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Baghpat News: शास्त्र और धर्म के रास्ते पर चलकर ही मिलेगी मुक्ति
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फोटो - 4
संवाद न्यूज एजेंसी
अग्रवाल मंडी टटीरी/अमीनगर सराय। आचार्य स्वदेश महाराज ने कहा कि लोग अपनी संस्कृति और धर्म को भूलकर लोभ के वशीभूत हो रहे हैं, जो उनके विनाश का कारण है। शास्त्र और धर्म के मार्ग का पालन करने से ही मुक्ति संभव है।
आचार्य स्वदेश महाराज कस्बे में चल रहे 51 कुंडीय श्री चंडी सहस्त्र यज्ञ के उपरांत प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शास्त्र और धर्म का अनुसरण न करना मनुष्य के दुखों का कारण है। लोग जातिवाद और समाजवाद के चक्कर में अपने धर्म को भूलते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यज्ञ से संतान और धन की प्राप्ति होती है। आचार्य राम पाराशर ने कहा कि यज्ञ में आहुति देने और परिक्रमा करने से मनुष्य का कल्याण हो जाता है। इस मौके पर संजीव शर्मा, अंकुर शर्मा, पंडित मनोहर लाल, विजयकांत कौशिक, रामवीर सिंह, पवन ठेकेदार, अनिल, चौधरी पवन, प्रवीण मित्तल, गौरव गुप्ता, साधूराम मित्तल मौजूद रहे। उधर, अमीनगर सराय के मनसा मंदिर में चल रहे श्री शतचंडी महायज्ञ के सातवें दिन कालरात्रि की आराधना की गई। यजमानों ने हवन में आहुतियां दीं और श्रद्धालुओं ने यज्ञ शाला की परिक्रमा की। दोपहर में कीर्तन कर माता का गुणगान किया गया।
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अग्रवाल मंडी टटीरी/अमीनगर सराय। आचार्य स्वदेश महाराज ने कहा कि लोग अपनी संस्कृति और धर्म को भूलकर लोभ के वशीभूत हो रहे हैं, जो उनके विनाश का कारण है। शास्त्र और धर्म के मार्ग का पालन करने से ही मुक्ति संभव है।
आचार्य स्वदेश महाराज कस्बे में चल रहे 51 कुंडीय श्री चंडी सहस्त्र यज्ञ के उपरांत प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शास्त्र और धर्म का अनुसरण न करना मनुष्य के दुखों का कारण है। लोग जातिवाद और समाजवाद के चक्कर में अपने धर्म को भूलते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यज्ञ से संतान और धन की प्राप्ति होती है। आचार्य राम पाराशर ने कहा कि यज्ञ में आहुति देने और परिक्रमा करने से मनुष्य का कल्याण हो जाता है। इस मौके पर संजीव शर्मा, अंकुर शर्मा, पंडित मनोहर लाल, विजयकांत कौशिक, रामवीर सिंह, पवन ठेकेदार, अनिल, चौधरी पवन, प्रवीण मित्तल, गौरव गुप्ता, साधूराम मित्तल मौजूद रहे। उधर, अमीनगर सराय के मनसा मंदिर में चल रहे श्री शतचंडी महायज्ञ के सातवें दिन कालरात्रि की आराधना की गई। यजमानों ने हवन में आहुतियां दीं और श्रद्धालुओं ने यज्ञ शाला की परिक्रमा की। दोपहर में कीर्तन कर माता का गुणगान किया गया।
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