{"_id":"654b744f5fc557fe1207d9f5","slug":"self-peace-cannot-be-achieved-through-worldly-matters-acharya-vishuddha-sagar-baghpat-news-c-31-1-smrt1003-3782-2023-11-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"जगत के प्रपंचों से नहीं मिलती आत्म-शांति : आचार्य विशुद्ध सागर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जगत के प्रपंचों से नहीं मिलती आत्म-शांति : आचार्य विशुद्ध सागर
विज्ञापन
रफोटो संख्या 1
बड़ौत। दिगम्बराचार्य विशुद्धसागर महाराज ने कहा कि सम्पूर्ण जगत के प्राणी सुख चाहते हैं, पर वह सुख, शांति जगत के प्रपंचों में किंचित मात्र भी नहीं है।
जैनमुनि बुधवार को ऋषभदेव सभागार में आयोजित धर्मसभा मेें बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि काम-वासना का सुख, धन-धरती का सुख, भोग-उपभोग का सुख, सुख नहीं, सुखाभास है। शाश्वत सुख, परम शान्ति का कोई साधन है तो वह समीचीन जिन-धर्म है। धर्म ही उत्तम-सुख साधन है। सुख चाहिए तो धर्म करो। सुख चाहिए तो इन्द्रिय-सुखों को छोड़कर, संयम-साधना कर, कर्म क्षय कर, आत्मिक-सुख प्राप्त करो। कहा कि जैसे भाव होंगे, वैसा कर्म का बंध होगा। सही कर्म करो, कर्म से बचो। कर्म की गति विचित्र होती है। कर्म किसी को नहीं छोड़ते। जैसा भाव करोगे, वैसा कर्म का आसव-बंध होगा और जैसा कर्म बंध होगा वैसा कर्म उदय में आएगा। कर्म ऐसे करो, जिससे कष्ट न हो। जिंदगी ऐसे जियो, जिससे दूसरों को दुःख न हो। जियो और जीने दो। धर्म करो, परम-शांति प्राप्त करो। संचलन डॉ़ श्रेयांस जैन ने किया। दिगंबर जैन मन्दिर बड़ा गांव कमेटी ने आचार्य श्री को श्रीफल समर्पित किया। सभा में प्रवीण जैन, अतुल जैन, मनोज जैन, सुभाष जैन, प्रमोद जैन, आनंद जैन, विनोद जैन एडवोकेट शामिल रहे।
विज्ञापन
बड़ौत। दिगम्बराचार्य विशुद्धसागर महाराज ने कहा कि सम्पूर्ण जगत के प्राणी सुख चाहते हैं, पर वह सुख, शांति जगत के प्रपंचों में किंचित मात्र भी नहीं है।
जैनमुनि बुधवार को ऋषभदेव सभागार में आयोजित धर्मसभा मेें बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि काम-वासना का सुख, धन-धरती का सुख, भोग-उपभोग का सुख, सुख नहीं, सुखाभास है। शाश्वत सुख, परम शान्ति का कोई साधन है तो वह समीचीन जिन-धर्म है। धर्म ही उत्तम-सुख साधन है। सुख चाहिए तो धर्म करो। सुख चाहिए तो इन्द्रिय-सुखों को छोड़कर, संयम-साधना कर, कर्म क्षय कर, आत्मिक-सुख प्राप्त करो। कहा कि जैसे भाव होंगे, वैसा कर्म का बंध होगा। सही कर्म करो, कर्म से बचो। कर्म की गति विचित्र होती है। कर्म किसी को नहीं छोड़ते। जैसा भाव करोगे, वैसा कर्म का आसव-बंध होगा और जैसा कर्म बंध होगा वैसा कर्म उदय में आएगा। कर्म ऐसे करो, जिससे कष्ट न हो। जिंदगी ऐसे जियो, जिससे दूसरों को दुःख न हो। जियो और जीने दो। धर्म करो, परम-शांति प्राप्त करो। संचलन डॉ़ श्रेयांस जैन ने किया। दिगंबर जैन मन्दिर बड़ा गांव कमेटी ने आचार्य श्री को श्रीफल समर्पित किया। सभा में प्रवीण जैन, अतुल जैन, मनोज जैन, सुभाष जैन, प्रमोद जैन, आनंद जैन, विनोद जैन एडवोकेट शामिल रहे।
विज्ञापन