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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bahraich News ›   60- year-old widow , 5 children newborn to 10 months !

60 वर्षीय विधवा ने 10 माह में जने 5 बच्चे!

Wed, 24 Jun 2015 10:26 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच Updated Wed, 24 Jun 2015 10:26 PM IST
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दस महीने में एक 60 साल की विधवा ने पांच बच्चों को जन्म दिया...। असंभव है ना, पर जिले के  स्वास्थ्य महकमे ने इसे साबित कर दिखाया है। सारा खेल जननी सुरक्षा योजना में हुआ है।
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 बुजुर्ग महिला के बैंक खाते में महकमे ने पांच बार जननी सुरक्षा योजना की 14-14 सौ रुपये के पांच चेक जमा किए हैं। इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा है। अपनी कुर्सी फंसते देख सीएमओ ने बौंडी पीएचसी के पांच कर्मचारियों पर निलंबन की कार्रवाई की है।
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 फिलहाल पूरे जिले में जेएसवाई योजना के तहत घोटाले की पटकथा लिखी जा रही है। अब जिम्मेदारान मामले की जांच का दावा कर रहे हैं।
संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय हेल्थ मिशन के तहत जननी सुरक्षा योजना संचालित है। इसके तहत स्वास्थ्य केंद्रों पर सुरक्षित प्रसव कराने पर लाभार्थी को 14 सौ रुपये का चेक दिया जाता है। यह धनराशि लाभार्थी के बैंक खाते में विभाग हस्तांतरित करता है।
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 तो वहीं स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसव के बाद 48 घंटे ठहरने पर भोजन देने की व्यवस्था है। लेकिन जिले में जननी सुरक्षा योजना व शिशु सुरक्षा कार्यक्रम में करोड़ो रुपये का घोटाला किया जा रहा है। फर्जी तरीके से प्रसव दिखाकर विभाग करोड़ों रुपये की बंदरबाट करने में जुटा है।
 तो वहीं प्रसूताओं को भोजन भी नहीं दिया जा रहा है। लेकिन कागजों पर प्रसूताओं को सभी सुविधाएं दी जा रही हैं। ताजा मामला फखरपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अंतर्गत बौंडी अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का है।
 यहां बौंडी निवासी ननकई (60) पत्नी स्व ननकऊ को विभाग ने दस महीने में पांच बार जननी सुरक्षा योजना का लाभ दिया है।
जबकि ननकई को इस बात की जानकारी तक नहीं है। इसी तरह गांव की करीब दो सौ से अधिक महिलाओं को गर्भवती फिर केंद्र पर प्रसव दिखाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है।
इतने बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता की पुष्टि के बावजूद फखरपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ प्रताप गौतम पर सिर्फ स्थानांतरण की कार्रवाई की गई है।
डॉ प्रताप को अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रमवापुर भेजा गया है। जबकि बौंडी के फार्मासिस्ट सुशील प्रकाश शुक्ला का स्थानांतरण सुजौली पीएचसी पर किया गया है।

 केेंद्र प्रभारी के बिना सहमति व हस्ताक्षर के जेएसवाई का चेक भुगतान नहीं किया जाता है। इसके बावजूद सिर्फ स्थानांतरण की कार्रवाई, सीएमओ को भी कटघरे में खड़ी कर रही है।
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