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‘कुछ कथाएं छोड़ आए, हम शहर को दौड़ आए’

Mon, 14 Nov 2016 12:48 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत Updated Mon, 14 Nov 2016 12:48 AM IST
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"Left a few stories, we came running to the city '
बलबीर सिंह - फोटो : amar ujala
बागपत। वीर रस की कविताओं के अलावा किरठल गांव के महाकवि बलवीर सिंह करुण ने देशभर में अपनी गीतों से भी पहचान बनाई हैं।  उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के अवंती बाई सम्मान से नवाजे जा चुके करुण के महाकाव्य ‘मैं द्रोणाचार्य बोलता हूं’ को विश्व स्तर पर सराहा गया।
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रविवार को राजस्थान के अलवर से अपने गांव पहुंचे करुण का कहना है कि हिंदी को अधिक बढ़ावा देने की जरूरत है। वह कहते हैं कि सभी पद्य रचनाएं कविता होती हैं। गीत कविता का ही एक अंग है। गीत के कलेवर को परिभाषित अथवा सुनिश्चित करते समय छंद-नैपुण्य, बिंब, लय विधान और कथ्य की कमनीयता पर ध्यान देना होता है। गांव से शहरों की तरफ बढ़ रहे पलायन पर उनकी रचना ‘ इंद्रधनुषी पनघटों पर, ग्राम सरिता के तटों पर, कुछ कथाएं छोड़ आए, हम शहर को दौड़ आए’ सार्थक है। सोमवार को वह किरठल में होने वाले अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में भाग लेंगे।
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करुण की प्रमुख रचनाएं
मैं द्रोणाचार्य बोलता हूं (महाकाव्य), विजय केतु (खंडकाव्य), बिगुल, बोले रक्त शहीद का, प्रहरी मेरे देश के, देश की माटी दे आवाज, गीत गंध बावरी, गीत कपोत पूछते हैं, मन मरुस्थल बोल, समरवीर गोकुला (प्रबंध काव्य), कितने पर्दे और उठाऊं, ययाति, पांडव सखा श्रीकृष्ण, द्रोणाचार्य, भीष्म पितामह (उपन्यास)।
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दूरदर्शन के लिए लिखा अंधकार
हमारा राजस्थान धारावाहिक के गीत एवं पटकथा के अलावा अंधकार धारावाहिक का परिचय गीत भी बलवीर सिंह करुण की ही रचना है। 

अवंतीबाई एवं मीरा सम्मान मिला
किरठल गांव के बलवीर सिंह करुण को साहित्य साधना के दौरान सैकड़ों पुरस्कार मिले हैं। राजस्थान साहित्य अकादमी के सर्वोच्च सम्मान मीरा पुरस्कार से उन्हें नवाजा गया। साहित्य अकादमी उदयपुर ने उन्हें विशेष पुरस्कार दिया। बदायूं क्लब ने  राष्ट्र प्रचेता डॉ. बृजेंद्र अवस्थी पुरस्कार से नवाजा। अमेरिका में उन्हें हिंदी सेवा सम्मान मिला। अलवर गौरव के पुरस्कार से नवाजे जा चुके हैं। उप्र हिंदी संस्थान ने पिछले दिनों उन्हें अवंती बाई सम्मान दिया।


हिंदी सम्मेलन में बढ़ाया गौरव
वर्ष 2007 में अमेरिका में आयोजित आठवें हिंदी सम्मेलन में उन्होंने देश का प्रतिनिधित्व किया। इसके बाद वह मई 2010 में भी साहित्यिक यात्रा के लिए अमेरिका गए। 
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