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यूक्रेन में झेली कईं मुसीबतें, रोमानिया में रखा जा रहा भारतीयों का पूरा ध्यान

Thu, 03 Mar 2022 12:02 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 03 Mar 2022 12:02 AM IST
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Many troubles faced in Ukraine, full attention of Indians being kept in Romania
यूक्रेन से घर लौटा असारा गांव का आमिर परिजनों के साथ - फोटो : BAGHPAT
- यूक्रेन से लौटे असारा गांव के आमिर ने बताया कि रोमानिया में कैंप लगाकर खाना खिलाया जा रहा
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- बागपत की अनुष्का ढाका के हंगरी से जल्द लौटने की उम्मीद, सागर व अन्य कई अभी कीव में फंसे
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत/बड़ौत/रमाला। यूक्रेन से अपने देश लौटने के लिए भारतीयों को रोमानिया तक परेशानी झेलनी पड़ रही है। रोमानिया पहुंचने पर वहां के लोग भारतीयों के लिए कैंप लगाकर खानपान का पूरा ध्यान रख रहे है। वतन वापस लौटे असारा गांव के आमिर ने यूक्रेन से रोमानिया बॉर्डर तक की परेशानी व उसके बाद मिली राहत के बारे में बताया है।
असारा गांव के रहने वाले गयूर का बेटा आमिर यूक्रेन के इवानो की नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर रहा है। वह मंगलवार को अपने घर वापस लौटा है। आमिर ने बताया कि यूक्रेन व रूस के बीच विवाद को देखते हुए दूतावास ने 22 फरवरी को एडवाइजरी जारी की थी, लेकिन टिकट डेढ़ लाख रुपये तक में मिल रहा था। इसलिए टिकट नहीं कराया, क्योंकि उस वक्त उनको उम्मीद नहीं थी कि इस तरह से युद्ध हो जाएगा। अब जब युद्ध शुरू हुआ तो दहशत हो गई और हर कोई किसी भी तरह अपने देश पहुंचना चाहता था। वह रोमानिया बॉर्डर तक पहुंचे तो काफी परेशानी झेलनी पड़ी और भूखा-प्यासा भी रहना पड़ा। जब रोमानिया के अंदर चले गए तो वहां भारतीयों के लिए कैंप लगाया हुआ था। रोमानिया के लोग काफी सेवा कर रहे थे और खान-पान का पूरा ध्यान रख रहे थे। इससे कुछ हिम्मत मिली और अपने घर आराम से लौट सके।
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बागपत में मेरठ रोड पर रहने वाले ओमबीर ढाका की बेटी अनुष्का ढाका भी जल्द अपने देश लौट सकती है। वह हंगरी के बुडापेस्ट में टिकट कराने में लगी थी, जिससे जल्द घर लौट सके। अग्रवाल मंडी टटीरी के सागर वर्मा समेत अन्य कई छात्र कीव में फंसे हुए है।
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हमारा भविष्य भी दांव पर लगा: साक्षी
बड़ौत। यूक्रेन से रोमानिया होते हुए बड़ौत में अपने घर पहुंची साक्षी तोमर को देखकर परिजन बार-बार भावुक हो रहे है। बेटी की पिछले कई दिनों से उनको चिंता सता रही थी। साक्षी तोमर ने बताया कि दस दिन बहुत ही मुश्किल भरे रहे। खाने में दिक्कतें रही। बॉर्डर पार करने के लिए पैदल भी चलना पड़ा। अब पढ़ाई को लेकर वह काफी चिंतित है। कहा कि युद्ध के साथ ही हमारा भविष्य भी दांव पर लग गया है।
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