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सड़कों की बिगड़ी सूरत, पैदल चलना भी दुश्वार
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बहराइच। शहर की सड़कों की बदहाल सूरत से पैदल चलना तक दुश्वार हो गया है। मरम्मत कार्य न होने से गड्ढों में तब्दील सड़कों पर आए दिन दो पहिया व चार पहिया वाहनों के पलटने से राहगीर चोटिल होते हैं। पांच साल में जिले में 20 करोड़ की लागत से बनी सड़के देखभाल व निगरानी न होने से गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। इनमें से करीब 12 करोड़ की लागत की सड़कों का वजूद तो अमृत पेयजल योजना के तहत शहर में जगह जगह चल रही खुदाई कार्य ने छीना है। ऐसे में अब 15 नवंबर तक सड़कों को गड्ढा मुक्त बनाने की घोषणा का अनुपालन एक बड़ी चुनौती बनता दिख रहा है।
वर्ष 2017 में हुए नगर पालिका प्रशासन के गठन के बाद पांच वर्षों में करीब 20 करोड़ से अधिक की लागत से शहर की मुख्य सड़कें व मोहल्लों की सड़कों में इंटर लाकिंग व डामर रोड बनाने का कार्य हुआ था। लेकिन ठेेकेदारों की मनमानी व निर्माण में घटिया सामग्री प्रयोग में लाने के कारण बनने के कुछ माह बाद से ही इन सड़कों का उधड़ना शुरू हो गया। इसी दौरान शहरवासियों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए अमृत पेयजल योजना के तहत शहर में पाइप लाइन बिछाने का कार्य भी शुरू कराया गया। इस दौरान जलनिगम के ठेकेदारों ने पाइप लाइन डालने के नाम पर पूरे शहर की सड़कों की सूरत ही बिगाड़ दी। इनमें से करीब 12 करोड़ की लागत से बनी डामर युक्त सड़कों का तो पूरा वजूद ही खत्म हो गया है। बदहाल पड़ी इन सड़कों पर वाहन चलाना तो दूर पैदल चलना तक दुश्वार बना है।
शहर के डीएम चौराहे से गुरुद्वारे तक जाने वाली डामर सड़क जगह-जगह गड्ढों में तब्दील है। घंटाघर से रामलीला मैदान तक जाने वाली डामर सड़क पूरी तरह से अपना अस्तित्व खो चुकी है। पीपल चौराहे से किला तक जाने वाली भी डामर सड़क का अस्तित्व संकट में हैं। इक्का स्टैंड से सेंट्रलबैंक पुराना नानपारा बस स्टैंड तक जाने वाली सड़क भी अपना अस्तित्व खाने की कगार पर है। पानी टंकी चौराहे से छोटीबाजार जाने वाली डामर सड़क पर भी जगह-जगह गड्ढे बने हैं। इसके अलावा शहर के मोहल्ला खत्रीपुरा, मेवातीपुरा, बड़ीहाट, सिविल लाइन, ब्राम्हणीपुरा, मीराखेलपुरा, कबाबचीगली, काजीपुरा, सलारगंज समेत दो दर्जन से अधिक मोहल्लों की इंटरलाकिंग सड़कें भी पूरी तरह बदहाल हैं।
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जलनिगम के अधिशासी अभियंता को सड़कों के दुरुस्तीकरण को लेकर कई बार पत्र भेजा जा चुका है। 15 दिन पूर्व ही विभागीय अफसरों को चेतावनी देते हुए शहर में खोदी गई सड़कों को मानक के अनुसार दुरुस्त बनाने को कहा गया है। साथ ही शासन को भी इस संबंध में एक पत्र भेजकर पूरे मामले की जानकारी दी गयी है।
-रूबीना रेहान, चयरमैन नगर पालिका परिषद सदर
सीएम योगी ने प्रदेश भर में सड़कों को गड्ढा मुक्त बनाने के लिए लोक निर्माण विभाग अन्य जिम्मेदार विभागों को 15 नवंबर तक की मोहलत दी है। इसके बावजूद सड़कों को दुरुस्त बनाने के कार्य में जिम्मेदार सिर्फ रस्म अदायगी को गिट्टी मिट्टी डालकर गड्ढों को पाटने में जुटे दिखते हैं। जिले के विभिन्न स्थानों पर लगभग साढ़े छह सौ सड़कों को गड्ढामुक्त बनाने का कार्य 15 नवंबर तक पूरा कराया जाना है। इसके लिए विभाग को करीब 7 करोड़ का बजट भी मिला है। इसके बावजूद अभी सही तरीक से सड़क बनाने के कार्य की शुरूआत तक नहीं हुई है। ऐसे में अब महज सात जिले की चिह्नित सड़कों को गड्ढा मुक्त बनाने का कार्य पूरा कर पाना बड़ी चुनौती बना दिख रहा है।
