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भविष्य के लिए सही फैसला लेकर आत्मनिर्भर बनें बेटियां: डीएम
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प्लीज सर एक सेल्फी हमारे साथ भी:बड़ौत के जैन स्थानकवासी गर्ल्स डिग्री कॉलेज में अमर उजाला की ओर स?
- फोटो : BAGHPAT
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बड़ौत। जैन स्थानकवासी गर्ल्स डिग्री कॉलेज में बुधवार को अमर उजाला अपराजिता कार्यक्रम आयोजित किया। मुख्य अतिथि डीएम राजकमल यादव ने कहा कि खुद की इच्छाशक्ति से ही बेटियां मजबूत होंगी। शिक्षित और आत्मनिर्भर बनना है, बेटियां तरक्की करेंगी तो उनका परिवार और समाज तरक्की करेगा।
अपराजिता कार्यक्रम का डीएम राजकमल यादव, संस्था के सचिव डॉ. अमित राय जैन व प्राचार्य डॉ. अनीता जैन ने मां सरस्वती के समक्ष दीप जलाकर शुभारंभ किया। डीएम ने कहा कि बेटियों को किसी भी स्तर पर घबराने की जरूरत नहीं है। आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाएं, ताकि वह परिवार की जिम्मेदारी भी संभालने में पीछे न रह सके। भविष्य के प्रति भी सोचे और आत्मनिर्भर बनें, बेटियां स्वयं को किसी से कमजोर न समझे।
डीएम ने छात्राओं के सवालों के जवाब भी दिए और उनको अपने कॉलेज व सिविल सर्विस की तैयारियों से जुड़े अनुभवों के बारे में बताया। संचालन डॉ. वंदना जैन ने किया। मौके पर डॉ. वंदना शर्मा, डॉ. रूमा, मेघा, लक्ष्मी, अनुराधा, पूजा, राजेश जैन, अक्षित मौजूद रहे।
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बेटियां सोच में परिवर्तन लाकर आगे बढ़ें
संस्था सचिव व इतिहासकार डॉ. अमित राय जैन ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से बेटियां अपनी सोच में परिवर्तन लाएं। क्योंकि पढ़ाई का लाभ तभी है, जब वह आत्मनिर्भर बनें। बेटियां आत्मनिर्भर बनेंगी तो समाज को एक नई दिशा मिलेगी। अब बदलाव हो रहा है, लेकिन यह बदलाव बड़े स्तर पर करने की जरूरत है।
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जीवन में कभी परेशान नहीं होना चाहिए
प्राचार्य डॉ. अनीता जैन ने कहा कि हमें जीवन में कभी परेशान नहीं होना चाहिए। बल्कि अपने अधिकारों को जानकर उस समस्या का सामना करना चाहिए। अपने बड़ों व गुरुजनों का सम्मान करना चाहिए। वे बच्चे की खुशी की बजाए, उनका हित देखते हैं। क्योंकि खुशी तो क्षणिक होती है और हित जीवन भर साथ रहता है।
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डीएम ने दिए छात्राओं के सवालों के जवाब
सवाल : आखिर बेटियों को समाज में कमतर क्यों आंका जाता है। - छात्रा शिफा मलिक
जवाब : यदि कोई बेटियों को कमतर आंक रहा है तो उसके सामने खुद को सफल बनाकर जाएं। समाज की सोच खुद ही बदल जाएगी।
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सवाल : किसी प्रदर्शनी में छात्रों द्वारा बनाए गए पोस्टर में उनका भाव क्यों नहीं देखा जाता, आकर्षित प्रदर्शनी को ही सर्वश्रेष्ठ चुन लिया जाता है, ऐसा क्यों। - छात्रा मनु जांगिड़
जवाब : इसके लिए निर्णायक मंडल होता है जो तय करता है कि यह प्रदर्शनी या पोस्टर अच्छा है। कई बार भावनात्मक रूप से बनाई गई प्रदर्शनी की भी सराहना की जाती है, मन कमजोर नहीं करना चाहिए।
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सवाल : कॅरिअर के लिए निर्णय कैसे लिया जाए। - छात्रा अंजलि
