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Bahraich News: बाघ की गणना के लिए नार्थ खीरी डिवीजन भेजे गए 350 कैमरा ट्रैप
Tue, 16 Dec 2025 01:26 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Tue, 16 Dec 2025 01:26 AM IST
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मिहींपुरवा। कतर्नियाघाट सेंक्चुरी से सटे नार्थ खीरी डिवीजन के किशनपुर सेंक्चुरी में 15 दिसंबर से बाघों की गणना प्रथम चरण में शुरू हो गई, लेकिन गणना के लिए कैमरा ट्रैप कम पड़ गए। इसके चलते कतर्नियाघाट से 350 अत्याधुनिक कैमरा ट्रैप नार्थखीरी डिवीजन को उपलब्ध करा दिए गए हैं। वहां थर्मो सेंसर कैमरे लगाकर गणना का काम शुरू कर दिया गया है।
बाघों की गणना राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के दिशा-निर्देशों के तहत भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई), देहरादून की देखरेख में कराई जा रही है। बाघ गणना उत्तर प्रदेश के वन क्षेत्रों में 15 दिसंबर से शुरू हो गई है।
तीन चरणों में हो रही गणना के प्रथम चरण में पीलीभीत टाइगर रिजर्व और नार्थ खीरी का किशनपुर सेंक्चुरी शामिल हैं, लेकिन किशनपुर सेंक्चुरी में बाघों की गिनती के लिए कैमरा ट्रैप कम पड़ने के बाद कतर्नियाघाट से विशेष वाहक से आननफानन 350 कैमरे भेजे गए ।
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बाघ गणना के नोडल अधिकारी एवं दुधवा नेशनल पार्क के फील्ड डायरेक्टर, मुख्य वन संरक्षक एच राजा मोहन ने बताया कि बाघों की गणना के दौरान लगाए जाने वाले कैमरा ट्रैप आमतौर पर 30 से 35 दिनों तक जंगल में लगे रहते हैं।
वन विभाग के पास कैमरों की पर्याप्त संख्या होती है, लेकिन एक साथ बड़ी संख्या में कैमरे लगाए जाने के कारण कभी-कभी वन्यजीव प्रभाग के पास अस्थायी रूप से कमी हो सकती है। उन्होंने कहा कि कतर्नियाघाट वन प्रभाग में 450 कैमरे हैं। इसी के तहत 350 कैमरे किशनपुर सेंक्चुरी को भेजे गए हैं।
कैमरा ट्रैप से होगी सटीक पहचान
फील्ड डायरेक्टर, मुख्य वन संरक्षक एच राजा मोहन ने बताया कि सभी स्थानों पर बाघों की मौजूदगी और उनकी गतिविधियों को दर्ज करने के लिए कैमरा ट्रैप तकनीक अपनाई जाएगी। थर्मो सेंसर कैमरे से बाघों की संख्या, क्षेत्रीय फैलाव और उनकी आवाजाही का सटीक आकलन संभव हो सकेगा।
चरणवार बाघों की गणना का यह है रोस्टर
-प्रथम चरण: पीलीभीत टाइगर रिजर्व और किशनपुर सेंचुरी (नार्थ खीरी)
-द्वितीय चरण: कतर्नियाघाट और दुधवा टाइगर रिजर्व
-तृतीय चरण: रानीपुर सहित प्रदेश के अन्य वन्यजीव अभयारण्य और बफर जोन
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बाघों की गणना राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के दिशा-निर्देशों के तहत भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई), देहरादून की देखरेख में कराई जा रही है। बाघ गणना उत्तर प्रदेश के वन क्षेत्रों में 15 दिसंबर से शुरू हो गई है।
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तीन चरणों में हो रही गणना के प्रथम चरण में पीलीभीत टाइगर रिजर्व और नार्थ खीरी का किशनपुर सेंक्चुरी शामिल हैं, लेकिन किशनपुर सेंक्चुरी में बाघों की गिनती के लिए कैमरा ट्रैप कम पड़ने के बाद कतर्नियाघाट से विशेष वाहक से आननफानन 350 कैमरे भेजे गए ।
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बाघ गणना के नोडल अधिकारी एवं दुधवा नेशनल पार्क के फील्ड डायरेक्टर, मुख्य वन संरक्षक एच राजा मोहन ने बताया कि बाघों की गणना के दौरान लगाए जाने वाले कैमरा ट्रैप आमतौर पर 30 से 35 दिनों तक जंगल में लगे रहते हैं।
वन विभाग के पास कैमरों की पर्याप्त संख्या होती है, लेकिन एक साथ बड़ी संख्या में कैमरे लगाए जाने के कारण कभी-कभी वन्यजीव प्रभाग के पास अस्थायी रूप से कमी हो सकती है। उन्होंने कहा कि कतर्नियाघाट वन प्रभाग में 450 कैमरे हैं। इसी के तहत 350 कैमरे किशनपुर सेंक्चुरी को भेजे गए हैं।
कैमरा ट्रैप से होगी सटीक पहचान
फील्ड डायरेक्टर, मुख्य वन संरक्षक एच राजा मोहन ने बताया कि सभी स्थानों पर बाघों की मौजूदगी और उनकी गतिविधियों को दर्ज करने के लिए कैमरा ट्रैप तकनीक अपनाई जाएगी। थर्मो सेंसर कैमरे से बाघों की संख्या, क्षेत्रीय फैलाव और उनकी आवाजाही का सटीक आकलन संभव हो सकेगा।
चरणवार बाघों की गणना का यह है रोस्टर
-प्रथम चरण: पीलीभीत टाइगर रिजर्व और किशनपुर सेंचुरी (नार्थ खीरी)
-द्वितीय चरण: कतर्नियाघाट और दुधवा टाइगर रिजर्व
-तृतीय चरण: रानीपुर सहित प्रदेश के अन्य वन्यजीव अभयारण्य और बफर जोन