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Baghpat News: रबी की फसल पर मंडरा रहा पाले का खतरा
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बड़ौत। कड़ाके की सर्दी पड़ने से आलू की खेती करने वाले किसानों के चेहरों पर मायूसी छाने लगी है। क्योंकि रबी की फसल पर पाले का संकट मंडरा रहा है। अगर सर्दी इसी तरह जारी रही तो सरसों सहित सभी फूल वाली फसल में नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
जनपद में आलू की खेती हो रही है। इसके अलावा गेहूं, सरसों सहित अन्य फसलों की खेती भी होती है। लगातार बढ़ रही ठंड से सिर्फ गेहूं की फसल को लाभ हो रहा है। वहीं अक्तूबर माह में बोई गई फसलों में फूल आ गए हैं। हवा और कोहरे से इसमें नुकसान हो सकता है।
मौसम के लगातार उतार चढ़ाव से हर दिन किसानों को चिंता हो रही है। किसान मेहनत से उगाई गई फसल को बर्बाद होने से बचाव के लिए हर प्रयास कर रहे हैं। कोहरे से फसलों का विकास प्रभावित होता है। इससे फसलों को बचाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों से सलाह लेकर किसान दवाओं का प्रयोग करें।
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ऐसे करें फसलों का बचाव
राजकीय बीज भंडार पर तैनात रहे एडीओ कृषि रक्षा अधिकारी नरेश कुमार ने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण ठंडी हवाओं व कोहरे के कारण तापमान में काफी गिरावट दर्ज की गई है। आगामी दिनों में इसके और गिरने की संभावना है। जिससे रबी की फसलों पर पाला पड़ने का खतरा है। इससे बचाव के लिए 400 मिली गंधक को 400 लीटर पानी में घोल बनाकर एक एकड़ में छिड़काव करें। छिड़काव का असर दो सप्ताह तक रहता है। फसलों में उचित नमी बनाये रखें, जिससे दो से पांच डिग्री सेंटीग्रेड तापमान में बढ़ोतरी होती है। आलू में पिछेती झुलसा रोग के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। इसके लिए करजेट एम-8 की 600 ग्राम दवा को 200 लीटर पानी में घोल बनाए एक एकड़ के हिसाब से छिड़काव करें।
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जनपद में आलू की खेती हो रही है। इसके अलावा गेहूं, सरसों सहित अन्य फसलों की खेती भी होती है। लगातार बढ़ रही ठंड से सिर्फ गेहूं की फसल को लाभ हो रहा है। वहीं अक्तूबर माह में बोई गई फसलों में फूल आ गए हैं। हवा और कोहरे से इसमें नुकसान हो सकता है।
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मौसम के लगातार उतार चढ़ाव से हर दिन किसानों को चिंता हो रही है। किसान मेहनत से उगाई गई फसल को बर्बाद होने से बचाव के लिए हर प्रयास कर रहे हैं। कोहरे से फसलों का विकास प्रभावित होता है। इससे फसलों को बचाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों से सलाह लेकर किसान दवाओं का प्रयोग करें।
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ऐसे करें फसलों का बचाव
राजकीय बीज भंडार पर तैनात रहे एडीओ कृषि रक्षा अधिकारी नरेश कुमार ने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण ठंडी हवाओं व कोहरे के कारण तापमान में काफी गिरावट दर्ज की गई है। आगामी दिनों में इसके और गिरने की संभावना है। जिससे रबी की फसलों पर पाला पड़ने का खतरा है। इससे बचाव के लिए 400 मिली गंधक को 400 लीटर पानी में घोल बनाकर एक एकड़ में छिड़काव करें। छिड़काव का असर दो सप्ताह तक रहता है। फसलों में उचित नमी बनाये रखें, जिससे दो से पांच डिग्री सेंटीग्रेड तापमान में बढ़ोतरी होती है। आलू में पिछेती झुलसा रोग के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। इसके लिए करजेट एम-8 की 600 ग्राम दवा को 200 लीटर पानी में घोल बनाए एक एकड़ के हिसाब से छिड़काव करें।