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तेंदुए की दहशत
Updated Tue, 31 Jul 2018 10:33 PM IST
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उर्रा (बहराइच)। उर्रा गांव में सोमवार रात को दो तेंदुए फिर दिखे। ग्रामीणों ने किसी तरह गोला दगाकर दोनों को जंगल की ओर खदेड़ा। बीते गुरुवार को वन विभाग ने एक तेंदुए को पकड़ा था।
अब दो तेंदुए उसकी तलाश में गांव की खाक छान रहे हैं। शाम ढलते ही तेंदुए गांव में आकर दहाड़ते हैं। इससे लोगों में दहशत है।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के ककरहा रेंज अंतर्गत उर्रा बगिया गांव में गुरुवार देर रात को तीन तेंदुओं का झुंड आ गया था, जिसमें से ढाई साल का नर तेंदुआ संकरी गली में फंस गया।
वन विभाग की टीम ने तेंदुए को पकड़कर गेरुआ पार के जंगल में छोड़ दिया। कुनबे से बिछड़े दो तेंदुए साथी की तलाश में शाम ढलते ही गांव में आ रहे हैं।
सोमवार रात को गांव निवासी रामसिंहासन के मकान के पीछे तेंदुए दहाड़ने लगे। ग्रामीणों ने टार्च जलाते हुए शोर मचाया तो तेंदुए गांव निवासी बैजनाथ कुशवाहा और सर्वेश मौर्या के खेत में पहुंच गए।
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ग्रामीणों का शोर सुनकर सैकड़ों की संख्या में लोग लाठी-डंडों से लैस हो गए। सूचना रेंज कार्यालय व उर्रा वन चौकी पर दी गई। वनकर्मी मौके पर पहुंचे। सभी ने गोला दगाकर तेंदुओं को जंगल की ओर खदेड़ा।
पांच दिनों से तेंदुए की आमद होने के बाद भी वन विभाग ने पिंजरा नहीं लगाया गया है। वन विभाग ने पिंजरा लगाने की बात कही। लेकिन अभी तक पिंजरा नहीं लगाया गया है, जिससे ग्रामीण दहशत में हैं। ग्रामीणों की रात की नींद उड़ी हुई है।
...इसलिए नहीं लग पा रहा पिंजरा
वन क्षेत्राधिकारी महेंद्र मौर्या ने बताया कि रेंज कार्यालय में सिर्फ दो पिंजरे हैं। एक पहले से ही खराब पड़ा है। दूसरा पिंजरा मुर्तिहा रेंज के अमृतपुर पुरैना गांव में लगाया गया था, वह भी काफी जर्जर हो गया है।
गुरुवार को तेंदुए को उर्रा गांव में पकड़कर गेरुआ नदी के उस पार छोड़ते समय पटरा गिर गया। पिंजरे को दुरुस्त करवाया जा रहा है। जल्द ही उर्रा गांव में पिंजरा लगाया जाएगा।
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अब दो तेंदुए उसकी तलाश में गांव की खाक छान रहे हैं। शाम ढलते ही तेंदुए गांव में आकर दहाड़ते हैं। इससे लोगों में दहशत है।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के ककरहा रेंज अंतर्गत उर्रा बगिया गांव में गुरुवार देर रात को तीन तेंदुओं का झुंड आ गया था, जिसमें से ढाई साल का नर तेंदुआ संकरी गली में फंस गया।
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वन विभाग की टीम ने तेंदुए को पकड़कर गेरुआ पार के जंगल में छोड़ दिया। कुनबे से बिछड़े दो तेंदुए साथी की तलाश में शाम ढलते ही गांव में आ रहे हैं।
सोमवार रात को गांव निवासी रामसिंहासन के मकान के पीछे तेंदुए दहाड़ने लगे। ग्रामीणों ने टार्च जलाते हुए शोर मचाया तो तेंदुए गांव निवासी बैजनाथ कुशवाहा और सर्वेश मौर्या के खेत में पहुंच गए।
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ग्रामीणों का शोर सुनकर सैकड़ों की संख्या में लोग लाठी-डंडों से लैस हो गए। सूचना रेंज कार्यालय व उर्रा वन चौकी पर दी गई। वनकर्मी मौके पर पहुंचे। सभी ने गोला दगाकर तेंदुओं को जंगल की ओर खदेड़ा।
पांच दिनों से तेंदुए की आमद होने के बाद भी वन विभाग ने पिंजरा नहीं लगाया गया है। वन विभाग ने पिंजरा लगाने की बात कही। लेकिन अभी तक पिंजरा नहीं लगाया गया है, जिससे ग्रामीण दहशत में हैं। ग्रामीणों की रात की नींद उड़ी हुई है।
...इसलिए नहीं लग पा रहा पिंजरा
वन क्षेत्राधिकारी महेंद्र मौर्या ने बताया कि रेंज कार्यालय में सिर्फ दो पिंजरे हैं। एक पहले से ही खराब पड़ा है। दूसरा पिंजरा मुर्तिहा रेंज के अमृतपुर पुरैना गांव में लगाया गया था, वह भी काफी जर्जर हो गया है।
गुरुवार को तेंदुए को उर्रा गांव में पकड़कर गेरुआ नदी के उस पार छोड़ते समय पटरा गिर गया। पिंजरे को दुरुस्त करवाया जा रहा है। जल्द ही उर्रा गांव में पिंजरा लगाया जाएगा।