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मुआवजा मांगने पहुंचे किसानों पर लाठियां बरसाईं

Sat, 09 Jul 2016 12:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत Updated Sat, 09 Jul 2016 12:19 AM IST
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lathicharged on Farmers arrived demand compensation
युवक को हिरासत में ले जा रहे पुलिसकर्मियों से छुड़ाता निवाड़ा का किसान। - फोटो : amar ujala
बागपत में अधिग्रहित भूमि का बढ़ा मुआवजा मांगने पहुंचे गौरीपुर, निवाड़ा और सिसाना गांव के किसानों पर लाठियां बरसाते हुए दौड़ा दिया। इस दौरान किसानों के साथ धक्का-मुक्की भी हुई। इसमें चार किसान घायल हो गए। निवाड़ा में पंचायत कर किसानों ने हक के लिए संघर्ष का एलान किया है। किसान प्रतिनिधिमंडल ने डीएम के साथ वार्ता की। बसपा विधायक लोकेश दीक्षित भी किसानों के समर्थन में पहुंचे। तय हुआ कि जिले से धारा 144 हट जाने के बाद निर्णायक लड़ाई लड़ी जाएगी।
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करीब 19 साल पहले बागपत को जनपद का दर्जा मिल जाने के बाद निवाड़ा, सिसाना और गौरीपुर गांव के किसानों की जमीन को अधिग्रहित कर कलक्ट्रेट, जिला अस्पताल, आवासीय कॉलोनी, पुलिस लाइन और विकास भवन समेत अन्य दफ्तरों का निर्माण कराया गया था। किसानों का कहना है कि सर्किल रेट के हिसाब से उन्हें मुआवजा नहीं दिया गया। कलक्ट्रेट में अनिश्चितकालीन धरने के लिए तीनों गांव के किसान शुक्रवार सुबह पहुंचे, लेकिन पुलिस ने इन्हें कलक्ट्रेट में नहीं घुसने दिया और उन पर लाठियां बरसा दी। इस पर वहां भगदड़ मच गई। पुलिस ने किसानों के साथ धक्कामुक्की भी की, जिसमें एक महिला चोटिल हो गई।

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किसान फैजान, सुनील, दोस्त मोहम्मद और दुलीचंद को भी चोटें आई, इन्हें निजी चिकित्सक के यहां प्राथमिक उपचार दिलाया गया। काफी देर तक दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर भगदड़ जैसा माहौल रहा। इसके बाद निवाड़ा में हाजी जमात के आवास पर पंचायत हुई। एलान किया कि हक के लिए संघर्ष से पीछे नहीं हटेेंगे। यहां से किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल प्रधान सरवर और सुनील चौहान के नेतृत्व में डीएम हृदय शंकर तिवारी से वार्ता करने पहुंचा। डीएम का कहना था कि भूमि अधिग्रहण के इस मसले से किसानों को यूपीएसआईडीएस मेरठ को अवगत कराना चाहिए। जिले में धारा 144 लगी हुई है। किसानों ने कहा कि वह धारा 144 हटने के बाद अपना हक मांगेंगे। विधायक लोकेश दीक्षित भी किसानों के समर्थन में पहुंचे। उन्होंने किसानों को साथ निभाने की बात कही। डीएम ने एडीएम से पूरे मामले की रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा है।

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ये था मामला
वर्ष 1997 में इमरजेंसी एक्वायरमेंट धारा 4 लागू हो गई थी। 1998 में यूपीएसआईडीसी ने सिसाना, निवाड़ा और गौरीपुर जवाहरनगर गांव की करीब ढाई हजार बीघा भूमि 41.46 रुपये वर्ग मीटर की दर से अधिग्रहण की थी। आरोप है कि इसके बावजूद किसानों को 35 रुपये की दर से मुआवजा दिया गया। किसान सही मुआवजे की लंबे समय से मांग कर रहे हैं।


सीओ बोले, नहीं किया लाठीचार्ज
बागपत सीओ कर्मवीर सिंह का कहना है कि धारा 144 लगी हुई है, इसके बावजूद कईं गांवों के किसान समूह में कलक्ट्रेट में जा रहे थे। इन्हें  समझाकर वापस भेज दिया गया। पुलिस ने किसी तरह का लाठीचार्ज नहीं किया है। पुलिस की लाठी से भी कोई किसान घायल नहीं हुआ।
 

