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छह घोंसलों से निकले 300 नन्हें घड़ियाल
अमर उजाला/बहराइच
Updated Mon, 12 Jun 2017 10:54 PM IST
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अंडे से निकले घड़ियाल
- फोटो : अमर उजाला
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कतर्नियाघाट के गेरुआ नदी में टॉपू पर घड़ियालों के छह और घोसले सोमवार को खुल गए। इन छह घोसलों से 300 नन्हें घड़ियाल निकले, जिन्हें नदी में सुरक्षित छोड़ दिया गया है। सामान्य से अधिक तापमान के कारण निर्धारित समय से पहले इस बार घड़ियालों के नेस्ट खुल रहे हैं। इस बार गेरुआ नदी में घड़ियालों के 27 घोसले बने थे। इनमें से अब तक 22 घोसलों से अंडे खुल चुके हैं। वनाधिकारी व जलीय जीव विशेषज्ञ निरंतर शेष घोसलों की निगरानी कर रहे हैं।
कतर्नियाघाट के गेरुआ नदी में घड़ियालों का प्रजनन काल मार्च में शुरू होता है। इसके बाद मादा घड़ियाल अपने अंडों को नदी के टॉपू में सहेजती हैं। 15 जून के आसपास अंडों से बच्चे निकलने का समय होता है, लेकिन इस बार तराई का मौसम सामान्य से अधिक होने के चलते ब्रीडिंग 10 दिन पहले शुरू हो गई।
गौरतलब हो कि इस बार गेरुआ नदी के टॉपुओं पर मादा घड़ियालों ने सीमेंट टॉवर, भवनियापुर घाट समेत तीन स्थानों पर अंडों को सहेजा था। सप्ताह भर पूर्व 16 नेस्ट खुले थे, जिनसे करीब 700 नन्हें घड़ियाल निकले थे।
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कतर्नियाघाट रेंज के वन क्षेत्राधिकारी आरकेपी सिंह ने बताया कि वन विभाग की टीम मोटरबोट से निरंतर गश्त कर रही है। सोमवार को सुबह सीमेंट टॉवर के सामने स्थित टॉपू पर और छह नेस्ट खुले, जिनसे 300 घड़ियाल के बच्चे निकले। सभी बच्चों को सुरक्षित गेरुआ नदी में छोड़ दिया गया है।
उन्होंने कहा कि अभी पांच और नेस्ट खुलने शेष हैं। उनकी निगरानी की जा रही है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजनाधिकारी दबीर हसन ने बताया कि तापमान सामान्य से अधिक होने के चलते समय से पहले ब्रीडिंग शुरू हुई। 15 जून तक सभी घोसलों के खुलने का अनुमान लगाया जा रहा है।
अमूमन जब घोसलों से आवाजें आने लगती हैं तो मादा घड़ियाल पहुंचकर बालू को हटाकर अंडों से निकल रहे बच्चों को सहेजती है। फिर उन्हें नदी की ओर छोड़ देती है। लेकिन समय से पूर्व अंडों से बच्चे निकलने के कारण सीमेंट टॉवर और भवनियापुर घाट के पास स्थित तीन घोसलों में दरारें देखकर वनकर्मियों ने बालू हटाकर बच्चों को नदी में सुरक्षित छोड़ा।
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कतर्नियाघाट के गेरुआ नदी में घड़ियालों का प्रजनन काल मार्च में शुरू होता है। इसके बाद मादा घड़ियाल अपने अंडों को नदी के टॉपू में सहेजती हैं। 15 जून के आसपास अंडों से बच्चे निकलने का समय होता है, लेकिन इस बार तराई का मौसम सामान्य से अधिक होने के चलते ब्रीडिंग 10 दिन पहले शुरू हो गई।
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गौरतलब हो कि इस बार गेरुआ नदी के टॉपुओं पर मादा घड़ियालों ने सीमेंट टॉवर, भवनियापुर घाट समेत तीन स्थानों पर अंडों को सहेजा था। सप्ताह भर पूर्व 16 नेस्ट खुले थे, जिनसे करीब 700 नन्हें घड़ियाल निकले थे।
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कतर्नियाघाट रेंज के वन क्षेत्राधिकारी आरकेपी सिंह ने बताया कि वन विभाग की टीम मोटरबोट से निरंतर गश्त कर रही है। सोमवार को सुबह सीमेंट टॉवर के सामने स्थित टॉपू पर और छह नेस्ट खुले, जिनसे 300 घड़ियाल के बच्चे निकले। सभी बच्चों को सुरक्षित गेरुआ नदी में छोड़ दिया गया है।
उन्होंने कहा कि अभी पांच और नेस्ट खुलने शेष हैं। उनकी निगरानी की जा रही है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजनाधिकारी दबीर हसन ने बताया कि तापमान सामान्य से अधिक होने के चलते समय से पहले ब्रीडिंग शुरू हुई। 15 जून तक सभी घोसलों के खुलने का अनुमान लगाया जा रहा है।
अमूमन जब घोसलों से आवाजें आने लगती हैं तो मादा घड़ियाल पहुंचकर बालू को हटाकर अंडों से निकल रहे बच्चों को सहेजती है। फिर उन्हें नदी की ओर छोड़ देती है। लेकिन समय से पूर्व अंडों से बच्चे निकलने के कारण सीमेंट टॉवर और भवनियापुर घाट के पास स्थित तीन घोसलों में दरारें देखकर वनकर्मियों ने बालू हटाकर बच्चों को नदी में सुरक्षित छोड़ा।