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Baghpat News: प्रसव की नहीं सुविधा, खून जांच को जाना पड़ता है बड़ौत
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कंडेरा गांव में जर्जर हालत में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र: संवाद
अभियान:
- कंडेरा गांव का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की हालत खराब, इमरजेंसी के लिए नहीं रहता कोई चिकित्सक
संवाद न्यूज एजेंसी
रमाला। कंडेरा गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों के लिए सुविधा तक नहीं है। यहां प्रसव की व्यवस्था नहीं होने से महिलाओं को बड़ौत या फिर बागपत जिला अस्पताल में जाना पड़ता है। मरीजों के खून की जांच सप्ताह में दो दिन होने से काफी परेशानी उठानी पड़ती है।
कंडेरा गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से कई गांव जुड़े हुए हैं। यहां रोजाना 70 से अधिक मरीजों की ओपीडी होती है। डॉ. देवराज भारद्वाज मरीजों की जांच कर दवाई देते हैं और फार्मासिस्ट संजीव कुमार पहले पर्ची बनाते हैं फिर मरीजों को दवाई देते हैं। केंद्र पर सफाई व्यवस्था तक नहीं है और भवन भी जर्जर हालत में हो चुका है। दीवारों में जगह-जगह से दरारें आ रही हैं। यहां प्रसव कराने के लिए न तो डॉक्टर है न ही स्टाफ नर्स की तैनाती है। इससे महिला मरीजों को काफी दिक्कत होती है। यदि महिला मरीज को कोई परेशानी होती है तो उन्हें बड़ौत सीएचसी पर भर्ती कराना पड़ता है।
केंद्र पर सप्ताह में दो दिन खून की जांच होती है और पांच दिन मरीजों को जांच के लिए इंतजार करना पड़ता है। इसके चलते उन्हें बीमारी का समय से पता तक नहीं चल पाता है। केंद्र में दो बजे के बाद मरीजों को कोई दवाई नहीं मिलती है और इमरजेंसी तक की सुविधा यहां नहीं है। पीएचसी प्रभारी डॉ. देवराज भारद्वाज ने बताया कि मरीजों की जांच कर दवाई दी जाती है और सप्ताह में दो दिन खून की जांच कराई जाती है।
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- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर खून जांच की सुविधा नहीं होने से मरीजों को परेशानी होती है। जांच कराने के लिए बड़ौत या फिर बागपत जाना पड़ता है। - यामीन
- केंद्र पर इमरजेंसी की सुविधा होनी चाहिए और प्रसव कराने के लिए स्टाफ नर्स की तैनाती करनी चाहिए। स्वास्थ्य विभाग को केंद्र की मरम्मत कराने पर ध्यान देना चाहिए। - सुखपाल
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- कंडेरा गांव का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की हालत खराब, इमरजेंसी के लिए नहीं रहता कोई चिकित्सक
संवाद न्यूज एजेंसी
रमाला। कंडेरा गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों के लिए सुविधा तक नहीं है। यहां प्रसव की व्यवस्था नहीं होने से महिलाओं को बड़ौत या फिर बागपत जिला अस्पताल में जाना पड़ता है। मरीजों के खून की जांच सप्ताह में दो दिन होने से काफी परेशानी उठानी पड़ती है।
कंडेरा गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से कई गांव जुड़े हुए हैं। यहां रोजाना 70 से अधिक मरीजों की ओपीडी होती है। डॉ. देवराज भारद्वाज मरीजों की जांच कर दवाई देते हैं और फार्मासिस्ट संजीव कुमार पहले पर्ची बनाते हैं फिर मरीजों को दवाई देते हैं। केंद्र पर सफाई व्यवस्था तक नहीं है और भवन भी जर्जर हालत में हो चुका है। दीवारों में जगह-जगह से दरारें आ रही हैं। यहां प्रसव कराने के लिए न तो डॉक्टर है न ही स्टाफ नर्स की तैनाती है। इससे महिला मरीजों को काफी दिक्कत होती है। यदि महिला मरीज को कोई परेशानी होती है तो उन्हें बड़ौत सीएचसी पर भर्ती कराना पड़ता है।
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केंद्र पर सप्ताह में दो दिन खून की जांच होती है और पांच दिन मरीजों को जांच के लिए इंतजार करना पड़ता है। इसके चलते उन्हें बीमारी का समय से पता तक नहीं चल पाता है। केंद्र में दो बजे के बाद मरीजों को कोई दवाई नहीं मिलती है और इमरजेंसी तक की सुविधा यहां नहीं है। पीएचसी प्रभारी डॉ. देवराज भारद्वाज ने बताया कि मरीजों की जांच कर दवाई दी जाती है और सप्ताह में दो दिन खून की जांच कराई जाती है।
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- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर खून जांच की सुविधा नहीं होने से मरीजों को परेशानी होती है। जांच कराने के लिए बड़ौत या फिर बागपत जाना पड़ता है। - यामीन
- केंद्र पर इमरजेंसी की सुविधा होनी चाहिए और प्रसव कराने के लिए स्टाफ नर्स की तैनाती करनी चाहिए। स्वास्थ्य विभाग को केंद्र की मरम्मत कराने पर ध्यान देना चाहिए। - सुखपाल