पीछे नहीं हटेंगे, हर लाठी का मांगेंगे जवाब
बागपत। पुलिस की लाठी खाए किसानों की निवाड़ा गांव में हुई पंचायत में एलान किया गया कि किसान पीछे हटने वाले नहीं है। उनके ऊपर पड़ी पुलिस की हर लाठी का जवाब मांगा जाएगा। धारा 144 हटते ही कलक्ट्रेट में फिर पंचायत होगी। न्याय के लिए कानूनी तरीके से भी लड़ाई लड़ी जाएगी। राष्ट्रीय पंचायत राज ग्राम प्रधान संगठन ने भूमि अधिग्रहण के मसले पर तीनों गांव के लोगों को अपना समर्थन दिया है।
शुक्रवार को डीएम हृदय शंकर तिवारी से मिलने के बाद किसानों की पंचायत निवाड़ा में अंगूर ठेकेदार के आवास पर हुई। राष्ट्रीय पंचायत राज ग्राम प्रधान संगठन के जिला उपाध्यक्ष सुनील चौहान ने कहा कि पुलिस-प्रशासन का रवैया सही नहीं है। प्रशासन से वार्ता में तय हुआ है कि पहले एडीएम डीपी सिंह को किसान अपने मुआवजे के कागज दिखाएंगे, इसके बाद प्रशासन इस पर कोई अंतिम फैसला करेगा। 21 जुलाई तक धारा 144 हट जाएगी। किसानों ने एलान किया कि निषेधाज्ञा हटते ही कलक्ट्रेट में दोबारा से पंचायत बुलाई जाएगी। इस बार पूरे जिले से लोगों को आमंत्रित किया जाएगा। किसान पुलिस की लाठी से डरने वाले नहीं है। किसी भी कीमत पर अपने हक की लड़ाई में वह चुप नहीं बैठेंगे। अध्यक्षता सुनील चौहान और संचालन इखलाक ने किया। संगठन के अध्यक्ष रामपाल धामा, शैलेंद्र प्रधान, देवेंद्र प्रधान, ओमप्रकाश प्रधान, रमन प्रधान, अमरदीप प्रधान, तालिब, सरवर प्रधान, प्रकाश, मुस्तफा, रोहताश और रामभजन मौजूद रहे।

विधायक ने कहा लाठियां खाने को तैयार
बागपत। बड़ौत से बसपा के विधायक लोकेश दीक्षित ने कहा कि वह किसानों के लिए लाठियां खाने के लिए तैयार है। कई लोगों का कहना था कि उन्होंने पहले ही इस मामले से विधायक को अवगत कराया था। इस पर विधायक ने कहा कि वह हमेशा किसानों की मदद के लिए तैयार हैं।


सहमे बच्चे घरों की तरफ दौड़े
बागपत। परिवार के लोगों के साथ कलक्ट्रेट पहुंचे छोटे बच्चे पुलिस का रवैया देखकर सहम गए। किसी को उम्मीद नहीं थी कि पुलिस इस तरह किसानों को दौड़ा लेगी। पुलिस ने जैसे ही लोगों को कलक्ट्रेट में घुसने से रोका, बच्चे दूर खड़े हो गए। अगले ही क्षण पुलिस ने उनके साथ हाथापाई कर दी। यह नजारा देख बच्चे गांव की ओर दौड़ पड़े। एक बच्चे ने जोर से आवाज दी की अब्बू जल्दी यहां से भाग लो, पुलिस लाठियां मार रही है। कई बच्चे वाहन की चपेट में आने से बाल-बाल बचे। सड़कों पर बच्चों को दौड़ते देख वाहन रुक गए। हाईवे पर वाहनों का काफिला भी रुक गया।


छावनी बन गया कलक्ट्रेट
बागपत। किसानों के धरने प्रदर्शन को देखते हुए कलक्ट्रेट को छावनी में तब्दील कर दिया गया। यहां एसपी पूनम भी पहुंची। जिस वक्त किसान नेताओं की डीएम से वार्ता हुई, उसमें एसपी खुद भी मौजूद रही। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था भंग नहीं करने दी जाएगी। जबकि किसानों का कहना था कि वह अपने हक के लिए आए हैं।

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