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मणिपुर जैसा कांड: 43 साल पहले यूपी में हुई थीं हैवानियत की हदें पार, खाकी की गंदी हरकत से हिल गया था पूरा देश

Fri, 21 Jul 2023 06:14 PM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Fri, 21 Jul 2023 06:14 PM IST
सार

UP News : मणिपुर जैसा कांड 43 साल पहले यूपी में भी हुआ था। यूपी के इस शहर में माया त्यागी के साथ भी ऐसी ही हैवानियत की गई थी। इस घटना से पूरा देश हिल गया था।

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UP News: Like Manipur, Maya Tyagi incident happened in Baghpat 43 years ago
माया त्यागी कांड में न्याय की मांग करते लोग। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जिस तरह से मणिपुर में महिलाओं के साथ हैवानियत की गई है, उससे पूरा देश हिल गया है। इस तरह ही बागपत में 43 साल पहले माया त्यागी कांड हुआ था, जिसमें महिला के साथ ऐसी ही हैवानियत हुई थी। महिला के पति समेत तीन की पुलिस ने गोली मारकर हत्या कर दी थी तो माया त्यागी के साथ सामूहिक दुष्कर्म करने के बाद निर्वस्त्र घुमाया गया था। माया त्यागी कांड से भी तब पूरा देश हिल गया था।

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बागपत के वरिष्ठ अधिवक्ता देवेंद्र आर्य बताते हैं कि एक महिला अपने पति और उनके दो साथियों संग गाजियाबाद से एंबेसडर कार में बागपत आ रही थी। वह एक ढाबे पर चाय पीने लगे, तभी वहां पुलिस कर्मियों ने पहुंचकर महिला से अभद्रता शुरू कर दी। उसके पति ने विरोध किया तो पुलिस कर्मियों ने बागपत कोतवाली से अन्य साथियों को बुला लिया।

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इसके बाद महिला के पति व उनके दो साथियों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। अधिवक्ता देवेंद्र आर्य के अनुसार, महिला के साथ दुष्कर्म किया गया और उनको निर्वस्त्र घुमाया गया था। महिला के शरीर पर चिकित्सा जांच में 25 घाव के निशान मिले थे।

चौधरी चरण सिंह समेत अन्य ने किया था इंसाफ के लिए आंदोलन
पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चौधरी चरण सिंह की बागपत कर्मभूमि थी। उनकी कर्मभूमि पर इस तरह की घटना हुई तो उन्होंने इसे संसद में उठाया। इसके बाद मामला तूल पकड़ गया और इसको माया त्यागी कांड के नाम से पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए आंदोलन चलाया गया। चौधरी चरण सिंह व अन्य साथी नेताओं ने धरना तक दिया तो कई बार बवाल भी हुआ। इसके बाद मामले की उच्च स्तरीय जांच कराकर मामला दर्ज किया गया था।

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पुलिस कर्मियों को हुई थी फांसी और उम्रकैद की सजा
अधिवक्ता देवेंद्र आर्य के अनुसार, वर्ष 1988 में जिला न्यायालय ने छह पुलिस कर्मियों को दोषी मानते हुए दो को फांसी और चार को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। मामले का फैसला देने वाले जज ने अपने फैसले में लिखा था कि इस तरह के मामले पुलिस राज के आदिम दिनों की याद दिलाते हैं, जब लोग निरंकुश की दया पर रहते थे। समाज के अस्तित्व के लिए ऐसी बुराइयों को खत्म करना जरूरी है। देवेंद्र आर्य बताते हैं कि मणिपुर में भी माया त्यागी कांड की तरह घटना हुई है।

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