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गेरुआ नदी के तट पर ग्रामीणों के प्रवेश पर लगी रोंक, अलर्ट
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बिछिया (बहराइच)। कतर्नियाघाट रेंज से गुजरने वाली गेरुआ नदी के तट पर दो दिन पूर्व मगरमच्छ द्वारा ग्रामीण को निवाला बनाने के बाद नदी के तट पर आम आदमी का प्रवेश रोक दिया गया है। नदी के तट पर एक किलोमीटर तक प्लास्टिक की रस्सियों के जाल लगाए गए हैं। संकेतक बोर्ड लगाकर लोगों को खतरा होने का संकेत दिया गया है।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के वनग्राम भवानीपुर निवासी प्यारेलाल कुछ दिन पूर्व गेरुआ नदी के तट पर नित्यक्रिया के लिए गया था। उसी दौरान नदी के तट पर छिपा मगरमच्छ प्यारेलाल पर हमला कर उसे नदी में खींच ले गया था। घटना के बीस घंटे बाद ग्रामीण का शव गेरुआ नदी में मिला था।
घटना के बाद वन विभाग ने आसपास के लोगों को सजग रहने के निर्देश दिए थे। लेकिन तट पर मगरमच्छ की निरंतर आमद को देखते हुए अब ग्रामीणों के तट की ओर जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। वन क्षेत्राधिकारी पियूष मोहन श्रीवास्तव ने बताया कि गांव में बैठक कर लोगों को सजग रहने व तट की ओर न जाने की सलाह दी जा रही है।
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उन्होंने कहा कि मगरमच्छ आबादी की ओर न आ सके, इसके लिए नदी के तट पर एक किलोमीटर की दूरी तक प्लास्टिक की रस्सियों का जाल लगा दिया गया है । घटनास्थल पर एक सचेतक बोर्ड भी लगाया गया है। जिसमें वन व जलीय जीव क्षेत्र में लोग प्रवेश न करें। घने जंगलों में जाने से भी मना किया जा रहा है। इसके साथ ही वन विभाग की टीम घटनास्थल पर निरंतर गश्त कर रही है।
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कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के वनग्राम भवानीपुर निवासी प्यारेलाल कुछ दिन पूर्व गेरुआ नदी के तट पर नित्यक्रिया के लिए गया था। उसी दौरान नदी के तट पर छिपा मगरमच्छ प्यारेलाल पर हमला कर उसे नदी में खींच ले गया था। घटना के बीस घंटे बाद ग्रामीण का शव गेरुआ नदी में मिला था।
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घटना के बाद वन विभाग ने आसपास के लोगों को सजग रहने के निर्देश दिए थे। लेकिन तट पर मगरमच्छ की निरंतर आमद को देखते हुए अब ग्रामीणों के तट की ओर जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। वन क्षेत्राधिकारी पियूष मोहन श्रीवास्तव ने बताया कि गांव में बैठक कर लोगों को सजग रहने व तट की ओर न जाने की सलाह दी जा रही है।
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उन्होंने कहा कि मगरमच्छ आबादी की ओर न आ सके, इसके लिए नदी के तट पर एक किलोमीटर की दूरी तक प्लास्टिक की रस्सियों का जाल लगा दिया गया है । घटनास्थल पर एक सचेतक बोर्ड भी लगाया गया है। जिसमें वन व जलीय जीव क्षेत्र में लोग प्रवेश न करें। घने जंगलों में जाने से भी मना किया जा रहा है। इसके साथ ही वन विभाग की टीम घटनास्थल पर निरंतर गश्त कर रही है।