जवाब : सबसे पहले अपनी रुचियों को एक कागज पर लिखें। फिर उसका आकलन करें कि आपको अपनी रुचि से कितना लगाव है। इसके बाद निर्णय लें।
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सवाल : जरूरत और इच्छाओं में किसे चुनना चाहिए। - छात्रा शिवानी
जवाब : हमेशा इच्छाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए।
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सवाल : मेहनत का क्या कोई मूलमंत्र है। - छात्रा अनन्या जैन
जवाब : लक्ष्य बनाकर कड़ी मेहनत करें, किसी के ताने से दुखी व परेशान न हो, लक्ष्य पर ध्यान रखें।
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सवाल : जातिवाद बहुत हावी है, यह कैसे खत्म होगा। - छात्रा सृष्टि जैन
जवाब : शिक्षा और आपसी प्रेम-भावना से ही समाज से जातिवाद का अभिशाप समाप्त होगा।
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सवाल : यदि कोई आपका मनोबल तोड़ दे तो क्या करें। - छात्रा अंतिका
जवाब : ऐसे बहुत से लोग आपको मिलेगें जो समय-समय पर आपका मनोबल तोड़ेंगे। इसलिए जीवन में ऐसे दोस्त या परिवार वाले भी होने चाहिए जो आपके अंदर आत्मविश्वास बढ़ाएं।
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सवाल : सफलता के लिए कितने घंटे पढ़ाई करनी चाहिए। - छात्रा समीक्षा
जवाब : आप पांच घंटे पढ़कर भी शून्य रह सकते हो। तो एक घंटा पढ़कर भी सफलता प्राप्त कर सकते हो। फर्क यह है कि पढ़ते समय ध्यान केंद्रित है या नहीं।
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सवाल : किसी लक्ष्य को तय करके मेहनत करने के बाद भी कोई आपको ताने दें तो उस स्थिति में क्या किया जाए। - छात्रा सृष्टि भारद्वाज
जवाब: आपको मनोबल तोडने वाले काफी लोग मिलेंगे। लेकिन यह आपको तय करना है कि किन बेहतर बातों को दिल व दिमाग में रखना है और किसे कान से बाहर निकालना है।
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अपराजिता कार्यक्रम का डीएम राजकमल यादव, संस्था के सचिव डॉ. अमित राय जैन व प्राचार्य डॉ. अनीता जैन ने मां सरस्वती के समक्ष दीप जलाकर शुभारंभ किया। डीएम ने कहा कि बेटियों को किसी भी स्तर पर घबराने की जरूरत नहीं है। आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाएं, ताकि वह परिवार की जिम्मेदारी भी संभालने में पीछे न रह सके। भविष्य के प्रति भी सोचे और आत्मनिर्भर बनें, बेटियां स्वयं को किसी से कमजोर न समझे।
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डीएम ने छात्राओं के सवालों के जवाब भी दिए और उनको अपने कॉलेज व सिविल सर्विस की तैयारियों से जुड़े अनुभवों के बारे में बताया। संचालन डॉ. वंदना जैन ने किया। मौके पर डॉ. वंदना शर्मा, डॉ. रूमा, मेघा, लक्ष्मी, अनुराधा, पूजा, राजेश जैन, अक्षित मौजूद रहे।
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बेटियां सोच में परिवर्तन लाकर आगे बढ़ें
संस्था सचिव व इतिहासकार डॉ. अमित राय जैन ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से बेटियां अपनी सोच में परिवर्तन लाएं। क्योंकि पढ़ाई का लाभ तभी है, जब वह आत्मनिर्भर बनें। बेटियां आत्मनिर्भर बनेंगी तो समाज को एक नई दिशा मिलेगी। अब बदलाव हो रहा है, लेकिन यह बदलाव बड़े स्तर पर करने की जरूरत है।
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जीवन में कभी परेशान नहीं होना चाहिए
