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देवोत्थानी एकादशी पर श्रद्धालुओं ने किया स्नान-दान
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बहराइच। देवोत्थानी एकादशी पर शुक्रवार को लोगों ने पवित्र नदियों में स्नान कर दान किया। भगवान विष्णु का ध्यान कर लोगों ने सूर्य को अर्घ्य दिया। वहीं, महिलाओं ने विधिविधान से व्रत रखा। शाम को घर पर पूजन के लिए लोगों ने जमकर गन्ने व सिंघाड़े की खरीद की। पंचकोसी परिक्रमा के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु अयोध्या के लिए रवाना हुए।
जिले में शुक्रवार को देवात्थानी एकादशी व तुलसी विवाह के आयोजन हुए। श्रद्धालुओं ने भोर में उठकर सरयू नदी में स्नान किया और भगवान विष्णु की पूजा की। नानपारा के तकिया घाट, शहर के मरी माता मंदिर आदि पर स्नान-दान करने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ जमा रही। वहीं, घर पर महिलाओं ने आंगन में भगवान विष्णु के पैरों की आकृति बनाकर पूजन किया। महिलाओं ने व्रत रखा और विधिविधान से पूजन-अर्चन किया। शाम को होने वाली पूजा के लिए लोगों ने गन्ने व सिंघाड़े खरीदे।
मान्यता के अनुसार, आज के दिन गन्ना व सिंघाड़ा खाना फलदायी होता है। पंडित अनंत पाठक ने बताया कि भगवान विष्णु के शयनकाल से उठने के दिन को देवोत्थानी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन से मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है। हालांकि, इस बार 29 सितंबर से शुक्रास्त है जो 22 नवंबर को उदय होंगे। ऐसे में इस बार 22 नवंबर के बाद मांगलिक कार्यों की शुुरुआत होगी।
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जिले में शुक्रवार को देवात्थानी एकादशी व तुलसी विवाह के आयोजन हुए। श्रद्धालुओं ने भोर में उठकर सरयू नदी में स्नान किया और भगवान विष्णु की पूजा की। नानपारा के तकिया घाट, शहर के मरी माता मंदिर आदि पर स्नान-दान करने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ जमा रही। वहीं, घर पर महिलाओं ने आंगन में भगवान विष्णु के पैरों की आकृति बनाकर पूजन किया। महिलाओं ने व्रत रखा और विधिविधान से पूजन-अर्चन किया। शाम को होने वाली पूजा के लिए लोगों ने गन्ने व सिंघाड़े खरीदे।
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मान्यता के अनुसार, आज के दिन गन्ना व सिंघाड़ा खाना फलदायी होता है। पंडित अनंत पाठक ने बताया कि भगवान विष्णु के शयनकाल से उठने के दिन को देवोत्थानी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन से मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है। हालांकि, इस बार 29 सितंबर से शुक्रास्त है जो 22 नवंबर को उदय होंगे। ऐसे में इस बार 22 नवंबर के बाद मांगलिक कार्यों की शुुरुआत होगी।
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