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फोटो ठीक करने में कर दिया खेल, परीक्षा केंद्र की भी रही लारपवाही
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बागपत। जनता वैदिक इंटर कॉलेज में पकड़े गए दो मुन्ना भाइयों के मामले में पंजीकृत छात्रों के चेतना इंटर कॉलेज से लेकर परीक्षा केंद्र जनता वैदिक इंटर कॉलेज तक लापरवाही ही लापरवाही सामने आई है। खेल शुरू हुआ माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से प्रवेश पत्र की त्रुटियों को ठीक कराने के लिए कॉलेज को भेजे गए डाटा से। इसमें पंजीकृत छात्रों के फोटो धुंधले थे। इसका फायदा उठाकर मुन्ना भाइयों के फोटो अपलोड करा दिए गए। परीक्षा केंद्र में भी परिषद की ओर से भेजी गई चेकलिस्ट से भी मिलान नहीं किया गया। फिलहाल पुलिस ने गागलनौली गांव के प्रदीप को इस खेल का मास्टरमाइंड बताकर जेल भेज दिया है। परीक्ष देने वाले छात्र भी जेल की सलाखों के पीछे भेजे जा चुके है और अन्य की जांच जारी है।
माध्यमिक शिक्षा परिषद ने नकल रोकने के लिए छात्रों के स्पष्ट फोटो वेबसाइट पर अपलोड करने के निर्देश दिए थे। जिलेऔर इंटरमीडिएट के 57 के हाईस्कूल के सौ छात्र-छात्राओं के फोटो में गड़बड़ी मिली थी। जिस पर परिषद ने केंद्र व्यवस्थापकों को छात्रों के स्पष्ट फोटो अपलोड करने के निर्देश दिए थे। आरोपियों ने परिषद के इसी आदेश को आधार बनाकर प्रवेश पत्र पर फोटो बदलकर खेल कर दिया। चेतना इंटर कॉलेज की ओर से जनता वैदिक इंटर कॉलेज को पत्र भेजकर अवगत कराया था कि त्रुटिवश दो छात्रों अर्पित तोमर व युगांधर चौधरी के फोटो उनके परीक्षा फार्म में गलत अपलोड हो गए है। इसकी संस्तुति बोर्ड को भी भेज दी गई है। साथ ही सचिन और अंकित निवासीगण गांगनौली के फोटो भी भेजे गए थे। इसके बाद प्रवेश पत्रों पर फर्जी फोटो चस्पा कर फर्जी प्रवेश पत्र जारी कर दिए। कॉलेज की संस्तुति होने के बाद परीक्षा केंद्र की ओर से भी छानबीन नहीं की गई। केंद्र की ओर से जांच पड़ताल न होने के कारण ही दोनों मुन्ना भाई बिना रोक-टोक परीक्षा देते रहे।
अब मामले का खुलासा होेने पर पुलिस ने प्रदीप कुमार पुत्र विक्रम निवासी गांगनौली हाल देवनगर, बड़ौत को इस खेल का मास्टरमाइंड बताकर जेल भेज दिया है। सीओ युवराज सिंह ने बताया कि प्रदीप ही इस फर्जीवाडे़ का मास्टर माइंड हैै। उसने ही अंकित व सचिन को फर्जी परीक्षा प्रवेश पत्र उपलब्ध कराए थे। अंकित व सचिन और मास्टर माइंड प्रदीप के खिलाफ धारा 419, 420, 468 व 471 की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। तीनों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है। अन्य की गिरफ्तारी जांच रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी। फिलहाल आरोपी छात्र अर्पित व युगांधर भी फरार चल रहे है, जिन्हें पुलिस पकड़ने का प्रयास कर रही है।
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केंद्र पर जारी की जाती है चेकलिस्ट
यूपी बोर्ड परीक्षा में परीक्षा केंद्रों पर छात्रों का आवंटन, कक्ष निरीक्षक व कर्मचारियों की नियुक्ति माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से की जाती है। परीक्षा के दौरान कक्ष निरीक्षकों के आईकार्ड के साथ-साथ परीक्षार्थियों की एक चेकलिस्ट भी जारी की जाती है। इस चेकलिस्ट में परीक्षार्थी का फोटो और पंजीकरण के दौरान उसके द्वारा किए गए हस्ताक्षर होते है। परीक्षा केंद्रों पर छात्र के प्रवेश पत्र के फोटो और हस्ताक्षर का मिलान इसी चेकलिस्ट से कराया जाता है।
