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श्रद्धालुओं को शिव और सती का प्रसंग सुनाया
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श्रद्धालुओं को शिव और सती का प्रसंग सुनाया
खेकड़ा। गांव डूंडाहैडा स्थित श्री बालाजी धाम में चल रही श्रीराम कथा के तीसरे दिन सोमवार को शिव और सती का प्रसंग सुनाया गया। महामंडलेश्वर भैया दास महाराज की धर्म बेटी बाल साध्वी राधा देवी ने कहा कि भोले बाबा ने जनकल्याण के लिए जहर का प्याला भी पी लिया था। इससे सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए। यदि जनकल्याण, समाज की भलाई के लिए जहर भी पीना पडे़ तो उसके लिए भी तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि सती ने अपने शरीर को त्याग दिया और बाद में हिमाचल के यहां पार्वती के रूप में जन्म लिया। देव ऋषि नारद के कहने पर वह वन के अंदर जाकर घोर तप करने लगीं।
साध्वी ने कहा कि शंकर जी ने सती के वियोग में वैराग्य धारण कर लिया। श्रीराम जी के समझाने पर शंकर जी समाधि में बैठ गए। उधर, तारकासुर के आतंक से देव लोक में हाहाकार मच गया। सब देवता इकट्ठे होकर भगवान विष्णु के पास गए। भगवान विष्णु ने कहा कि शिव और पार्वती का अगर विवाह हो जाए और उनसे जो पुत्र जन्म लेगा, वही तारकासुर का वध कर सकता है। देवताओं के कल्याण के लिए शिव पार्वती ने विवाह किया। उनसे कार्तिकेय नाम के पुत्र ने जन्म लिया। और उसने तारकासुर का वध किया। कहने का तात्पर्य यह है कि परमपिता परमात्मा जनकल्याण के लिए परमारथ के लिए पृथ्वी पर शरीर धारण करते हैं। और अपने भक्तों का उद्धार करते हैं। कथा में काफी संख्या में श्रद्धालु शामिल रहे।
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खेकड़ा। गांव डूंडाहैडा स्थित श्री बालाजी धाम में चल रही श्रीराम कथा के तीसरे दिन सोमवार को शिव और सती का प्रसंग सुनाया गया। महामंडलेश्वर भैया दास महाराज की धर्म बेटी बाल साध्वी राधा देवी ने कहा कि भोले बाबा ने जनकल्याण के लिए जहर का प्याला भी पी लिया था। इससे सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए। यदि जनकल्याण, समाज की भलाई के लिए जहर भी पीना पडे़ तो उसके लिए भी तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि सती ने अपने शरीर को त्याग दिया और बाद में हिमाचल के यहां पार्वती के रूप में जन्म लिया। देव ऋषि नारद के कहने पर वह वन के अंदर जाकर घोर तप करने लगीं।
साध्वी ने कहा कि शंकर जी ने सती के वियोग में वैराग्य धारण कर लिया। श्रीराम जी के समझाने पर शंकर जी समाधि में बैठ गए। उधर, तारकासुर के आतंक से देव लोक में हाहाकार मच गया। सब देवता इकट्ठे होकर भगवान विष्णु के पास गए। भगवान विष्णु ने कहा कि शिव और पार्वती का अगर विवाह हो जाए और उनसे जो पुत्र जन्म लेगा, वही तारकासुर का वध कर सकता है। देवताओं के कल्याण के लिए शिव पार्वती ने विवाह किया। उनसे कार्तिकेय नाम के पुत्र ने जन्म लिया। और उसने तारकासुर का वध किया। कहने का तात्पर्य यह है कि परमपिता परमात्मा जनकल्याण के लिए परमारथ के लिए पृथ्वी पर शरीर धारण करते हैं। और अपने भक्तों का उद्धार करते हैं। कथा में काफी संख्या में श्रद्धालु शामिल रहे।
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