{"_id":"6aa309b305425da85f00b807","slug":"two-cattle-died-due-to-lumpy-in-garhi-kalanjari-more-than-25-fell-ill-baghpat-news-c-28-1-bpt1002-158510-2026-09-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Baghpat News: गढ़ी कलंजरी में लंपी से दो गोवंश की मौत, 25 से अधिक बीमार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Baghpat News: गढ़ी कलंजरी में लंपी से दो गोवंश की मौत, 25 से अधिक बीमार
विज्ञापन
रटौल। गढ़ी कलंजरी गांव में लंपी बीमारी का प्रकोप जारी है। बृहस्पतिवार को इस बीमारी से दो और गोवंश की मौत हो गई। गांव में फिलहाल 25 से अधिक गोवंश बीमार चल रहे हैं, जिससे पशुपालकों में चिंता है।
पशुपालकों ने पशु चिकित्सकों से गांव में शिविर लगाकर बीमार गोवंशों की जांच करने की मांग की है। उनका कहना है कि समय पर उपचार मिलने से गोवंशों को स्वस्थ रखा जा सकेगा। भाकियू नेता धीरेंद्र कसाना, आशे, बिजेंद्र और नरेश ने बताया कि पांच साल पहले पशुओं के उपचार के लिए एक पशु अस्पताल बनाया गया था। हालांकि इस अस्पताल में आज तक न तो कोई चिकित्सक तैनात किया गया और न ही कोई स्टाफ। नतीजतन, अस्पताल खंडहर में तब्दील हो गया है और पशुपालकों को इसका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। शिकायतें करने के बावजूद अस्पताल में चिकित्सकों की तैनाती नहीं हुई है। लंपी बीमारी के कारण आशे के दो गोवंश की मौत हो चुकी है। इसके अलावा जीतू प्रधान, मनोज, सुरेश, राजू, पोली यादव, लाला, बिन्नू, सतबीर, हरमाया, बिल्लू, रविंद्र, हरबीर और नरेश सहित कई अन्य पशुपालकों के कुल 25 गोवंश बीमार हैं।
गांव में पांच साल पहले पशु अस्पताल का निर्माण पशुपालकों की सुविधा के लिए किया गया था। इसका उद्देश्य बीमार पशुओं को तत्काल उपचार उपलब्ध कराना था। मगर स्टाफ और चिकित्सकों की अनुपस्थिति के कारण यह अस्पताल निष्क्रिय पड़ा है। यह अब खंडहर बन चुका है, जिससे पशुपालकों को परेशानी हो रही है।
विज्ञापन
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. रमेशचंद यादव ने आश्वासन दिया कि जल्द ही चिकित्सकों की एक टीम गांव भेजी जाएगी। यह टीम बीमार गोवंशों की जांच करेगी और आवश्यक उपचार प्रदान करेगी। पशुपालकों को उम्मीद है कि इस कदम से बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सकेगा।
विज्ञापन
पशुपालकों ने पशु चिकित्सकों से गांव में शिविर लगाकर बीमार गोवंशों की जांच करने की मांग की है। उनका कहना है कि समय पर उपचार मिलने से गोवंशों को स्वस्थ रखा जा सकेगा। भाकियू नेता धीरेंद्र कसाना, आशे, बिजेंद्र और नरेश ने बताया कि पांच साल पहले पशुओं के उपचार के लिए एक पशु अस्पताल बनाया गया था। हालांकि इस अस्पताल में आज तक न तो कोई चिकित्सक तैनात किया गया और न ही कोई स्टाफ। नतीजतन, अस्पताल खंडहर में तब्दील हो गया है और पशुपालकों को इसका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। शिकायतें करने के बावजूद अस्पताल में चिकित्सकों की तैनाती नहीं हुई है। लंपी बीमारी के कारण आशे के दो गोवंश की मौत हो चुकी है। इसके अलावा जीतू प्रधान, मनोज, सुरेश, राजू, पोली यादव, लाला, बिन्नू, सतबीर, हरमाया, बिल्लू, रविंद्र, हरबीर और नरेश सहित कई अन्य पशुपालकों के कुल 25 गोवंश बीमार हैं।
विज्ञापन
गांव में पांच साल पहले पशु अस्पताल का निर्माण पशुपालकों की सुविधा के लिए किया गया था। इसका उद्देश्य बीमार पशुओं को तत्काल उपचार उपलब्ध कराना था। मगर स्टाफ और चिकित्सकों की अनुपस्थिति के कारण यह अस्पताल निष्क्रिय पड़ा है। यह अब खंडहर बन चुका है, जिससे पशुपालकों को परेशानी हो रही है।
विज्ञापन
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. रमेशचंद यादव ने आश्वासन दिया कि जल्द ही चिकित्सकों की एक टीम गांव भेजी जाएगी। यह टीम बीमार गोवंशों की जांच करेगी और आवश्यक उपचार प्रदान करेगी। पशुपालकों को उम्मीद है कि इस कदम से बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सकेगा।