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जापान में शोध करेंगे हेवा गांव निवासी वैज्ञानिक दिग्विजय
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जापान के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर मैटरियल्स साइंस में पोस्ट डॉक्टरेट अनुसंधान वैज्ञानिक पद पर चयन, ग्रामीणों ने जताई खुशी
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। हेवा गांव के किसान सुधीर कुंडू के बेटे डाक्टर दिग्विजय का चयन जापान में शोध करेंगे। उनका चयन जापान के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर मैटरियल्स साइंस में पोस्ट डॉक्टरेट अनुसंधान वैज्ञानिक पद पर हुआ है।
डा दिग्विजय ने लूंब गांव के जनता इंटर कॉलेज से प्रारंभिक पढ़ाई करने के बाद मैकेनिकल इंजीनियरिग में बीटेक एनआइटी कर्नाटक से की और आइआइटी इंदौर से डाक्टरेट की पढ़ाई पूरी कर पीएचडी की उपाधि ली। बायोमेडिकल और परमाणु ऊर्जा अनुप्रयोगों के लिए ग्रेडिएंट नैनोस्ट्रक्चर्ड मिश्र धातुओं के डिजाइन और विकास पर शोध किया। डॉक्टर दिग्विजय ने बताया कि वर्ष 2016-17 में प्रतिष्ठित इंटरनेशनल एडवांस रिसर्च सेंटर फार पाउडर मेटलर्जी एंड न्यू मैटेरियल्स डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी हैदराबाद से जुड़े रहे। वर्ष 2019 में पीएचडी के दौरान उन्हें एनआइएमएस अनुसंधान केंद्र टोक्यो, जापान में अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के साथ ट्रांसमिशन इलेक्ट्रान माइक्रोस्कापी पर शोध करने के लिए जापान से विजिटिंग रिसर्च फेलोशिप दी गई थी। वह स्वीडन, जापान और ब्राजील के प्रोफेसरों और वैज्ञानिकों के साथ कई अंतरराष्ट्रीय शोध सहयोग में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं। वह अपनी सफलता का सारा श्रेय परिवार को देते हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। हेवा गांव के किसान सुधीर कुंडू के बेटे डाक्टर दिग्विजय का चयन जापान में शोध करेंगे। उनका चयन जापान के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर मैटरियल्स साइंस में पोस्ट डॉक्टरेट अनुसंधान वैज्ञानिक पद पर हुआ है।
डा दिग्विजय ने लूंब गांव के जनता इंटर कॉलेज से प्रारंभिक पढ़ाई करने के बाद मैकेनिकल इंजीनियरिग में बीटेक एनआइटी कर्नाटक से की और आइआइटी इंदौर से डाक्टरेट की पढ़ाई पूरी कर पीएचडी की उपाधि ली। बायोमेडिकल और परमाणु ऊर्जा अनुप्रयोगों के लिए ग्रेडिएंट नैनोस्ट्रक्चर्ड मिश्र धातुओं के डिजाइन और विकास पर शोध किया। डॉक्टर दिग्विजय ने बताया कि वर्ष 2016-17 में प्रतिष्ठित इंटरनेशनल एडवांस रिसर्च सेंटर फार पाउडर मेटलर्जी एंड न्यू मैटेरियल्स डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी हैदराबाद से जुड़े रहे। वर्ष 2019 में पीएचडी के दौरान उन्हें एनआइएमएस अनुसंधान केंद्र टोक्यो, जापान में अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के साथ ट्रांसमिशन इलेक्ट्रान माइक्रोस्कापी पर शोध करने के लिए जापान से विजिटिंग रिसर्च फेलोशिप दी गई थी। वह स्वीडन, जापान और ब्राजील के प्रोफेसरों और वैज्ञानिकों के साथ कई अंतरराष्ट्रीय शोध सहयोग में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं। वह अपनी सफलता का सारा श्रेय परिवार को देते हैं।
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