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तीर्थंकर का जन्म, चहुुंओर उल्लास
ब्यूरो/ अमर उजाला, बागपत
Updated Tue, 09 Feb 2016 01:00 AM IST
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बागपत में चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे पंचकल्याणक समारोह में सोमवार को तीर्थंकर आदिनाथ के जन्म की क्रियाओं के बाद 1008 कलश से पांडुक शिला पर भगवान का नहवन किया गया। इस दौरान शोभायात्रा भी निकाली गई, जिसमें जैन समाज के लोगों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सेदारी की।
सौधर्म इंद्र पुनीत जैन, कुबेर इंद्र मोहित जैन, यज्ञनायक राजेश जैन, सीमा जैन, मंगल कलश दाता विनीत जैन, पुनीत जैन अपनी इंद्राणियों के साथ हाथी और बग्गियों पर सवार होकर शोभायात्रा में शामिल हुए। शाम को भगवान को पालना झुलाने की क्रियाएं की। श्रद्धालुओं ने भक्ति नृत्य प्रस्तुत किए। जैन मुनि विहर्ष सागर महाराज ने कहा कि जिस समय संसार में अनीति, पापाचरण, धर्म के प्रति ग्लानि बढ़ती है, उस समय तीर्थंकरों का जन्म होता है।
वे इच्छाकु वंश के होते है। भगवान आदिनाथ का बालक के रुप में राजा नामिशय के यहां आलौकिक रुप में जन्म हुआ था। तीर्थंकर बालक का शरीर अति सुंदर और बल-बुद्धि से परिपूर्ण होता है। शरीर में जन्म से 10 अतिशय होते हैं। उसे छू लेने भर से शरीर की व्याधि दूर हो जाती है। पांडुक शिला पर भगवान के अभिषेक के बाद माता ने भगवान को वस्त्र, आभूषण पहनाए। भगवान की बुआ ने काजल लगाया। इसके उपरांत शोभायात्रा अयोध्या नगरी पहुंची, जहां भगवान को पवन जैन और माता इंद्राणी मंजू जैन को सौंपा गया। इस मौके पर इंद्र और इंद्राणियों ने नृत्य किया।
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इससे पूर्व प्रात:काल में गर्भ कल्याणक की पूजा की गई। अयोध्या नगरी को प्रस्थान, शनि इंद्राणी द्वारा ममतामयी बालक को निद्रा में सुलाना, बालक तीर्थकर को सौधर्म इंद्र को सौंपने का मनमोहक ढंग से मंचन किया गया। कलश के लिए लगाई गई बोलियों में प्रथम बोली श्रीयांश, अमित जैन, दूसरी बोली हरिशचंद जैन, सुरेश चंद जैन, पन्ना लाल जैन परिवार की तथा तीसरी बोली आनंद चक्की वाले, कुलभूषण जैन, लवी जैन, प्रवीण जैन, मुकेश जैन, राकेश जैन, देवेंद्र जैन की छूटी। इस अवसर पर पंचकल्याणक समिति के अध्यक्ष संदीप जैन, महामंत्री हंसराज जैन, प्रमोद जैन, पंकज जैन, प्रमोद जैन, अशोक जैन, नंदलाल डोगरा, प्रह्लाद जैन आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।
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सौधर्म इंद्र पुनीत जैन, कुबेर इंद्र मोहित जैन, यज्ञनायक राजेश जैन, सीमा जैन, मंगल कलश दाता विनीत जैन, पुनीत जैन अपनी इंद्राणियों के साथ हाथी और बग्गियों पर सवार होकर शोभायात्रा में शामिल हुए। शाम को भगवान को पालना झुलाने की क्रियाएं की। श्रद्धालुओं ने भक्ति नृत्य प्रस्तुत किए। जैन मुनि विहर्ष सागर महाराज ने कहा कि जिस समय संसार में अनीति, पापाचरण, धर्म के प्रति ग्लानि बढ़ती है, उस समय तीर्थंकरों का जन्म होता है।
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वे इच्छाकु वंश के होते है। भगवान आदिनाथ का बालक के रुप में राजा नामिशय के यहां आलौकिक रुप में जन्म हुआ था। तीर्थंकर बालक का शरीर अति सुंदर और बल-बुद्धि से परिपूर्ण होता है। शरीर में जन्म से 10 अतिशय होते हैं। उसे छू लेने भर से शरीर की व्याधि दूर हो जाती है। पांडुक शिला पर भगवान के अभिषेक के बाद माता ने भगवान को वस्त्र, आभूषण पहनाए। भगवान की बुआ ने काजल लगाया। इसके उपरांत शोभायात्रा अयोध्या नगरी पहुंची, जहां भगवान को पवन जैन और माता इंद्राणी मंजू जैन को सौंपा गया। इस मौके पर इंद्र और इंद्राणियों ने नृत्य किया।
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इससे पूर्व प्रात:काल में गर्भ कल्याणक की पूजा की गई। अयोध्या नगरी को प्रस्थान, शनि इंद्राणी द्वारा ममतामयी बालक को निद्रा में सुलाना, बालक तीर्थकर को सौधर्म इंद्र को सौंपने का मनमोहक ढंग से मंचन किया गया। कलश के लिए लगाई गई बोलियों में प्रथम बोली श्रीयांश, अमित जैन, दूसरी बोली हरिशचंद जैन, सुरेश चंद जैन, पन्ना लाल जैन परिवार की तथा तीसरी बोली आनंद चक्की वाले, कुलभूषण जैन, लवी जैन, प्रवीण जैन, मुकेश जैन, राकेश जैन, देवेंद्र जैन की छूटी। इस अवसर पर पंचकल्याणक समिति के अध्यक्ष संदीप जैन, महामंत्री हंसराज जैन, प्रमोद जैन, पंकज जैन, प्रमोद जैन, अशोक जैन, नंदलाल डोगरा, प्रह्लाद जैन आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।