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Kargil Vijay Diwas: इस अमर कहानी को भूल नहीं पाएगा परिवार, बागपत के लाल ने दिखाया था अदम्य साहस

Tue, 26 Jul 2022 03:24 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, बागपत
अमर उजाला ब्यूरो, बागपत Published by: कपिल kapil Updated Tue, 26 Jul 2022 03:24 PM IST
सार

बागपत के लाल ने कारगिल की सबसे ऊंची चोटियों में शामिल तोलोलिंग पर वीरता की ऐसी कहानी लिखी थी, जिसे परिवार कभी भूल नहीं पाएगा। पढ़िए उनकी अदम्य साहस की पूरी कहानी।

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Kargil Vijay Diwas: Yashveer Tomar of Baghpat showed indomitable courage in the Kargil war
कारगिल युद्ध

विस्तार

उत्तर प्रदेश के बागपत जनपद के यशवीर तोमर ने कारगिल की सबसे ऊंची चोटियों में शामिल तोलोलिंग पर वीरता की कहानी लिखी थी। दुश्मन को मार भगाने वाले तोमर ने अदम्य साहस का परिचय दिया था। वहीं जंग जीतने बाद तोमर दुश्मन के हमले में घायल हो गए और फिर देश पर कुर्बान हो गए। मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया।

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बागपत जिले के गांव सिरसली के किसान गिरवर सिंह के बेटे यशवीर तोमर साल 1979 में सेना में भर्ती हुए थे। हवलदार मेजर यशवीर सिंह ने कारगिल की लड़ाई तोलोलिंग की चोटी पर लड़ी। भारत ने जंग जीत ली थी और पहाड़ी पर फतह कर तिरंगा लहराने के बाद लौट रहे थे, इसी दौरान ग्रेनेड से हमले में यशवीर सिंह तोमर घायल हो गए थे। इसके बाद उनकी मौत हो गई थी।
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बता दें कि सरकार ने मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया। उनकी पत्नी मुनेश देवी ने बताया था कि जो घोषणाएं सरकार ने की थी, वह पूरी हुई। पति खोने का गम भी है, लेकिन देश के लिए बलिदान पर गर्व भी होता है। 
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बेटे ने शहादत दी, सरकार ने नहीं दी जमीन
कारगिल की पिंपल पहाड़ी पर खेकड़ा कस्बे के राजेंद्र धामा ने देश के लिए प्राण न्योछावर कर दिए थे। राजेंद्र की शहादत युवाओं को जोश से लबरेज कर देती हैं। पट्टी रामपुर निवासी मास्टर जय सिंह के बेटे राजेंद्र धामा जाट रेजीमेंट में साल 1988 में भर्ती हुए थे।

कारगिल में उनकी ड्यूटी पिंपल पहाड़ी पर थी। देश के लिए कुर्बानी दे दी। पिता जय सिंह बताते हैं कि सरकार ने सारी घोषणाएं पूरी की, लेकिन अभी तक जमीन देने का जो वायदा किया था, वह पूरा नहीं हुआ। शहीद का परिवार गाजियाबाद में रह रहा है।

इनका बलिदान भी अमर
ऑपरेशन रक्षक के दौरान जिले के बूढ़पुर गांव निवासी सुबोध तोमर, सूप निवासी देवेंद्र सिंह, ढिकाना निवासी नवाब सिंह, फखरपुर निवासी सेवेंद्र सिंह और काठा निवासी अनिल कुमार भी देश पर बुर्बान हो गए थे।

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