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पड़ताल: लाखों खर्च कर 30 गांवों में बनवाए पुस्तकालय, दो वर्ष बीते पर पुस्तक एक न पहुंची, परिसर बने मयखाना

Mon, 11 Dec 2023 03:17 PM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Mon, 11 Dec 2023 03:17 PM IST
सार

गांवों के छात्र-छात्राओं को पढ़ाई में मदद मिल सके, इसके लिए पुस्तकालय बनवाए गए। मगर लाखों रुपये खर्च करके बने पुस्तकालयों की स्थिति काफी जगह खराब है।

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There are no books in the village library, the premises became a bar.
पुस्तकालयों का हाल - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

गांवों के छात्र-छात्राओं को पढ़ाई में मदद मिल सके, इसके लिए पुस्तकालय बनवाए गए। मगर लाखों रुपये खर्च करके बने पुस्तकालयों की स्थिति काफी जगह खराब है। कहीं पुस्तकालय में कई साल बाद भी किताबें या पढ़ाई के लिए अन्य सामग्री नहीं है तो किसी जगह पुस्तकालय परिसर को मयखाना बना दिया गया है। करीब 30 गांवों में बनवाए गए पुस्तकालयों में अधिकतर जगह छात्र-छात्राओं को इसका लाभ नहीं मिल रहा है।

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सिसाना में दो साल में एक भी किताब नहीं आई
सिसाना गांव में करीब दो साल पहले पुस्तकालय बनाया गया था। पुस्तकालय में शीशे वाली अलमारी किताबों को रखने के लिए बनवाई गई तो कुर्सी व मेज भी काफी अच्छी रखवाई गई। लेकिन जिन किताबों की सबसे ज्यादा जरूरत थी, वह किताबें आज तक पुस्तकालय में नहीं पहुंची है। स्थिति यह है कि पुस्तकालयों की अलमारी के साथ कुर्सी-मेज पर भी धूल जमी है। प्रधान शालू कहती है कि यह पुस्तकालय उनसे पहले बनवाया गया था, इस बारे में उनको इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है।

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डौलचा में पुस्तकालय बंद, परिसर बना मयखाना
डौलचा गांव में कई साल पहले लाखों रुपये खर्च करके पुस्तकालय बनवाया गया था लेकिन यहां भी किताबों के नाम पर कुछ नहीं है। पुस्तकालय पर ताला लटका रहता है और छात्र-छात्राओं को उसका फायदा नहीं मिल रहा है। पुस्तकालय परिसर को शराबियों ने मयखाना बना दिया है। परिसर में शराब की खाली बोतल व पाउच के अलावा खाली गिलास पड़े रहते हैं। इसपर ध्यान देने वाला कोई नहीं है।

टटीरी में किताबें कम, सामने शराब का ठेका
टटीरी में पुस्तकालय में कुछ किताबें जरूर रखी है, लेकिन कुछ विषयों की किताबें नहीं है। इससे छात्र-छात्राओं को परेशानी होती है। इसके अलावा पुस्तकालय के सामने ही शराब का ठेका है और वहां शाम को शराब लेने वालों की लाइन लगी रहती है। कई लोग तो सड़क पर ही पुस्तकालय के सामने ही खड़े होकर शराब पीते हैं। इससे भी वहां आने वालों को परेशानी उठानी पड़ती है।

पुस्तकालय बनाए हुए काफी समय हो गया है, लेकिन अभी तक किताबें नहीं रखी गई है। वहां सफाई तक नहीं की जाती है, जिससे कोई अपनी किताब ले जाकर वहां बैठकर पढ़ सके। जिससे इस पुस्तकालय का किसी को कोई फायदा नहीं मिल रहा है। यहां किताबें रखी जाए तो छात्र-छात्राओं को फायदा हो सकता है। - सतेंद्र जैन, सिसाना

पुस्तकालय में कुछ किताबें है, लेकिन जिनकी जरूरत है, वह किताबें नहीं मिल रही है। सामने शराब का ठेका है, जिससे परेशानी ज्यादा होती है। क्योंकि शराब लेने के बाद वह यहां खड़े होकर पीते है। राहुल, अग्रवाल मंडी टटीरी 
 
यहां काफी गांवों में पंचायत ने अपने बजट से पुस्तकालय बनवाए गए थे। जिन जगहों पर किताब नहीं है, वहां ग्राम पंचायत के बजट से किताबों की व्यवस्था कराई जाएगी। इसके लिए सभी गांवों में पुस्तकालयों की जांच कराई जाएगी। इसके अलावा गांव के लोगों से सहयोग लिया जाएगा। -अमित त्यागी, डीपीआरओ

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