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जंग-ए-आजादी की गवाह बावली गांव की बनी
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बड़ौत के बावली गांव में खड़ी बणी का दृश्य।
- फोटो : BARAUT
करीब 200 बीघे में फैली बनी (जंगल) में बनाई जाती थी अंग्रेजों के खिलाफ रणनीति
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। जंग-ए-आजादी में बागपत जनपद का गौरवशाली इतिहास रहा है। यहां के वीर बहादुरों ने अपने प्राणों की आहुतियां देकर अंग्रेजों को देश छोड़ने पर मजबूर किया। आजादी की लड़ाई के वक्त देश की जनता अंग्रेजों की हरकतों से परेशान थी। उस समय बावली गांव मेें 200 बीघे में फैली बनी (जंगल) में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई की रणनीति बनाई जाती थी। आज भी बावली गांव के ग्रामीण उस किस्से को युवाओं को सुनाते है और देश के लिए कुछ कर गुजरने की बात कहते है।
भूतपूर्व सैनिक सेवा समिति के जिलाध्यक्ष मेजर शीशपाल सिंह बताते है कि अंग्रेजों ने देश की जनता पर कहर बरपा रखा था। हर कोई अंग्रेजी हुकूमत से दुखी व परेशान था। सब चाहते थे कि इस अंग्रेजी शासन काल से निजात मिले। बावली गांव में अंग्रेजों से निपटने के लिए गांव के बाहर गोपी वाली बनी (जंगल), जो करीबन 200 बीघे में फैली हुई थी, उसमें आसपास क्षेत्र के गांवों के लोग रात के समय एकत्रित होते थे और अंग्रेजों से निपटने के लिए योजनाएं बनाते थे। योजना बनते ही अंग्रेजों को कई बार मुंहतोड़ जवाब दिया गया। बताया कि इस लड़ाई में बिजरौल गांव के बाबा शाहमल का भी अहम योगदान रहा था।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। जंग-ए-आजादी में बागपत जनपद का गौरवशाली इतिहास रहा है। यहां के वीर बहादुरों ने अपने प्राणों की आहुतियां देकर अंग्रेजों को देश छोड़ने पर मजबूर किया। आजादी की लड़ाई के वक्त देश की जनता अंग्रेजों की हरकतों से परेशान थी। उस समय बावली गांव मेें 200 बीघे में फैली बनी (जंगल) में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई की रणनीति बनाई जाती थी। आज भी बावली गांव के ग्रामीण उस किस्से को युवाओं को सुनाते है और देश के लिए कुछ कर गुजरने की बात कहते है।
भूतपूर्व सैनिक सेवा समिति के जिलाध्यक्ष मेजर शीशपाल सिंह बताते है कि अंग्रेजों ने देश की जनता पर कहर बरपा रखा था। हर कोई अंग्रेजी हुकूमत से दुखी व परेशान था। सब चाहते थे कि इस अंग्रेजी शासन काल से निजात मिले। बावली गांव में अंग्रेजों से निपटने के लिए गांव के बाहर गोपी वाली बनी (जंगल), जो करीबन 200 बीघे में फैली हुई थी, उसमें आसपास क्षेत्र के गांवों के लोग रात के समय एकत्रित होते थे और अंग्रेजों से निपटने के लिए योजनाएं बनाते थे। योजना बनते ही अंग्रेजों को कई बार मुंहतोड़ जवाब दिया गया। बताया कि इस लड़ाई में बिजरौल गांव के बाबा शाहमल का भी अहम योगदान रहा था।
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