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अशोक के हौसले के आगे हार गई निशक्तता
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Tue, 01 Dec 2015 10:01 PM IST
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बहराइच। हम भी दरिया हैं, हमें अपना हुनर मालूम है, जिस तरफ चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा...। बशीर बद्र की ये लाइनें शहर के सूफीपुरा मोहल्ला निवासी अशोक कुमार अग्रवाल पर बखूबी बैठतीं हैं।
अशोक का जीवन संघर्षों की कहानी है। जन्म के नौ महीने बाद ही उनके दोनों पैरों में पोलियो हो गया, जिससे वो निशक्त हो गए।
10 साल तक चंडीगढ़ और बहराइच में इलाज करवाने के बाद भी खास लाभ नहीं हुआ। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी, इसी का नतीजा है कि एक सफल व्यवसायी के रूप में उन्होंने न सिर्फ खुद की पहचान बनाई बल्कि दूसरों को भी रोजगार देकर उनका जीवन संवार रहे हैं।
उनकी इसी जिजीविषा को देखकर विकलांग जन विकास विभाग ने उन्हें राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए चुना है। इस सम्मान के लिए अशोक को विश्व विकलांग दिवस पर तीन दिसंबर को लखनऊ बुलाया गया है।
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अशोक का जन्म 1953 में मोहल्ला सूफीपुरा में हुआ था। निशक्त होने के कारण उनकी राह में कई कठिनाइयां आईं धीरे-धीरे हाईस्कूल की परीक्षा पास की, लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच आगे की पढ़ाई भी रुक गई।
इसके बाद अशोक ने पिता कृष्ण कुमार की ओर से शुरू की सिलाई मशीन, रेडियो, ट्रांजिस्टर आदि के छोटे से व्यवसाय में हाथ बंटाना शुरू किया। आज पूरे शहर में अशोका फोटो स्टेट नाम से चर्चित उनकी दुकान पर फोटो कॉपी के साथ-साथ ऑनलाइन रिजल्ट, जन्म कुंडली के साथ आधुनिक तकनीकी संबंधी सुविधा उपलब्ध है।
उन्होंने कई लोगों को रोजगार भी दिया है। अशोक की इस जीवटता को परखकर विकलांग जन विकास विभाग के निदेशक ने विश्व विकलांग दिवस पर तीन दिसंबर को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, विभूति खंड गोमती नगर बुलाया है।
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अशोक का जीवन संघर्षों की कहानी है। जन्म के नौ महीने बाद ही उनके दोनों पैरों में पोलियो हो गया, जिससे वो निशक्त हो गए।
10 साल तक चंडीगढ़ और बहराइच में इलाज करवाने के बाद भी खास लाभ नहीं हुआ। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी, इसी का नतीजा है कि एक सफल व्यवसायी के रूप में उन्होंने न सिर्फ खुद की पहचान बनाई बल्कि दूसरों को भी रोजगार देकर उनका जीवन संवार रहे हैं।
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उनकी इसी जिजीविषा को देखकर विकलांग जन विकास विभाग ने उन्हें राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए चुना है। इस सम्मान के लिए अशोक को विश्व विकलांग दिवस पर तीन दिसंबर को लखनऊ बुलाया गया है।
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अशोक का जन्म 1953 में मोहल्ला सूफीपुरा में हुआ था। निशक्त होने के कारण उनकी राह में कई कठिनाइयां आईं धीरे-धीरे हाईस्कूल की परीक्षा पास की, लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच आगे की पढ़ाई भी रुक गई।
इसके बाद अशोक ने पिता कृष्ण कुमार की ओर से शुरू की सिलाई मशीन, रेडियो, ट्रांजिस्टर आदि के छोटे से व्यवसाय में हाथ बंटाना शुरू किया। आज पूरे शहर में अशोका फोटो स्टेट नाम से चर्चित उनकी दुकान पर फोटो कॉपी के साथ-साथ ऑनलाइन रिजल्ट, जन्म कुंडली के साथ आधुनिक तकनीकी संबंधी सुविधा उपलब्ध है।
उन्होंने कई लोगों को रोजगार भी दिया है। अशोक की इस जीवटता को परखकर विकलांग जन विकास विभाग के निदेशक ने विश्व विकलांग दिवस पर तीन दिसंबर को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, विभूति खंड गोमती नगर बुलाया है।