फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bahraich News ›   कमजोर मानसून ने बढ़ाई किसानों की चिंता

कमजोर मानसून ने बढ़ाई किसानों की चिंता

Tue, 10 Jul 2018 10:16 PM IST
Updated Tue, 10 Jul 2018 10:16 PM IST
विज्ञापन
कमजोर मानसून ने बढ़ाई किसानों की चिंता
बहराइच। जुलाई के पहले सप्ताह में तीन दिनों की बरसात के बाद से बादल छाते तो जरूर हैं, पर बिना बरसे ही निकल जाते हैं। धान की रोपाई का समय चल रहा है। ऐसे में किसान परेशान हैं।
विज्ञापन


सही बारिश न होने के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। एक जून से अब तक सिर्फ 173.12 मिमी वर्षा हुई है। बीते वर्ष 190 मिमी से अधिक वर्षा रिकॉर्ड हुई थी। पंपिंग सेट से जैसे तैसे किसान धान की रोपाई करने को मजबूर हैं।
विज्ञापन


बहराइच के14 विकासखंडों में लगभग 70 हजार हेक्टेयर भूमि में धान की पैदावार का लक्ष्य जिला प्रशासन ने इस बार निर्धारित किया था। जिले के कृषि अधिकारियों ने गांवों में चौपाल लगाकर किसानों को जागरूक करने का भी काम किया।
विज्ञापन
विज्ञापन


धान की नर्सरी की बोआई पहले ही की जा चुकी थी। अब उसे खेतों में लगाने का काम शुरू होना था। लेकिन बारिश ने इस बार किसानों का साथ नहीं दिया है।

दो जुलाई से चार जुलाई तक ही बरसात हुई है। अब किसानों को धान की रोपाई के लिए पंपिंग सेट चलाने को मजबूर होना पड़ रहा है। डीजल के महंगे दामों के कारण उनकी लागत भी बढ़ने की आशंका है।

पंपिंग सेट से सिंचाई मजबूरी, बढ़ रही लागत
खैरीघाट क्षेत्र निवासी किसान राजेंद्र पाल सिंह व मगन बिहारी मिश्रा ने बताया कि मानसून के ठीक से नहीं बरसने के कारण धान की नर्सरी प्रभावित हो रही है।

गांवों में पंपिंग सेट के लिए दो से तीन दिन पहले तक बात पक्की करनी पड़ती है। वरना लंबा इंतजार करना पड़ जाता है। किसान शिवसेवक मिश्रा व अब्दुल कुद्दूस ने बताया कि डीजल के दाम महंगे होने के कारण लगभग प्रतिदिन धान की नर्सरी की रोपाई में पांच सौ रुपये प्रति बीघे की रकम जा रही है।

चार जुलाई तक महज 169 मिमी बरसात
तहसीलों द्वारा भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार चार जुलाई तक सबसे अधिक बरसात दर्ज हुई है। इसके अनुसार चार जुलाई को अंतिम दिन सबसे अधिक पांच मिलीमीटर बरसात सदर तहसील में हुई। चार जुलाई तक 169.75 मिमी बरसात रिकॉर्ड हुई थी। इसके बाद अब तक रिकॉर्ड होने वाली वर्षा नहीं हुई।


किसानों को दिए जा रहे सुझाव
गांवों में गोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। इसमें कृषि अधिकारियों और वैज्ञानिकों की ओर से किसानों को धान की रोपाई के टिप्स दिए जा रहे हैं। किसान वैज्ञानिक पद्धति से रोपाई करते हुए उत्पादन लागत को कम कर सकते हैं।
-डॉ. आरके सिंह, उपनिदेशक कृषि, बहराइच
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed