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अस्पताल में मशीन खराब तो सीएचसी में कैमिकल नहीं, रक्त जांच में 600 रुपये हो रहे खर्च

Fri, 13 Aug 2021 11:09 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 13 Aug 2021 11:09 PM IST
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Investigation stuck due to machine failure in district hospital
बागपत। स्वास्थ्य विभाग के बेहतर सुविधा देने के दावे हवाई साबित हो रहे हैं। यहां जिला अस्पताल एवं सीएचसी होने के बावजूद मरीजों को जेब ढीली करनी पड़ रही हैं। जिला अस्पताल में कई दिन से खून की जांच करने वाली मशीन खराब है। वहीं, सीएचसी में जांच में इस्तेमाल होने वाला केमिकल नहीं है। इससे मरीजों की लीवर, किडनी व शुगर की जांच नहीं हो पा रही हैं। उन्हें निजी प्रयोगशाला में 600 रुपये खर्च करके जांच करानी पड़ रही हैं।
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जिला अस्पताल के अतिरिक्त बागपत, बड़ौत व छपरौली सीएचसी पर एलएफटी (लीवर की जांच) और केएफटी (किडनी की जांच) की सुविधा है। यहां रोजाना करीब 300 मरीज जांच कराते थे। बागपत सीएचसी पर काफी समय से जांच में इस्तेमाल होने वाला केमिकल नहीं है। इसलिए यहां लीवर व किडनी की जांच नहीं हो रही हैं। इसी तरह छपरौली सीएचसी पर दो वर्ष से स्टाफ नहीं होने से जांच बंद हैं। इनके अतिरिक्त जिला अस्पताल में खून की जांच करने वाली मशीन भी खराब है। जिले में केवल बड़ौत सीएचसी पर जांच हो रही हैं।
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मरीज को उठानी पड़ रही परेशानी
जिला अस्पताल में शुक्रवार को जांच कराने पहुंची पुराना कस्बा निवासी अफसाना ने बताया कि वह चिकित्सक की सलाह पर लीवर की जांच कराने आई थी। लैब में मशीन खराब है। इसलिए उसे निजी प्रयोगशाला जाना पडे़गा। सूजती के धन्नी ने बताया कि वह दो दिन से जांच कराने के लिए अस्पताल के चक्कर लगा रहा है। अब उसे निजी प्रयोगशाला में जांच करानी होगी। अग्रवाल मंडी टटीरी के अंकित कुमार का कहना है कि जिला अस्पताल के चिकित्सक ने जांच करने में असमर्थता जताई है। सिसाना के कालू का कहना है कि जिला अस्पताल में मशीन खराब होने से जांच नहीं की जा रही हैं।
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मशीन लखनऊ में ठीक होगी
जिला अस्पताल में लीवर, किडनी व शुगर जांच की मशीन के जल्द ठीक होने की उम्मीद नहीं दिख रही है। इसके उपकरण को मरम्मत के लिए लखनऊ भेजा गया है। वहां से कब तक आएगा, चिकित्सकों को भी जानकारी नहीं है।

वर्जन
मशीन खराब होने से जिला अस्पताल में लीवर व किडनी की जांच नहीं हो रही हैं। मशीन का पार्ट मरम्मत के लिए लखनऊ भेजा गया है। मशीन ठीक होने पर जांच फिर शुरू कर दी जाएगी।-डा. बीएल कुशवाहा, सीएमएस जिला अस्पताल
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