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ठेकेदार ने बेच दिए 48 मजदूर
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Tue, 07 Jul 2015 10:03 PM IST
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सिरसिया के अनुसूचित जनजाति बहुल भचकाही गांव के 48 लोगों को मजदूरी कराने ले गए एक ठेकेदार ने उन्हें मिर्जापुर के दूसरे ठेकेदार को बेच दिया।
इनमें कुछ बाल मजदूर भी शामिल हैं। आरोप है कि वहां मजदूरों से काम लेने के बाद उन्हें मजदूरी नहीं दी जा रही है। विरोध करने पर ठेकेदार मजदूरों को पीटता भी है।
इसकी शिकायत मिलने पर मजदूरों के परिवारीजन मंगलवार को भिनगा तहसील पहुंच गए। यहां मामले की जांच कराने और मजदूरों को वापस बुलाने की मांग करते हुए प्रदर्शन किया।
इसके बाद डीएम को संबोधित ज्ञापन एसडीएम भिनगा को सौंपा।
उपजिलाधिकारी भिनगा श्रीराम सचान को सौंपे ज्ञापन में ग्रामीणों ने कहा है कि वह अनुसूचित जनजाति (थारू) हैं। परिवार के लोग भरण पोषण के लिए वे मेहनत मजदूरी करते हैं।
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ग्रामीणों ने बताया कि 28 फरवरी 2015 को बस्ती जिले का एक ठेकेदार दिलीप गांव से 48 मजदूरों को मजदूरी कराने के लिए मिर्जापुर ले गया था। इन मजदूरों में चार महिला, छह पुरुष, छह लड़कियां व 32 लड़के शामिल हैं।
इनमें कुछ बाल मजदूर भी हैं। लेकिन, इन मजदूरों को मिर्जापुर में दिलीप ने ठेकेदार आलोक सिंह के हाथ बेच दिया गया।
आरोप है कि आलोक उनसे मिर्जापुर के बाड़ सागर पर पुल निर्माण कार्य में मजदूरी करा रहा है लेकिन पांच माह से उसने किसी को भुगतान नहीं किया है।
परिवारीजनों ने बताया कि कुछ दिन पूर्व कुछ मजदूर भागकर गांव आए थे तो उन्होंने ये आप बीती सुनाई। पीड़ित मजदूरों ने बताया कि मजदूरी मांगने पर उनकी लाठी व बेल्ट से पिटाई की जाती है।
जान से मारने की धमकी भी दी जा रही है। पूरे दिन काम करने के बाद उन्हें पेट भर भोजन भी नहीं दिया जा रहा है।
मजदूरी करने गए किशोर और किशोरियों को यूपी बोर्ड की परीक्षा भी देनी थी लेकिन ठेकेदार ने उन्हें छुट्टी नहीं दी।
वहीं, भागे हुए मजदूरों का पीछा करके पहुंचे ठेकेदार ने उन पर चोरी का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराने व शेष लोगों को परेशान करने की धमकी दी है।
ग्रामीणों ने ठेकेदार पर लड़कियों से अभद्रता करने का भी आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने मजदूरों को बंधुआ मजदूरी से मुक्ति दिलाने की मांग की है।
ज्ञापन देने वालों में ग्रामीण रामू, गोपी लाल, बुझावन, श्याम कली, जगमोली, सुमन कुमारी, विद्याराम, कविराम, शिवचरन, ईश्वरदीन सहित अन्य ग्रामीणों के नाम शामिल हैं।
इस मामले में भिनगा के एसडीएम श्रीराम सचान ने कहा कि प्रकरण संज्ञान में आया है। मामले की जांच कराई जाएगी।
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इनमें कुछ बाल मजदूर भी शामिल हैं। आरोप है कि वहां मजदूरों से काम लेने के बाद उन्हें मजदूरी नहीं दी जा रही है। विरोध करने पर ठेकेदार मजदूरों को पीटता भी है।
इसकी शिकायत मिलने पर मजदूरों के परिवारीजन मंगलवार को भिनगा तहसील पहुंच गए। यहां मामले की जांच कराने और मजदूरों को वापस बुलाने की मांग करते हुए प्रदर्शन किया।
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इसके बाद डीएम को संबोधित ज्ञापन एसडीएम भिनगा को सौंपा।
उपजिलाधिकारी भिनगा श्रीराम सचान को सौंपे ज्ञापन में ग्रामीणों ने कहा है कि वह अनुसूचित जनजाति (थारू) हैं। परिवार के लोग भरण पोषण के लिए वे मेहनत मजदूरी करते हैं।
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ग्रामीणों ने बताया कि 28 फरवरी 2015 को बस्ती जिले का एक ठेकेदार दिलीप गांव से 48 मजदूरों को मजदूरी कराने के लिए मिर्जापुर ले गया था। इन मजदूरों में चार महिला, छह पुरुष, छह लड़कियां व 32 लड़के शामिल हैं।
इनमें कुछ बाल मजदूर भी हैं। लेकिन, इन मजदूरों को मिर्जापुर में दिलीप ने ठेकेदार आलोक सिंह के हाथ बेच दिया गया।
आरोप है कि आलोक उनसे मिर्जापुर के बाड़ सागर पर पुल निर्माण कार्य में मजदूरी करा रहा है लेकिन पांच माह से उसने किसी को भुगतान नहीं किया है।
परिवारीजनों ने बताया कि कुछ दिन पूर्व कुछ मजदूर भागकर गांव आए थे तो उन्होंने ये आप बीती सुनाई। पीड़ित मजदूरों ने बताया कि मजदूरी मांगने पर उनकी लाठी व बेल्ट से पिटाई की जाती है।
जान से मारने की धमकी भी दी जा रही है। पूरे दिन काम करने के बाद उन्हें पेट भर भोजन भी नहीं दिया जा रहा है।
मजदूरी करने गए किशोर और किशोरियों को यूपी बोर्ड की परीक्षा भी देनी थी लेकिन ठेकेदार ने उन्हें छुट्टी नहीं दी।
वहीं, भागे हुए मजदूरों का पीछा करके पहुंचे ठेकेदार ने उन पर चोरी का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराने व शेष लोगों को परेशान करने की धमकी दी है।
ग्रामीणों ने ठेकेदार पर लड़कियों से अभद्रता करने का भी आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने मजदूरों को बंधुआ मजदूरी से मुक्ति दिलाने की मांग की है।
ज्ञापन देने वालों में ग्रामीण रामू, गोपी लाल, बुझावन, श्याम कली, जगमोली, सुमन कुमारी, विद्याराम, कविराम, शिवचरन, ईश्वरदीन सहित अन्य ग्रामीणों के नाम शामिल हैं।
इस मामले में भिनगा के एसडीएम श्रीराम सचान ने कहा कि प्रकरण संज्ञान में आया है। मामले की जांच कराई जाएगी।