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पूजा अर्चना कर मांगी मन्नत
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Sun, 30 Aug 2015 01:32 AM IST
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बागपत में श्रावणी पर्व पर पक्काघाट के ब्रह्मचारियों एवं अन्य श्रद्धालुओं ने यमुना में स्नान कर पूजा अर्चना की और जनेऊ परिवर्तन किया। शनिवार को पक्काघाट स्थित मंदिर के पुजारी ब्रह्मचारी राम स्वरूप महाराज अपने साथ गुरुकुल के ब्रह्मचारियों के साथ यमुना के पक्काघाट पर पहुंचे।
पूजा अर्चना की और फिर यमुना में स्नान कर सूर्य को जल अर्पण किया। इसके साथ ही जनेऊ परिवर्तन किया। उनके अलावा शहर और आसपास के गांवों से भी लोग यमुना में स्नान करने के लिए पहुंचे और पूजा अर्चना की। उधर, बंदपुर गांव में श्रावणी पर्व के अवसर पर यज्ञ का आयोजन किया गया।
इसमें यज्ञ के ब्रह्मा आर्यव्रत ने बताया कि वैदिक संस्कृति में आज के दिन से वेदाध्यान प्रारंभ किया जाता है और आज ही के दिन यज्ञोपवित्र (जनेऊ ) परिवर्तन किया जाता है। यज्ञोपवित्र विद्या का प्रतीक है। इस पर्व पर नई धारणा के साथ स्वराष्ट्र एवं प्राणी मात्र की रक्षा करने का संकल्प लिया जाता है।
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संसार पर उपकार करना ही आर्य समाज का मुख्य उद्देश्य है। यज्ञ संसार का सर्वोत्तम कर्म होता है। इसे करने से संपूर्ण प्राणी मात्र को उसके दु:ख और रोगों से मुक्ति मिल जाती है। इस मौके पर सुरेश आर्य, रामधन, प्रशांत, अजय, अंकुश, सुनील, सतेंद्र, राजकुमार, सचिन आर्य मौजूद रहे।
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पूजा अर्चना की और फिर यमुना में स्नान कर सूर्य को जल अर्पण किया। इसके साथ ही जनेऊ परिवर्तन किया। उनके अलावा शहर और आसपास के गांवों से भी लोग यमुना में स्नान करने के लिए पहुंचे और पूजा अर्चना की। उधर, बंदपुर गांव में श्रावणी पर्व के अवसर पर यज्ञ का आयोजन किया गया।
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इसमें यज्ञ के ब्रह्मा आर्यव्रत ने बताया कि वैदिक संस्कृति में आज के दिन से वेदाध्यान प्रारंभ किया जाता है और आज ही के दिन यज्ञोपवित्र (जनेऊ ) परिवर्तन किया जाता है। यज्ञोपवित्र विद्या का प्रतीक है। इस पर्व पर नई धारणा के साथ स्वराष्ट्र एवं प्राणी मात्र की रक्षा करने का संकल्प लिया जाता है।
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संसार पर उपकार करना ही आर्य समाज का मुख्य उद्देश्य है। यज्ञ संसार का सर्वोत्तम कर्म होता है। इसे करने से संपूर्ण प्राणी मात्र को उसके दु:ख और रोगों से मुक्ति मिल जाती है। इस मौके पर सुरेश आर्य, रामधन, प्रशांत, अजय, अंकुश, सुनील, सतेंद्र, राजकुमार, सचिन आर्य मौजूद रहे।