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24 घंटे सप्लाई का दावा पर घंटो शहर में रहता अंधेरा
Updated Sun, 18 Jun 2017 12:20 AM IST
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तय रोस्टर से नहीं हो रही विद्युत आपूर्ति
शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में लड़खड़ाई विद्युत व्यवस्था
बहराइच। जिले में विद्युत आपूर्ति व्यवस्था पटरी से उतर चुकी है। शहर में 24 घंटे आपूर्ति का रोस्टर है, पर घंटों बिजली गुल रहती है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में रोस्टर समय में भी बमुश्किल पांच से दस घंटे ही बिजली मिलती है। विद्युत लाइनों का बुरा हाल है। कहीं लकड़ी की बल्लियों पर सप्लाई हो रही है तो कहीं तार झूल रहे हैं। हल्की सी आंधी में सप्लाई घंटों बंद रहती है। पावर कार्पोरेशन महकमा सिर्फ बकाया वसूली में व्यस्त है।
जिले की 36 लाख की आबादी को विद्युत सप्लाई के लिए 30 उपकेंद्र स्थापित हैं। साल भर पूर्व तो बिजली व्यवस्था ढर्रे पर थी, लेकिन उसके बाद धीरे-धीरे व्यवस्था पटरी से उतरती गई। इस समय शहर में 24 घंटे विद्युत सप्लाई का रोस्टर जारी है। ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे का रोस्टर है। रोस्टर के सापेक्ष उपभोक्ताओं को बिजली नहीं मिल रही है। हालात यह हैं कि शहर के कुछ मोहल्लों में घंटो विद्युत बाधित रहती है। ग्रामीण आंचलों में महज पांच से दस घंटे ही विद्युत आपूर्ति की जा रही है। प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री ने नाइन प्वाइंट एजेंडे के तहत विद्युत सुधार का फरमान जारी किया था। लेकिन अभी इसका असर बहराइच में नहीं दिखा है। कटौती बदस्तूर जारी है। नानपारा, कैसरगंज, महसी, फखरपुर, रिसिया क्षेत्रों में बिजली सप्लाई सबसे ज्यादा प्रभावित है। मालूम हो कि जिले की करीब 40 फीसदी विद्युत लाइनें अभी भी जर्जर हालत में हैं। हल्की सी आंधी पानी में लाइनें टूटकर गिर रही हैं। महकमा इसे दुरुस्त कराने में दो से तीन दिन का समय लगा देता है। शहर समेत ग्रामीण आंचलों में अभी भी कई स्थानों पर लकड़ी की बल्लियों के सहारे विद्युत की सप्लाई होती है। कई जगह तार लटक रहे हैं। जिसके चलते आए दिन हादसे होते रहते हैं।
बदले जा रहे जर्जर तार, लगेंगे खंभे
लकड़ी की बल्लियों पर विद्युत सप्लाई की जानकारी नहीं थी। अब पता चला है। शहर में भूमिगत केबल डाली जा रहीं हैं। ऐसे में शहर की व्यवस्था बहुत जल्द ठीक हो जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों की भी विद्युत लाइनों को दुरुस्त करवाकर लोहे व सीमेंट के खंभे लगवाए जाएंगे। रोस्टर के मुताबिक विद्युत आपूर्ति हो रही है। लोड अधिक पड़ने पर ट्रिपिंग के दौरान समस्या होती है। उस समय शट डाउन करना पड़ता है।
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आरिफ अहमद, अधिशासी अभियंता, पावर कॉर्पोरेशन
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शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में लड़खड़ाई विद्युत व्यवस्था
बहराइच। जिले में विद्युत आपूर्ति व्यवस्था पटरी से उतर चुकी है। शहर में 24 घंटे आपूर्ति का रोस्टर है, पर घंटों बिजली गुल रहती है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में रोस्टर समय में भी बमुश्किल पांच से दस घंटे ही बिजली मिलती है। विद्युत लाइनों का बुरा हाल है। कहीं लकड़ी की बल्लियों पर सप्लाई हो रही है तो कहीं तार झूल रहे हैं। हल्की सी आंधी में सप्लाई घंटों बंद रहती है। पावर कार्पोरेशन महकमा सिर्फ बकाया वसूली में व्यस्त है।
जिले की 36 लाख की आबादी को विद्युत सप्लाई के लिए 30 उपकेंद्र स्थापित हैं। साल भर पूर्व तो बिजली व्यवस्था ढर्रे पर थी, लेकिन उसके बाद धीरे-धीरे व्यवस्था पटरी से उतरती गई। इस समय शहर में 24 घंटे विद्युत सप्लाई का रोस्टर जारी है। ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे का रोस्टर है। रोस्टर के सापेक्ष उपभोक्ताओं को बिजली नहीं मिल रही है। हालात यह हैं कि शहर के कुछ मोहल्लों में घंटो विद्युत बाधित रहती है। ग्रामीण आंचलों में महज पांच से दस घंटे ही विद्युत आपूर्ति की जा रही है। प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री ने नाइन प्वाइंट एजेंडे के तहत विद्युत सुधार का फरमान जारी किया था। लेकिन अभी इसका असर बहराइच में नहीं दिखा है। कटौती बदस्तूर जारी है। नानपारा, कैसरगंज, महसी, फखरपुर, रिसिया क्षेत्रों में बिजली सप्लाई सबसे ज्यादा प्रभावित है। मालूम हो कि जिले की करीब 40 फीसदी विद्युत लाइनें अभी भी जर्जर हालत में हैं। हल्की सी आंधी पानी में लाइनें टूटकर गिर रही हैं। महकमा इसे दुरुस्त कराने में दो से तीन दिन का समय लगा देता है। शहर समेत ग्रामीण आंचलों में अभी भी कई स्थानों पर लकड़ी की बल्लियों के सहारे विद्युत की सप्लाई होती है। कई जगह तार लटक रहे हैं। जिसके चलते आए दिन हादसे होते रहते हैं।
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बदले जा रहे जर्जर तार, लगेंगे खंभे
लकड़ी की बल्लियों पर विद्युत सप्लाई की जानकारी नहीं थी। अब पता चला है। शहर में भूमिगत केबल डाली जा रहीं हैं। ऐसे में शहर की व्यवस्था बहुत जल्द ठीक हो जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों की भी विद्युत लाइनों को दुरुस्त करवाकर लोहे व सीमेंट के खंभे लगवाए जाएंगे। रोस्टर के मुताबिक विद्युत आपूर्ति हो रही है। लोड अधिक पड़ने पर ट्रिपिंग के दौरान समस्या होती है। उस समय शट डाउन करना पड़ता है।
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आरिफ अहमद, अधिशासी अभियंता, पावर कॉर्पोरेशन