुफ्त आहार पर डाका
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Wed, 08 Jul 2015 10:08 PM IST
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बहराइच। जनपद में फर्जी प्रसव दिखाकर फर्जी भुगतान तो हो रही रहा है, जननी को मिलने वाले पौष्टिक भोजन पर भी घोटालेबाजों की नजर लगी है।
इसका खुलासा नेशनल हेल्थ मिशन के अधिकारियों की जांच से हुआ है। छह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर जननी की थाली में भोजन से खाली है।
प्रसूताओं के मुफ्त आहार का बजट अधिकारी व ठेकेदार सांठ-गांठ कर खा रहे हैं। अधिकारियों ने इसकी जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी है। इससे स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है।
जन्म के समय मां और बच्चे की सुरक्षा के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने वर्ष 2011 में जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम का कवच तैयार किया था।
इसमें मुफ्त इलाज से लेकर मुफ्त भरपेट पौष्टिक भोजन देने की व्यवस्था की गई है। लेकिन, बहराइच में यह व्यवस्था सभी 14 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर कागजों पर सिमटकर रह गई है।
महज आठ पीएचसी पर प्रसूताओं को भोजन मिल रहा है। तेजवापुर, चित्तौरा, बाबागंज, कैसरगंज, फखरपुर व महसी में स्वास्थ्य केंद्र पर चूल्हे ठंडे पड़े हैं।
बीते वित्तीय सत्र में अधिकारियों व ठेकेदारों ने सांठ-गांठकर योजना को पलीता लगाया ही, इस सत्र में धांधली बदस्तूर जारी है।
हाल ही में राष्ट्रीय हेल्थ मिशन के अधिकारियों ने इन स्वास्थ्य केंद्रों का भ्रमण गोपनीय जांच की तो ठेकेदारों की कलई खुल गई, जबकि सीएमओ ने ठेकेदारों को भुगतान कर दिया है।
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एडी ने महिला अस्पताल में भुगतान पर लगाई रोक
महिला अस्पताल में प्रसूताओं को मिलने वाले पौष्टिक भोजन में बंदरबाट की शिकायत अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. उमाकांत वर्मा को मिली थी।
इस पर उन्होंने हाल ही में जिला महिला अस्पताल पहुंचकर अभिलेखों की जांच की तो चौंकाने वाले परिणाम प्राप्त हुए। भोजन रजिस्टर खाली मिली तो प्रसूताओं ने भोजन मिलने से साफ इंकार कर दिया।
इस पर एडी ने कड़ी नाराजगी जताते हुए अप्रैल, मई व जून माह के भुगतान पर रोक लगा दी है।
शासन को भेजी जाएगी रिपोर्ट
देवीपाटन मंडल के अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. उमाकांत वर्मा ने कहा कि जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम में बजट की कमी नहीं है।
ऐसे में स्वास्थ्य केंद्रों पर भोजन क्यों नही बन रहा है, इसकी हम अपने स्तर से गोपनीय जांच कराएंगे।
हालांकि, महिला अस्पताल की जांच में इसकी पुष्टि तो जरूर हुई है कि प्रसूताओं को भोजन नहीं मिल रहा है। जांच के बाद जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई के लिए रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
ये है जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम
इस योजना के तहत गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी, ऑपरेशन की सुविधा, दवाएं, जांच, नार्मल डिलीवरी में दो दिन तक पौष्टिक भोजन, आपॅरेशन में सात दिनों तक भोजन व आवश्यकतानुसार रक्त की व्यवस्था आदि कराना शामिल है। ये सेवाएं गर्भवती महिलाओं को मुफ्त में मुहैय्या कराई जाती हैं।
‘सीएमओ जानते हुए भी चुप हैं’
जांच से जुड़े राष्ट्रीय हेल्थ मिशन के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि तेजवापुर, चित्तौरा, बाबागंज, कैसरगंज, फखरपुर, महसी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भोजन नहीं बन रहा है।
इस बात को सीएमओ डॉ केबी जैन भी जानते हैं लेकिन ठेकेदारों के ऊंचे रसूख व कार्यालय के बाबुओं की मिलीभगत के कारण वे भी चुप हैं।
