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फिर घाघरा में छोड़ा गया तीन लाखक्यूसेक पानी
Updated Fri, 13 Jul 2018 11:48 PM IST
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महसी/कैसरगंज। घाघरा नदी के जलस्तर में कमी नहीं आ रही है। वहीं कटान बढ़ रही है। नदी ने कटान करते हुए महसी तहसील क्षेत्र के 6 आशियानों को लील लिया है। जबकि महसी और कैसरगंज में 160 बीघा खेती योग्य जमीन नदी की भेंट चढ़ी है।
ग्रामीणों ने तहसील को सूचना दी है। लेकिन अब तक कटान रोकने के कोई उपाय नहीं किए गए हैं। जिसके चलते ग्रामीण अपना खेत और मकान नदी में समाहित होते देखने को मजबूर हैं। वहीं घाघरा में 3.7 लाख क्यूसेक पानी फिर छोड़ा गया है।
महसी का पिपरी, गोलागंज, प्रधानपुरवा गांव इस समय नदी के निशाने पर है। नदी ने गुरुवार रात से कटान करते हुए शुक्रवार दोपहर बाद तक प्रधानपुरवा गांव उदई, उमेश और राधे समेत 6 ग्रामीणों के मकान को लील लिया।
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इन गांवों के पास खेती योग्य जमीन भी निरंतर कट रही है। हड़ताल के चलते कोई भी लेखपाल क्षेत्र में नहीं है। ऐसे में कटान का ब्योरा भी तहसील प्रशासन को नहीं भेजा जा रहा है। वहीं महसी क्षेत्र में लगभग 90 बीघा जमीन नदी की भेंट चढ़ी है।
उधर कैसरगंज के गोड़हिया नंबर तीन के मजरा झपट्टी के निकट घाघरा की कटान में 70 बीघा खेत में कटान में समाहित हुआ। खतरे के निशान से नदी महज 40 सेंटीमीटर दूर है। इसके चलते तटवर्ती इलाकों में दहशत है।
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ग्रामीणों ने तहसील को सूचना दी है। लेकिन अब तक कटान रोकने के कोई उपाय नहीं किए गए हैं। जिसके चलते ग्रामीण अपना खेत और मकान नदी में समाहित होते देखने को मजबूर हैं। वहीं घाघरा में 3.7 लाख क्यूसेक पानी फिर छोड़ा गया है।
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महसी का पिपरी, गोलागंज, प्रधानपुरवा गांव इस समय नदी के निशाने पर है। नदी ने गुरुवार रात से कटान करते हुए शुक्रवार दोपहर बाद तक प्रधानपुरवा गांव उदई, उमेश और राधे समेत 6 ग्रामीणों के मकान को लील लिया।
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इन गांवों के पास खेती योग्य जमीन भी निरंतर कट रही है। हड़ताल के चलते कोई भी लेखपाल क्षेत्र में नहीं है। ऐसे में कटान का ब्योरा भी तहसील प्रशासन को नहीं भेजा जा रहा है। वहीं महसी क्षेत्र में लगभग 90 बीघा जमीन नदी की भेंट चढ़ी है।
उधर कैसरगंज के गोड़हिया नंबर तीन के मजरा झपट्टी के निकट घाघरा की कटान में 70 बीघा खेत में कटान में समाहित हुआ। खतरे के निशान से नदी महज 40 सेंटीमीटर दूर है। इसके चलते तटवर्ती इलाकों में दहशत है।