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डीजल, बिजली और उर्वरक के दाम बढने से बढ़ गई फसल की लागत

Tue, 28 Sep 2021 10:39 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 28 Sep 2021 10:39 PM IST
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Inflation increased the cost of crops
ईख बांधता किसान कंवरपाल राणा - फोटो : BAGHPAT
डीजल, बिजली व उर्वरक के दाम बढ़ने से कई गुना बढ़ गई फसल की लागत
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किसानों ने गन्ने के दाम में 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी को बताया नाकाफी
संवाद न्यूज एजेंसी
दाहा। वर्तमान पेराई सत्र के लिए गन्ना मूल्य घोषित हो चुका है। सरकार ने गन्ने के दाम में 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है। इस तरह गन्ने का दाम 340-350 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। इस बढ़ोतरी को किसानों ने नाकाफी बताया है। कहना है कि पिछले वर्ष डीजल का मूल्य 80 रुपये प्रति लीटर था। अब बढ़कर 95 रुपये प्रति लीटर हो गया है। इसके अतिरिक्त सरकार ने यूरिया के दामों में इजाफा न करके बोरे का वजन पांच किलो कम दिया है। डीएपी के दाम 1150 रुपये से बढ़कर 1200 हो गए हैं। डीजल, यूरिया और डीएपी के दाम बढ़ने से फसल की लागत डेढ़ गुणा तक बढ़ गई है।
किसानों की स्थिति सुधारने के लिए उठाए जाए कुछ कदम
पुष्पेंद्र का कहना है कि डीजल, बिजली व उर्वरक के दाम बढ़ने से फसल की लागत बढ़ गई है। भड़ल के तिरपाल का कहना कि सरकार की करनी-कथनी में अंतर है। चार साल में गन्ना मूल्य नहीं बढ़ाया है। न ही समय पर बकाए का भुगतान कराया जा रहा है। भड़ल के किसान कर्ण सिंह का कहना है कि पिछले चार साल में उर्वरक, कीटनाशक के दाम दोगुना हो गए हैं। निराई-गुड़ाई भी लगभग डेढ़ गुणा बढ़ गई है। नगला कनवाड़ा के मांगेराम का कहना है बढ़ती महंगाई के बावजूद गन्ने का मूल्य न बढ़ने से किसानों को फसल की लागत भी नहीं मिल रही है। बकाया गन्ना मूल्य भुगतान न होने के कारण किसान कर्ज में डूब रहा है। सभी कहना है कि बताया कि जिस अनुपात में डीजल, खाद, बिजली के दाम बढ़े है, उससे फसलों की लागत में कई गुना वृद्धि हो गई है। सरकार को किसानों की स्थिति में सुधार करने के लिए कुछ और ठोस कदम उठाने चाहिए।
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ऐसे बढ़े डीजल और उर्वरकों के दाम
- डीजल एक साल पहले 64 रुपये 93 पैसे था। अब 89 रुपये 87 पैसे प्रति लीटर है।
- डीएपी पहले 1150 रुपये था, अब 1200 रुपये बेचा जा रहा है।
- यूरिया के दामों में बढ़ोत्तरी नहीं की गई है, मगर पांच किलोग्राम वजन कम कर दिया है। अब यूरिया यूरिया का बैग 50 किलो के बजाए 45 किलोग्राम में आता है।
- पहले जुताई का खर्च 450 रुपये प्रति बीघा आता था, अब 700 रुपये हो गई है।
- बिजली के दामों बढ़ने से सिंचाई का खर्च बढ़ गया है।
12 शुगर मिलों पर 741 करोड़ रुपये बकाया
बागपत के किसान बागपत, मुजफ्फरनगर, शामली, हापुड़ व मेरठ की 12 मिलों पर गन्ने की सप्लाई करते है। मेरठ की दौराला मिल, नंगलामल मिल और मुजफ्फरनगर की खतौली मिल ने ही किसानों के बकाए का भुगतान किया है। अन्य नौ शुगर मिलों पर किसानों का 741 करोड़ रुपये का बकाया है। बकाए का भुगतान नहीं होने के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है। किसान लगातार गन्ने का भुगतान जल्द करने की मांग कर रहे है।
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