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Baghpat News: मुशर्रफ के परिवार का बागपत से खत्म होगा नामोनिशान
Sat, 31 Aug 2024 02:47 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
Updated Sat, 31 Aug 2024 02:47 AM IST
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बागपत। पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के भाई व परिवार का बागपत से नामोनिशान खत्म हो जाएगा। कोताना में शत्रु संपत्ति घोषित की गई उनकी जमीन की नीलामी शुरू हो गई है। इसमें आधी जमीन की नीलामी की प्रक्रिया पांच सितंबर तक पूरी हो जाएगी और रिकाॅर्ड में नया नाम दर्ज होगा।
पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के पिता मुशर्रफुद्दीन और माता बेगम जरीन कोताना गांव की रहने वालीं थीं। कोताना में दोनों की शादी हुई थी। वह वर्ष 1943 में दिल्ली जाकर रहने लगे थे, जहां परवेज मुशर्रफ व उसके भाई डॉ. जावेद मुशर्रफ का जन्म हुआ था। उनका परिवार वर्ष 1947 में बंटवारे के समय पाकिस्तान में जाकर बस गया था। मगर दिल्ली के अलावा उनके परिवार की हवेली व खेती की जमीन कोताना में मौजूद है। जिसमें परवेज मुशर्रफ की जमीन बेच दी गई तो उनके भाई डाॅ. जावेद मुशर्रफ व परिवार के सदस्यों की दस बीघा से ज्यादा खेती की जमीन बच गई।
इसके अलावा कोताना की हवेली उनके चचेरे भाई हुमायूं के नाम दर्ज हो गई थी। परवेज मुशर्रफ के भाई डॉ. जावेद मुशर्रफ व परिवार के अन्य सदस्यों की जमीन को पंद्रह साल पहले शत्रु संपत्ति में दर्ज कर दिया गया था। मगर इस जमीन की पहचान इनके नाम से होती है।
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- बांगर की जमीन की पहले होगी नीलामी
कोताना में कुछ शत्रु संपत्ति खादर तो कुछ बांगर के रिकाॅर्ड में दर्ज है। फिलहाल भारत के शत्रु संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय ने बांगर की संपत्ति की नीलामी शुरू कराई है जो पांच सितंबर तक ऑनलाइन पूरी होगी। इस संपत्ति के लिए करीब 37.5 लाख रुपये कम से कम बोली राशि तय की गई है। इस संपत्ति की नीलामी के बाद रिकाॅर्ड में इसको लेने वालों के नाम दर्ज किए जाएंगे। इसके बाद इस संपत्ति की पुराने लोगों की जगह नए नाम से पहचान की जाएगी।
- भारत सरकार के शत्रु संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय से कोताना में शत्रु संपत्ति की नीलामी कराई जा रही है। यह नीलामी ऑनलाइन होगी और इसके होने पर रिकाॅर्ड में नए नाम दर्ज हो जाएंगे। अभी बांगर की संपत्ति की नीलामी हो रही है। खादर की संपत्ति की नीलामी भी जल्द होगी। - पंकज वर्मा, एडीएम
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पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के पिता मुशर्रफुद्दीन और माता बेगम जरीन कोताना गांव की रहने वालीं थीं। कोताना में दोनों की शादी हुई थी। वह वर्ष 1943 में दिल्ली जाकर रहने लगे थे, जहां परवेज मुशर्रफ व उसके भाई डॉ. जावेद मुशर्रफ का जन्म हुआ था। उनका परिवार वर्ष 1947 में बंटवारे के समय पाकिस्तान में जाकर बस गया था। मगर दिल्ली के अलावा उनके परिवार की हवेली व खेती की जमीन कोताना में मौजूद है। जिसमें परवेज मुशर्रफ की जमीन बेच दी गई तो उनके भाई डाॅ. जावेद मुशर्रफ व परिवार के सदस्यों की दस बीघा से ज्यादा खेती की जमीन बच गई।
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इसके अलावा कोताना की हवेली उनके चचेरे भाई हुमायूं के नाम दर्ज हो गई थी। परवेज मुशर्रफ के भाई डॉ. जावेद मुशर्रफ व परिवार के अन्य सदस्यों की जमीन को पंद्रह साल पहले शत्रु संपत्ति में दर्ज कर दिया गया था। मगर इस जमीन की पहचान इनके नाम से होती है।
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- बांगर की जमीन की पहले होगी नीलामी
कोताना में कुछ शत्रु संपत्ति खादर तो कुछ बांगर के रिकाॅर्ड में दर्ज है। फिलहाल भारत के शत्रु संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय ने बांगर की संपत्ति की नीलामी शुरू कराई है जो पांच सितंबर तक ऑनलाइन पूरी होगी। इस संपत्ति के लिए करीब 37.5 लाख रुपये कम से कम बोली राशि तय की गई है। इस संपत्ति की नीलामी के बाद रिकाॅर्ड में इसको लेने वालों के नाम दर्ज किए जाएंगे। इसके बाद इस संपत्ति की पुराने लोगों की जगह नए नाम से पहचान की जाएगी।
- भारत सरकार के शत्रु संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय से कोताना में शत्रु संपत्ति की नीलामी कराई जा रही है। यह नीलामी ऑनलाइन होगी और इसके होने पर रिकाॅर्ड में नए नाम दर्ज हो जाएंगे। अभी बांगर की संपत्ति की नीलामी हो रही है। खादर की संपत्ति की नीलामी भी जल्द होगी। - पंकज वर्मा, एडीएम