कलेक्ट्रेट सभागार में विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र ने सड़कों की मरम्मत व निर्माण से जुड़े सभी कार्य निर्धारित समय पर ही पूरे कराने का निर्देश संबंधित विभागों के जिम्मेदारों को दिया है। इसके लिए सभी कार्यदायी संस्थाओं व प्रशासकीय विभागों के अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वह नियमित रूप से कार्यस्थल का निरीक्षण कर परियोजनाओं को पूर्ण कराएं। इसके तहत संपर्क मार्गों के नवीनीकरण, मरम्मत व सड़कों को गड्ढामुक्त बनाने से जुड़े सभी कार्य 15 नवंबर तक अवश्य पूर्ण करा लिए जाए।
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वर्ष 2017 में हुए नगर पालिका प्रशासन के गठन के बाद पांच वर्षों में करीब 20 करोड़ से अधिक की लागत से शहर की मुख्य सड़कें व मोहल्लों की सड़कों में इंटर लाकिंग व डामर रोड बनाने का कार्य हुआ था। लेकिन ठेेकेदारों की मनमानी व निर्माण में घटिया सामग्री प्रयोग में लाने के कारण बनने के कुछ माह बाद से ही इन सड़कों का उधड़ना शुरू हो गया। इसी दौरान शहरवासियों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए अमृत पेयजल योजना के तहत शहर में पाइप लाइन बिछाने का कार्य भी शुरू कराया गया। इस दौरान जलनिगम के ठेकेदारों ने पाइप लाइन डालने के नाम पर पूरे शहर की सड़कों की सूरत ही बिगाड़ दी। इनमें से करीब 12 करोड़ की लागत से बनी डामर युक्त सड़कों का तो पूरा वजूद ही खत्म हो गया है। बदहाल पड़ी इन सड़कों पर वाहन चलाना तो दूर पैदल चलना तक दुश्वार बना है।
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शहर के डीएम चौराहे से गुरुद्वारे तक जाने वाली डामर सड़क जगह-जगह गड्ढों में तब्दील है। घंटाघर से रामलीला मैदान तक जाने वाली डामर सड़क पूरी तरह से अपना अस्तित्व खो चुकी है। पीपल चौराहे से किला तक जाने वाली भी डामर सड़क का अस्तित्व संकट में हैं। इक्का स्टैंड से सेंट्रलबैंक पुराना नानपारा बस स्टैंड तक जाने वाली सड़क भी अपना अस्तित्व खाने की कगार पर है। पानी टंकी चौराहे से छोटीबाजार जाने वाली डामर सड़क पर भी जगह-जगह गड्ढे बने हैं। इसके अलावा शहर के मोहल्ला खत्रीपुरा, मेवातीपुरा, बड़ीहाट, सिविल लाइन, ब्राम्हणीपुरा, मीराखेलपुरा, कबाबचीगली, काजीपुरा, सलारगंज समेत दो दर्जन से अधिक मोहल्लों की इंटरलाकिंग सड़कें भी पूरी तरह बदहाल हैं।
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जलनिगम के अधिशासी अभियंता को सड़कों के दुरुस्तीकरण को लेकर कई बार पत्र भेजा जा चुका है। 15 दिन पूर्व ही विभागीय अफसरों को चेतावनी देते हुए शहर में खोदी गई सड़कों को मानक के अनुसार दुरुस्त बनाने को कहा गया है। साथ ही शासन को भी इस संबंध में एक पत्र भेजकर पूरे मामले की जानकारी दी गयी है।
-रूबीना रेहान, चयरमैन नगर पालिका परिषद सदर
सीएम योगी ने प्रदेश भर में सड़कों को गड्ढा मुक्त बनाने के लिए लोक निर्माण विभाग अन्य जिम्मेदार विभागों को 15 नवंबर तक की मोहलत दी है। इसके बावजूद सड़कों को दुरुस्त बनाने के कार्य में जिम्मेदार सिर्फ रस्म अदायगी को गिट्टी मिट्टी डालकर गड्ढों को पाटने में जुटे दिखते हैं। जिले के विभिन्न स्थानों पर लगभग साढ़े छह सौ सड़कों को गड्ढामुक्त बनाने का कार्य 15 नवंबर तक पूरा कराया जाना है। इसके लिए विभाग को करीब 7 करोड़ का बजट भी मिला है। इसके बावजूद अभी सही तरीक से सड़क बनाने के कार्य की शुरूआत तक नहीं हुई है। ऐसे में अब महज सात जिले की चिह्नित सड़कों को गड्ढा मुक्त बनाने का कार्य पूरा कर पाना बड़ी चुनौती बना दिख रहा है।
कलेक्ट्रेट सभागार में विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र ने सड़कों की मरम्मत व निर्माण से जुड़े सभी कार्य निर्धारित समय पर ही पूरे कराने का निर्देश संबंधित विभागों के जिम्मेदारों को दिया है। इसके लिए सभी कार्यदायी संस्थाओं व प्रशासकीय विभागों के अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वह नियमित रूप से कार्यस्थल का निरीक्षण कर परियोजनाओं को पूर्ण कराएं। इसके तहत संपर्क मार्गों के नवीनीकरण, मरम्मत व सड़कों को गड्ढामुक्त बनाने से जुड़े सभी कार्य 15 नवंबर तक अवश्य पूर्ण करा लिए जाए।