फरीद का हत्यारोपी बर्खास्त सिपाही जेल भेजा
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शहर के देवी चौक निवासी फरीद की 27 अप्रैल की रात यमुना रोड पर गोली लगने से मौत हो गई थी। उसके पिता रियाज ने दो कांस्टेबल रघुवीर और जितेंद्र, भाकियू नेता चमन सिंह के बेटे (सोनू व मोनू) तथा हितेष पर फरीद की हत्या करने का आरोप लगाते हुए कोतवाली पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसको लेकर शहर में भारी हंगामा हुआ था। पुलिस को लाठीचार्ज तक करना पड़ गया था। इस मामले में फरार चल रहे आरोपी बर्खास्त सिपाही रघुवीर को पुलिस ने शहर के एसपीआरसी डिग्री कॉलेज के पास से बृहस्पतिवार शाम करीब चार बजे गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने उससे लंबी पूछताछ की। शुक्रवार को आरोपी जेल चला गया।
कोतवाली प्रभारी मुकेश कुमार का कहना है कि पकड़े गए बर्खास्त सिपाही रघुवीर के पास से सरकारी पिस्टल और 28 कारतूस बरामद हुए हैं। उनका कहना है कि दो कारतूस के खोखे रघुवीर के कमरे के पास से बरामद हुए थे। वहां से मिले खोखे और रघुवीर के पास से बरामद हुई पिस्टल को जांच के लिए आगरा लैब में भेजा जाएगा। उसी से स्पष्ट होगा कि इसी पिस्टल से चली गोली के ये खोखे हैं या नहीं। केस की विवेचना चल रही है।
रफीक की गिरफ्तारी के लिए दबिश जारी
बागपत। बर्खास्त सिपाही रघुवीर के घर पर भीड़ लेकर हमला करने गए युवक रफीक की गिरफ्तारी और उसके साथियों का पुलिस ने पता लगाना शुरू कर दिया है। पुलिस सूत्रों की माने तो पुलिस की जांच में कई नाम सामने भी आ गए हैं। पुलिस गोपनीय रूप से उनकी जांच-पड़ताल कर ही है। बताया जा रहा है कि हमले में शामिल रहे कई लोगों ने तो अपना घर तक छोड़ दिया है। कुछ लोग सिफारिशों के प्रयास में जुट गए हैं। कोतवाली प्रभारी मुकेश कुमार का कहना है कि रफीक की गिरफ्तारी के लिए संभावित स्थानों पर दबिश दी जा रही है। साथ ही उसके साथियों का पता लगाने का प्रयास किए जा रहा है।
आखिर कहां गए दो कारतूस?
बागपत। गाजियाबाद के आकाश नगर निवासी नरवीर सिंह ने मानवाधिकार आयोग को भेजे पत्र में बताया कि बागपत क्राइम ब्रांच की स्वाट टीम में तैनात उसका भाई रघुवीर 27 अप्रैल की शाम शहर में अपने कमरे में मौजूद था। इसी दौरान उसके (रघुवीर) साथी हितेश ने फोन पर बताया कि तुम्हारे साथी सिपाही जितेंद्र के साथ मारपीट हो गई है। जानकारी मिलने पर वह मौके पर पहुंचा उसने दोनों पक्षों को समझा बुझाकर शांत करा दिया था। भाई रघुवीर और जितेंद्र वापस अपने कमरे पर चले गए थे। उसी रात लगभग नौ बजे रफीक और उसके अन्य साथी लाठी डंडे, हथियार लेकर रघुवीर के कमरे पर पहुंचे। कुछ लड़कों ने कमरे के अंदर ही घुसकर रघुवीर के साथ मारपीट की।
इसी दौरान बाहर खड़ी भीड़ में अचानक फायर की आवाज हुई और लोग भाग खड़े हुए। रघुवीर अपनी जान बचाकर वहां से बच निकला। इसी दौरान पता चला की फरीद नाम का युवक जो उग्र भीड़ के साथ आया था, उसकी मौत हो गई है। फरीद के परिजनों ने उसके भाई रघुवीर के खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया था। पांच मई को वह अपने भाई रघुवीर को लेकर बागपत पहुंचा और पुलिस को सौंप दिया।
मेरे भाई ने मेरे सामने अपनी सरकारी पिस्टल, मैगजीन और 30 कारतूस पुलिस को सौंप दिए थे, लेकिन शुक्रवार को बागपत पुलिस मेरे भाई से 28 कारतूस बरामद होना दर्शाकर कागज पर हस्ताक्षर कराने का दबाव बना रही है। मुझे आशंका है कि मेरे भाई रघुवीर को पुलिस फरीद की हत्या के केस में झूठा फंसाना चाहती है। उधर, कोतवाली प्रभारी मुकेश कुमार का कहना है कि आरोपी सिपाही से सरकारी पिस्टल और 28 कारतूस बरामद हुए है। पुलिस पर लगाए गए आरोप गलत है।