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मां ने बेटे को तेंदुए के पंजे से छुड़ाया
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Tue, 01 Sep 2015 10:01 PM IST
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बिछिया (बहराइच)। निशानगाड़ा रेंज के आजमगढ़पुरवा कारीकोट निवासी एक बालक पर सोमवार रात तेंदुए ने हमला कर दिया। वह उस समय घर से कुछ दूरी पर नित्यक्रिया के लिए गया था।
बेटे को बचाने के लिए मां ने बहादुरी दिखाई। उसने डंडे के सहारे 15 मिनट तक तेंदुए से संघर्ष किया और उसके पंजे से बच्चे को छुड़ा लिया। घायल बच्चे का इलाज सुजौली पीएचसी में चल रहा है।
निशानगाड़ा रेंज का आजमगढ़पुरवा कारीकोट गांव जंगल से सटा है। गांव निवासी चंदन के सात वर्षीय पुत्र अरुण सोमवार रात नित्यक्रिया के लिए घर से 50 मीटर दूर खेत में गया।
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निगरानी के लिए मां चंपा देवी भी बेटे के पीछे चली आई। इसी दौरान झाड़ियों में बैठे तेंदुए ने अरुण पर हमला कर दिया।
मां ने डंडे के सहारे तेंदुए के शिकंजे से बेटे को छुड़ाने की कोशिश की। 15 मिनट तक तेंदुए से संघर्ष कर उसने बेटे को छुड़ा लिया।
मां-बेटे की चीख-पुकार सुनकर परिवार और गांव के लोग भी हांका लगाते हुए दौड़े तो तेंदुआ जंगल की ओर चला गया। तत्काल सूचना रेंज कार्यालय पर दी गई। वन क्षेत्राधिकारी गयादीन, फारेस्ट गार्ड रामसमुझ तिवारी टीम के साथ मौके पर पहुंचे।
वन क्षेत्राधिकारी ने हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि घायल बालक का इलाज पीएचसी में कराया जा रहा है। इलाज के लिए अहेतुक सहायता के रूप में 1200 रुपये परिवार को प्रदान किए गए हैं।
वन क्षेत्राधिकारी का कहना है कि तेंदुए के नाखून की खरोच अरुण की पीठ, कंधे व पेट पर लगे हैं। ग्रामीणों की सजगता के चलते बालक सुरक्षित है।
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बेटे को बचाने के लिए मां ने बहादुरी दिखाई। उसने डंडे के सहारे 15 मिनट तक तेंदुए से संघर्ष किया और उसके पंजे से बच्चे को छुड़ा लिया। घायल बच्चे का इलाज सुजौली पीएचसी में चल रहा है।
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निशानगाड़ा रेंज का आजमगढ़पुरवा कारीकोट गांव जंगल से सटा है। गांव निवासी चंदन के सात वर्षीय पुत्र अरुण सोमवार रात नित्यक्रिया के लिए घर से 50 मीटर दूर खेत में गया।
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निगरानी के लिए मां चंपा देवी भी बेटे के पीछे चली आई। इसी दौरान झाड़ियों में बैठे तेंदुए ने अरुण पर हमला कर दिया।
मां ने डंडे के सहारे तेंदुए के शिकंजे से बेटे को छुड़ाने की कोशिश की। 15 मिनट तक तेंदुए से संघर्ष कर उसने बेटे को छुड़ा लिया।
मां-बेटे की चीख-पुकार सुनकर परिवार और गांव के लोग भी हांका लगाते हुए दौड़े तो तेंदुआ जंगल की ओर चला गया। तत्काल सूचना रेंज कार्यालय पर दी गई। वन क्षेत्राधिकारी गयादीन, फारेस्ट गार्ड रामसमुझ तिवारी टीम के साथ मौके पर पहुंचे।
वन क्षेत्राधिकारी ने हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि घायल बालक का इलाज पीएचसी में कराया जा रहा है। इलाज के लिए अहेतुक सहायता के रूप में 1200 रुपये परिवार को प्रदान किए गए हैं।
वन क्षेत्राधिकारी का कहना है कि तेंदुए के नाखून की खरोच अरुण की पीठ, कंधे व पेट पर लगे हैं। ग्रामीणों की सजगता के चलते बालक सुरक्षित है।