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महावीर जयंती आज, घर-घर दीप जलाने की अपील

Sat, 24 Apr 2021 10:55 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 24 Apr 2021 10:55 PM IST
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Mahavir Jayanti today, appeals to light the lamp from house to house
बड़ौत। बढ़ते कोरोना संक्रमण के कारण महावीर जयंती पर धूमधाम से निकाली जाने वाली रथ और पालकी यात्रा रद कर दी गई है। 50 साल में यह दूसरी बार है जब रथयात्रा और पालकी यात्रा रद की गई है। गत वर्ष भी रथयात्रा और पालकी यात्रा नहीं निकाली गई थी। रविवार को जैन समाज भगवान महावीर की जयंती विशेष सतर्कता के साथ मनाएगा। जैनाचार्यों ने इस बार महावीर जयंती पूर्ण सादगी के साथ घर में रहकर मनाने और दीप जलाने की अपील की है।
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महावीर स्वामी दिगंबर जैन प्रमागम मंदिर के अध्यक्ष विनोद कुमार जैन ने बताया कि इस बार जैन समाज किसी भी मंदिर में सामूहिक धार्मिक आयोजन नहीं करेगा। मंदिरों में विराजित भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमा का प्रशासनिक गाइडलाइन के अनुसार मात्र पुजारियों के द्वारा अभिषेक और पूजन आदि किया जाएगा। संकट भरे माहौल में कोई भी धार्मिक, सामाजिक व भीड़ भरे राजनीतिक आयोजन खतरे से खाली नहीं हैं। इसलिए जैन समाज के लोग अपने आराध्य भगवान महावीर स्वामी का जन्मोत्सव बड़े ही श्रद्धाभाव से अपने-अपने घरों में रहकर ही दीपोत्सव के रूप में मनाएंगे। आराधना करते हुए अपने घरों में ही श्रद्धालु प्रात: काल भगवान महावीर का पूजन करेंगे। शाम को भी परिवार में सभी लोग सामूहिक रूप से महावीर की आरती उतारेंगे। इसके साथ ही घर के दरवाजे पर दीपक जलाएंगे।
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बड़ौत नगर में स्थापित दस जैन मंदिर
महावीर स्वामी दिगंबर जैन प्रमागम मंदिर के अध्यक्ष विनोद कुमार जैन ने बताया कि नगर मेें दस दिगंबर जैन मंदिर है। इनमेें से तीन मंदिर भगवान महावीर स्वामी के नाम से है।
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भगवान महावीर ने धर्माधिकार सभी को समान रूप से दिया
शहजाद राय शोध संस्थान के निर्देशक अमित राय जैन बताते है कि महाभारत के अनुसार नागराज के प्रश्न पूछने पर युधिष्ठिर ने भी ब्राह्मण शब्द की इसी से मिली जुली सी व्याख्या की थी, जिसमें सत्य, दान, क्षमाशील, क्रूरता का अभाव और दया है। सब सद्गुण दिखाई दें वही ब्राह्मण है, भगवान महावीर की शब्दों में तात्विक दृष्टि से मनुष्य जाति एक ही है। यह सारे भेद कर्म जनित है। जाति, नाम, कर्म के उदय से मनुष्य जाति एक ही है, वृत्ति भेद के आधार पर यह चार भेद वर्णों के रूप में कर दिए गए। भगवान महावीर ने धर्माधिकार सभी को समान रूप से दिया।
भगवान महावीर के पांच संस्कार
अहिंसा (अहिंसा), सत्य, अस्तेय (गैर-चोरी), ब्रह्मचर्य (शुद्धता), अपरिग्रह (अनासक्ति)
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