प्राचार्य डॉ. अनीता जैन ने कहा कि हमें जीवन में कभी परेशान नहीं होना चाहिए। बल्कि अपने अधिकारों को जानकर उस समस्या का सामना करना चाहिए। अपने बड़ों व गुरुजनों का सम्मान करना चाहिए। वे बच्चे की खुशी की बजाए, उनका हित देखते हैं। क्योंकि खुशी तो क्षणिक होती है और हित जीवन भर साथ रहता है।
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डीएम ने दिए छात्राओं के सवालों के जवाब
सवाल : आखिर बेटियों को समाज में कमतर क्यों आंका जाता है। - छात्रा शिफा मलिक
जवाब : यदि कोई बेटियों को कमतर आंक रहा है तो उसके सामने खुद को सफल बनाकर जाएं। समाज की सोच खुद ही बदल जाएगी।
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सवाल : किसी प्रदर्शनी में छात्रों द्वारा बनाए गए पोस्टर में उनका भाव क्यों नहीं देखा जाता, आकर्षित प्रदर्शनी को ही सर्वश्रेष्ठ चुन लिया जाता है, ऐसा क्यों। - छात्रा मनु जांगिड़
जवाब : इसके लिए निर्णायक मंडल होता है जो तय करता है कि यह प्रदर्शनी या पोस्टर अच्छा है। कई बार भावनात्मक रूप से बनाई गई प्रदर्शनी की भी सराहना की जाती है, मन कमजोर नहीं करना चाहिए।
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सवाल : कॅरिअर के लिए निर्णय कैसे लिया जाए। - छात्रा अंजलि
जवाब : सबसे पहले अपनी रुचियों को एक कागज पर लिखें। फिर उसका आकलन करें कि आपको अपनी रुचि से कितना लगाव है। इसके बाद निर्णय लें।
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सवाल : जरूरत और इच्छाओं में किसे चुनना चाहिए। - छात्रा शिवानी
जवाब : हमेशा इच्छाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए।
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सवाल : मेहनत का क्या कोई मूलमंत्र है। - छात्रा अनन्या जैन
जवाब : लक्ष्य बनाकर कड़ी मेहनत करें, किसी के ताने से दुखी व परेशान न हो, लक्ष्य पर ध्यान रखें।
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सवाल : जातिवाद बहुत हावी है, यह कैसे खत्म होगा। - छात्रा सृष्टि जैन
जवाब : शिक्षा और आपसी प्रेम-भावना से ही समाज से जातिवाद का अभिशाप समाप्त होगा।
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सवाल : यदि कोई आपका मनोबल तोड़ दे तो क्या करें। - छात्रा अंतिका
जवाब : ऐसे बहुत से लोग आपको मिलेगें जो समय-समय पर आपका मनोबल तोड़ेंगे। इसलिए जीवन में ऐसे दोस्त या परिवार वाले भी होने चाहिए जो आपके अंदर आत्मविश्वास बढ़ाएं।
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सवाल : सफलता के लिए कितने घंटे पढ़ाई करनी चाहिए। - छात्रा समीक्षा
जवाब : आप पांच घंटे पढ़कर भी शून्य रह सकते हो। तो एक घंटा पढ़कर भी सफलता प्राप्त कर सकते हो। फर्क यह है कि पढ़ते समय ध्यान केंद्रित है या नहीं।
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सवाल : किसी लक्ष्य को तय करके मेहनत करने के बाद भी कोई आपको ताने दें तो उस स्थिति में क्या किया जाए। - छात्रा सृष्टि भारद्वाज
जवाब: आपको मनोबल तोडने वाले काफी लोग मिलेंगे। लेकिन यह आपको तय करना है कि किन बेहतर बातों को दिल व दिमाग में रखना है और किसे कान से बाहर निकालना है।

बड़ौत के जैन स्थानकवासी गर्ल्स डिग्री कॉलेज में अमर उजाला की ओर से आयोजित कार्यक्रम अपराजिता मे?- फोटो : BAGHPAT

बड़ौत के जैन स्थानकवासी गर्ल्स डिग्री कॉलेज में अमर उजाला की ओर से आयोजित कार्यक्रम अपराजिता मे?- फोटो : BAGHPAT