फिलहाल योजना में अनियमितता की रिपोर्ट मिशन निदेशक अमित घोष एवं अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को भेज दी गई है।
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इसका खुलासा नेशनल हेल्थ मिशन के अधिकारियों की जांच से हुआ है। छह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर जननी की थाली में भोजन से खाली है।
प्रसूताओं के मुफ्त आहार का बजट अधिकारी व ठेकेदार सांठ-गांठ कर खा रहे हैं। अधिकारियों ने इसकी जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी है। इससे स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है।
जन्म के समय मां और बच्चे की सुरक्षा के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने वर्ष 2011 में जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम का कवच तैयार किया था।
इसमें मुफ्त इलाज से लेकर मुफ्त भरपेट पौष्टिक भोजन देने की व्यवस्था की गई है। लेकिन, बहराइच में यह व्यवस्था सभी 14 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर कागजों पर सिमटकर रह गई है।
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महज आठ पीएचसी पर प्रसूताओं को भोजन मिल रहा है। तेजवापुर, चित्तौरा, बाबागंज, कैसरगंज, फखरपुर व महसी में स्वास्थ्य केंद्र पर चूल्हे ठंडे पड़े हैं।
बीते वित्तीय सत्र में अधिकारियों व ठेकेदारों ने सांठ-गांठकर योजना को पलीता लगाया ही, इस सत्र में धांधली बदस्तूर जारी है।
हाल ही में राष्ट्रीय हेल्थ मिशन के अधिकारियों ने इन स्वास्थ्य केंद्रों का भ्रमण गोपनीय जांच की तो ठेकेदारों की कलई खुल गई, जबकि सीएमओ ने ठेकेदारों को भुगतान कर दिया है।
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एडी ने महिला अस्पताल में भुगतान पर लगाई रोक
महिला अस्पताल में प्रसूताओं को मिलने वाले पौष्टिक भोजन में बंदरबाट की शिकायत अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. उमाकांत वर्मा को मिली थी।
इस पर उन्होंने हाल ही में जिला महिला अस्पताल पहुंचकर अभिलेखों की जांच की तो चौंकाने वाले परिणाम प्राप्त हुए। भोजन रजिस्टर खाली मिली तो प्रसूताओं ने भोजन मिलने से साफ इंकार कर दिया।
इस पर एडी ने कड़ी नाराजगी जताते हुए अप्रैल, मई व जून माह के भुगतान पर रोक लगा दी है।
शासन को भेजी जाएगी रिपोर्ट
देवीपाटन मंडल के अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. उमाकांत वर्मा ने कहा कि जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम में बजट की कमी नहीं है।
ऐसे में स्वास्थ्य केंद्रों पर भोजन क्यों नही बन रहा है, इसकी हम अपने स्तर से गोपनीय जांच कराएंगे।
हालांकि, महिला अस्पताल की जांच में इसकी पुष्टि तो जरूर हुई है कि प्रसूताओं को भोजन नहीं मिल रहा है। जांच के बाद जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई के लिए रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
ये है जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम
इस योजना के तहत गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी, ऑपरेशन की सुविधा, दवाएं, जांच, नार्मल डिलीवरी में दो दिन तक पौष्टिक भोजन, आपॅरेशन में सात दिनों तक भोजन व आवश्यकतानुसार रक्त की व्यवस्था आदि कराना शामिल है। ये सेवाएं गर्भवती महिलाओं को मुफ्त में मुहैय्या कराई जाती हैं।
‘सीएमओ जानते हुए भी चुप हैं’
जांच से जुड़े राष्ट्रीय हेल्थ मिशन के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि तेजवापुर, चित्तौरा, बाबागंज, कैसरगंज, फखरपुर, महसी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भोजन नहीं बन रहा है।
इस बात को सीएमओ डॉ केबी जैन भी जानते हैं लेकिन ठेकेदारों के ऊंचे रसूख व कार्यालय के बाबुओं की मिलीभगत के कारण वे भी चुप हैं।
फिलहाल योजना में अनियमितता की रिपोर्ट मिशन निदेशक अमित घोष एवं अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को भेज दी गई है।