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सिपाही पर जानलेवा हमले में सात साल की सजा
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बागपत। दोघट थाना क्षेत्र के बरनावा मार्ग पर नौ साल पहले सिपाही पर जानलेवा हमले के मामले में कोर्ट ने मुलसम गांव निवासी राजीव को सात साल की सजा सुनाई है। एडीजे स्पेशल एससी/एसटी आबिद शमीम ने बुधवार को इस प्रकरण में सजा सुनाई।
एडीजीसी अनुज ढाका ने बताया कि दोघट के एसआई अंगन सिंह 31 दिसंबर 2011 की रात करीब आठ बजे एचसीपी वीरेंद्र सिंह, कांस्टेबल धीरज और हरिशंकर के साथ गश्त कर रहे थे। दाहा-बरनावा रोड पर चेकिंग करते हुए पलड़ी की ओर से एक बाइक से तीन युवक आते दिखाई दिए। पुलिस ने बाइक सवार हिस्ट्रीशीटर मुलसम गांव निवासी राजीव को पहचान लिया और रुकने का इशारा किया। राजीव ने पिस्टल से पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी थी। एक गोली सिपाही धीरज की जांघ को चीरती हुई निकल गई थी। हमलावर पुलिस के सामने ही फरार हो गए थे। पुलिस ने घायल सिपाही को बड़ौत सीएचसी में भर्ती कराया था। अगले दिन दोघट में हुई मुठभेड़ में राजीव को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उससे 32 बोर का पिस्टल बरामद हुआ था। एसआई अंगन सिंह ने बदमाश के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने अदालत में चार्जशीट दाखिल की। मुकदमे का ट्रायल एडीजे स्पेशल एससी/एसटी आबिद शमीम की अदालत में हुआ।
एडीजीसी अनुज ढाका ने बताया कि अभियोजन पक्ष ने छह गवाह पेश किए। बुधवार को अदालत ने राजीव को सात साल के सश्रम कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड नहीं देने पर 15 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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गाजियाबाद जेल में बंद राजीव पर 18 मुकदमे
बागपत। राजीव गाजियाबाद जेल में बंद है। पुलिस ने उसे अदालत में हाजिर किया। उस पर दिल्ली, मेरठ, शामली, कांधला, ओखला, बसंत कुंज और दोघट थाने में हत्या, लूट समेत अन्य धाराओं के 18 मुकदमे दर्ज हैं।
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एडीजीसी अनुज ढाका ने बताया कि दोघट के एसआई अंगन सिंह 31 दिसंबर 2011 की रात करीब आठ बजे एचसीपी वीरेंद्र सिंह, कांस्टेबल धीरज और हरिशंकर के साथ गश्त कर रहे थे। दाहा-बरनावा रोड पर चेकिंग करते हुए पलड़ी की ओर से एक बाइक से तीन युवक आते दिखाई दिए। पुलिस ने बाइक सवार हिस्ट्रीशीटर मुलसम गांव निवासी राजीव को पहचान लिया और रुकने का इशारा किया। राजीव ने पिस्टल से पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी थी। एक गोली सिपाही धीरज की जांघ को चीरती हुई निकल गई थी। हमलावर पुलिस के सामने ही फरार हो गए थे। पुलिस ने घायल सिपाही को बड़ौत सीएचसी में भर्ती कराया था। अगले दिन दोघट में हुई मुठभेड़ में राजीव को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उससे 32 बोर का पिस्टल बरामद हुआ था। एसआई अंगन सिंह ने बदमाश के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने अदालत में चार्जशीट दाखिल की। मुकदमे का ट्रायल एडीजे स्पेशल एससी/एसटी आबिद शमीम की अदालत में हुआ।
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एडीजीसी अनुज ढाका ने बताया कि अभियोजन पक्ष ने छह गवाह पेश किए। बुधवार को अदालत ने राजीव को सात साल के सश्रम कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड नहीं देने पर 15 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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गाजियाबाद जेल में बंद राजीव पर 18 मुकदमे
बागपत। राजीव गाजियाबाद जेल में बंद है। पुलिस ने उसे अदालत में हाजिर किया। उस पर दिल्ली, मेरठ, शामली, कांधला, ओखला, बसंत कुंज और दोघट थाने में हत्या, लूट समेत अन्य धाराओं के 18 मुकदमे दर्ज हैं।