पूर्व में छात्रों के फोटो में गड़बड़ी मिलने पर बोर्ड की ओर से ठीक की जाती थी, मगर इस बार बोर्ड ने संस्था के प्रधानाचार्य की संस्तुति पर ही छात्रों को परीक्षा दिलवाने के निर्देश दिए थे। फर्जी छात्र पकड़े जाने में परीक्षा केंद्र की भी लापरवाही रही। परीक्षा केंद्र व्यवस्थापक को इस बात की जांच पड़ताल करानी चाहिए थी कि प्रवेश पत्र पर चस्पा किए गए फोटो सहीं छात्रों के है या नहीं। - रवींद्र सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक ।
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माध्यमिक शिक्षा परिषद ने नकल रोकने के लिए छात्रों के स्पष्ट फोटो वेबसाइट पर अपलोड करने के निर्देश दिए थे। जिलेऔर इंटरमीडिएट के 57 के हाईस्कूल के सौ छात्र-छात्राओं के फोटो में गड़बड़ी मिली थी। जिस पर परिषद ने केंद्र व्यवस्थापकों को छात्रों के स्पष्ट फोटो अपलोड करने के निर्देश दिए थे। आरोपियों ने परिषद के इसी आदेश को आधार बनाकर प्रवेश पत्र पर फोटो बदलकर खेल कर दिया। चेतना इंटर कॉलेज की ओर से जनता वैदिक इंटर कॉलेज को पत्र भेजकर अवगत कराया था कि त्रुटिवश दो छात्रों अर्पित तोमर व युगांधर चौधरी के फोटो उनके परीक्षा फार्म में गलत अपलोड हो गए है। इसकी संस्तुति बोर्ड को भी भेज दी गई है। साथ ही सचिन और अंकित निवासीगण गांगनौली के फोटो भी भेजे गए थे। इसके बाद प्रवेश पत्रों पर फर्जी फोटो चस्पा कर फर्जी प्रवेश पत्र जारी कर दिए। कॉलेज की संस्तुति होने के बाद परीक्षा केंद्र की ओर से भी छानबीन नहीं की गई। केंद्र की ओर से जांच पड़ताल न होने के कारण ही दोनों मुन्ना भाई बिना रोक-टोक परीक्षा देते रहे।
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अब मामले का खुलासा होेने पर पुलिस ने प्रदीप कुमार पुत्र विक्रम निवासी गांगनौली हाल देवनगर, बड़ौत को इस खेल का मास्टरमाइंड बताकर जेल भेज दिया है। सीओ युवराज सिंह ने बताया कि प्रदीप ही इस फर्जीवाडे़ का मास्टर माइंड हैै। उसने ही अंकित व सचिन को फर्जी परीक्षा प्रवेश पत्र उपलब्ध कराए थे। अंकित व सचिन और मास्टर माइंड प्रदीप के खिलाफ धारा 419, 420, 468 व 471 की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। तीनों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है। अन्य की गिरफ्तारी जांच रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी। फिलहाल आरोपी छात्र अर्पित व युगांधर भी फरार चल रहे है, जिन्हें पुलिस पकड़ने का प्रयास कर रही है।
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केंद्र पर जारी की जाती है चेकलिस्ट
यूपी बोर्ड परीक्षा में परीक्षा केंद्रों पर छात्रों का आवंटन, कक्ष निरीक्षक व कर्मचारियों की नियुक्ति माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से की जाती है। परीक्षा के दौरान कक्ष निरीक्षकों के आईकार्ड के साथ-साथ परीक्षार्थियों की एक चेकलिस्ट भी जारी की जाती है। इस चेकलिस्ट में परीक्षार्थी का फोटो और पंजीकरण के दौरान उसके द्वारा किए गए हस्ताक्षर होते है। परीक्षा केंद्रों पर छात्र के प्रवेश पत्र के फोटो और हस्ताक्षर का मिलान इसी चेकलिस्ट से कराया जाता है।
पूर्व में छात्रों के फोटो में गड़बड़ी मिलने पर बोर्ड की ओर से ठीक की जाती थी, मगर इस बार बोर्ड ने संस्था के प्रधानाचार्य की संस्तुति पर ही छात्रों को परीक्षा दिलवाने के निर्देश दिए थे। फर्जी छात्र पकड़े जाने में परीक्षा केंद्र की भी लापरवाही रही। परीक्षा केंद्र व्यवस्थापक को इस बात की जांच पड़ताल करानी चाहिए थी कि प्रवेश पत्र पर चस्पा किए गए फोटो सहीं छात्रों के है या नहीं। - रवींद्र सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक ।