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कलश यात्रा के साथ शुरू हुई भागवत कथा, पहले दिन हुआ भगवान का जन्म
Updated Sun, 18 Jun 2017 12:35 AM IST
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कलश यात्रा के साथ शुरू हुई भागवत कथा
नरायनजोत गांव में 251 महिलाओं ने निकाली कलश यात्रा
बाबागंज (बहराइच)। नरायनजोत गांव स्थित भैरव मंदिर में कलश यात्रा के साथ भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। कलश यात्रा में गांव की 251 महिलाओं ने सिर पर कलश रखकर नदी के तट से जल भरकर पूजा स्थल पर घट की स्थापना की। पूजन-अर्चन के साथ भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। पहले दिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा सुनाई गई।
बाबागंज के नरायनजोत गांव में स्थित भैरव मंदिर में भागवत कथा का शुभारंभ कलश यात्रा के साथ हुआ। आयोजन समिति के अंबरलाल पांडेय तथा श्यामसुंदर पांडेय ने बताया कि कलश यात्रा में क्षेत्र की 251 महिलाओं ने सिर पर कलश रखकर पूरे गांव का भ्रमण किया। इसके बाद महिलाएं क्षेत्र में स्थित नदी के तट पर जल भरकर पुन: पूजा स्थल पर पहुंचीं। यहां पर कलश स्थापना के साथ भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। जिसमें वृंदावन के आचार्य निर्मल भूषण पांडेय तथा पंडित चंद्रभूषण पांडेय ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि माता यशोदा के कृष्ण आठवें पुत्र थे, जो बाद में कंस के लिए काल बने। इस मौके पर शिवनाथ पांडेय, रामकुमार पांडेय, तेजनरायन त्रिपाठी, प्रदीप कुमार त्रिपाठी, सत्यप्रकाश, राजेश पांडेय आदि मौजूद रहे।
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नरायनजोत गांव में 251 महिलाओं ने निकाली कलश यात्रा
बाबागंज (बहराइच)। नरायनजोत गांव स्थित भैरव मंदिर में कलश यात्रा के साथ भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। कलश यात्रा में गांव की 251 महिलाओं ने सिर पर कलश रखकर नदी के तट से जल भरकर पूजा स्थल पर घट की स्थापना की। पूजन-अर्चन के साथ भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। पहले दिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा सुनाई गई।
बाबागंज के नरायनजोत गांव में स्थित भैरव मंदिर में भागवत कथा का शुभारंभ कलश यात्रा के साथ हुआ। आयोजन समिति के अंबरलाल पांडेय तथा श्यामसुंदर पांडेय ने बताया कि कलश यात्रा में क्षेत्र की 251 महिलाओं ने सिर पर कलश रखकर पूरे गांव का भ्रमण किया। इसके बाद महिलाएं क्षेत्र में स्थित नदी के तट पर जल भरकर पुन: पूजा स्थल पर पहुंचीं। यहां पर कलश स्थापना के साथ भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। जिसमें वृंदावन के आचार्य निर्मल भूषण पांडेय तथा पंडित चंद्रभूषण पांडेय ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि माता यशोदा के कृष्ण आठवें पुत्र थे, जो बाद में कंस के लिए काल बने। इस मौके पर शिवनाथ पांडेय, रामकुमार पांडेय, तेजनरायन त्रिपाठी, प्रदीप कुमार त्रिपाठी, सत्यप्रकाश, राजेश पांडेय आदि मौजूद रहे।
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