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तबाही के बाद जिंदगी की तलाश: सफाईकर्मी की बेटी के कपड़े 4 फीट कीचड़ में दबे मिले, 50 साल की जूलर सड़क पर आईं

Sun, 30 Aug 2026 09:34 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला नेटवर्क, विदुर/देवीघाट (नेपाल)।
अमर उजाला नेटवर्क, विदुर/देवीघाट (नेपाल)। Published by: ज्योति भास्कर Updated Sun, 30 Aug 2026 09:34 AM IST
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Nepal Tragedy Searching life amid devastation sanitation worker daughter clothes buried under mud jeweler loss
नेपाल त्रासदी - फोटो : अमर उजाला प्रिंट-एजेंसी

सब कुछ खत्म हो गया...ईश्वर ने जो दिया था, सब छीन लिया। यह बात कहते हुए अंजू शाक्य (50) की आवाज भर्रा जाती है। नेपाल में तबाही आने से पहले तक वह नुवाकोट जिले के त्रिशूली बाजार की एक संपन्न जूलर थीं। तीन मंजिला मकान, दो कारें, बाइक और तिजोरी में करीब 3.5 किलो सोना (जिसकी कीमत करीब 4 करोड़ रुपये से अधिक थी) सब कुछ था। लेकिन हिमालय की ढलानों से उतरे पानी, पत्थरों और मलबे के खौफनाक सैलाब ने चंद मिनटों में उनकी पूरी दुनिया उजाड़ दी।

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अंजू फिलहाल सेना के एक राहत शिविर में हैं। बदन पर किसी की दी टी-शर्ट है और घुटने पर पट्टी बंधी है। वह बताती है कि दरवाजे-खिड़कियां बंद करने तक का मौका नहीं मिला। परिवार जान बचाने के लिए पहाड़ी की तरफ भागा और दो दिन तक भूखे-प्यासे चट्टानों पर बैठा रहा। घर, गाड़ियों और सोने के साथ उनके सपने भी सैलाब में बह गए हैं। बाढ़ और भूस्खलन ने मध्य नेपाल के देवीघाट और विदुर जैसे कस्बों को श्मशान में बदल दिया है। अनुष्का तमांग (29) एक स्कूल में सफाईकर्मी हैं। जब वे नंगे पैर टूटे पेड़ों, टीन की छतों और मकानों के मलबे से होकर दलदल पार करती हुई अपने तबाह हो चुके घर पहुंचीं, तो वहां चार फीट गहरा कीचड़ भरा था। उनके हाथ कीचड़ से सना एक सूटकेस लगा जिसमें उनकी साड़ियां थीं। उन्हें छत पर सूखने के लिए फैलाए गए अपनी छह वर्ष की बच्ची के कुछ कपड़े भी मिले।

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नेपाल के जरेखेत, गजुरी व फुर्केखोला से राजन राय

जलप्रलय के बाद उतराई त्रिशूली नदी का बहाव शनिवार को कुछ कम हो गया है। कई परिवार घरों की ओर लौटने लगे हैं पर आगे की राह आसान नहीं है। बाढ़ के पीछे छूटी तबाही ने जिंदगी को फिर एक नई मुश्किल में डाल दिया है। घरों में कीचड़ भरा है, सामान बह चुका है। जरेखेत बरगापुल, गजुरी, फुर्के खोला सहित 12 पुल बह गए हैं। इसके चलते रिश्ते, रोजगार और रोटी सब दूर हो गए हैं। जिंदगी की असली जंग अब शुरू हुई है और वह है दो जून की रोटी का जुगाड़ कहीं चूल्हा नहीं है तो कहीं राशन नहीं है।

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पुल बह जाने से अब बाजार जाना भी मुश्किल
बाढ़ के दौरान लोगों ने किसी तरह अपने परिवार और बच्चों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। अब जब पानी कम हुआ है तो सामने भूख का संकट खड़ा दिख रहा है। गजुरी के एमनाथ भंडारी ने दर्द बयां करते हुए कहा कि बाढ़ के समय तो लगा था कि पानी उतरते ही सब ठीक हो जाएगा लेकिन पुल बह जाने से अब बाजार जाना भी मुश्किल है। अनुष्का बताती हैं कि दो रसोई गैस सिलेंडर, जिन्हें बेचकर शायद 2,000-2,500 रुपये मिल जाएं ताकि अगले कुछ दिन राशन का इंतजाम हो सके। अभी तो उसी स्कूल में शरण ले रखी हूं जहां सफाई करती थी। जिंदगी कैसे चलेगी, कुछ समझ नहीं आ रहा।

ये भी पढ़ें- नेपाल में जलप्रलय, ग्राउंड रिपोर्ट: सैलाब ने छीन लीं सांसें और सपने, पल भर में उजड़ गई बस्ती और बाजार

शून्य से शुरुआत करना बहुत कठिन
अंजू शाक्य फिलहाल तो काठमांडो में अपने रिश्तेदारों के यहां पनाह लेने की तैयारी कर रही हैं। मलबा देखकर बार-बार उनकी आंखें भर आती हैं। वह कहती है, सोने-चांदी की दुकान जिंदगी भर की मेहनत से खड़ी होती है, उसे इस उम्र में दोबारा शून्य से शुरू नहीं किया जा सकता। समझ नहीं आता कि आने वाले कल के बारे में क्या सोचूं।


पानी में बहकर आई बैंक की तिजोरी ग्रामीणों ने लूटा... 29 हिरासत में
नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बीच एक अजीबोगरीब लूट का मामला सामने आया है। बाढ़ के तेज बहाव में बहकर आई एक बैंक की सुरक्षित तिजोरी को तोड़कर पैसे चुराने के आरोप में पुलिस ने 29 लोगों को हिरासत में लिया है। नेपाली पुलिस के अनुसार, यह तिजोरी रसुवा के भोटेकोशी इलाके से बाढ़ के पानी में बह गई थी। बाद में त्रिशूली नदी के किनारे मिली। धादिंग पुलिस को सूचना मिली कि स्थानीय लोगों ने नदी किनारे मिली तिजोरी को तोड़ दिया है और उसके अंदर रखी नकदी निकाल ली है। षपुलिस ने 29 लोगों को पकड़ा और उनके पास से 92,68,505 नेपाली रुपये (लगभग 57 लाख भारतीय रुपये) बरामद किए। हिरासत में लिए गए लोग अधिकांश गल्छी, सिद्धालेक, चितवन और परसा के निवासी हैं।

डीएनए सुरक्षित कर दफनाए जा रहे शव
नेपाल में प्राकृतिक आपदा के बाद अब शवों के सड़ने-गलने से महामारी फैलने का खतरा पैदा हो गया है। बाढ़ के पानी में बहकर दूरदराज के क्षेत्रों में पहुंचे शवों की पहचान करना भी मुश्किल हो रहा है। इसे देखते हुए शवों का डीएनए सुरक्षित रखने के बाद उन्हें दफनाया जा रहा है। पुलिस अधीक्षक रामेश्वर पौडेल के अनुसार, अब तक चितवन में 233 शव बरामद किए जा चुके हैं। इनमें से 6 शवों की पहचान हुई है। बाकी शव अत्यधिक सड़ने के कारण पहचान योग्य स्थिति में नहीं हैं।

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